मुंबई: साकीनाका में खुले मैनहोल में गिरकर 60 वर्षीय असलम शेख की मौत, मानवाधिकार आयोग में शिकायत
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई के साकीनाका इलाके में खैरानी रोड पर 2 जुलाई को भारी बारिश और जलभराव के दौरान एक खुले मैनहोल में गिरने से 60 वर्षीय असलम शेख की मौत हो गई। यह हादसा उस वक्त हुआ जब उस स्थान पर ड्रेनेज ग्रिल की मरम्मत का काम जारी था। घटना के बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के अधिकारियों पर लापरवाही के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
घटनाक्रम: कैसे हुआ हादसा
फायर ब्रिगेड अधिकारी एबी सोनावणे के अनुसार, सीवर लाइन में एक व्यक्ति के फंसे होने की सूचना मिलते ही बचाव दल तत्काल मौके पर पहुँचा। तेज पानी के बहाव के कारण असलम शेख लगभग 100 फीट दूर दूसरे मैनहोल तक बह गए थे। रेस्क्यू टीम ने उन्हें पानी की सतह के पास ड्रेन होल में फंसा पाया।
फायर विभाग के कर्मचारी प्रकाश सतपाल ने बताया कि एबी सोनावणे के नेतृत्व में टीम ने करीब 20 से 22 मिनट चले अभियान के बाद हार्नेस की सहायता से पीड़ित को बाहर निकाला। इसके बाद उन्हें 108 एम्बुलेंस के ज़रिये राजावाड़ी अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मानवाधिकार आयोग में शिकायत
इस घटना के बाद वकील पंकज कुमार मिश्रा ने महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि BMC के एल वॉर्ड के अधिकारियों की कथित लापरवाही के कारण एक बुजुर्ग व्यक्ति की जान गई, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
शिकायत में दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई, समयबद्ध जाँच, FIR दर्ज करने और विस्तृत रिपोर्ट तलब करने की माँग की गई है। इसके साथ ही पीड़ित परिवार को उचित मुआवज़ा देने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ड्रेनेज व्यवस्था एवं सुरक्षा मानकों का स्वतंत्र ऑडिट कराने की भी माँग की गई है।
परिजन और मित्रों के आरोप
मृतक के मित्र इरफान ने आरोप लगाया कि मरम्मत स्थल पर पर्याप्त सुरक्षा इंतज़ाम और बैरिकेडिंग नहीं की गई थी, जिसके कारण यह हादसा हुआ। उन्होंने संबंधित ठेकेदार, वार्ड अधिकारियों और अन्य ज़िम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज करने तथा मृतक के परिवार को उचित मुआवज़ा दिलाने की माँग की है।
आम जनता पर असर और व्यापक सवाल
यह ऐसे समय में आया है जब मुंबई में मानसून के दौरान खुले मैनहोल और जलभराव से होने वाली मौतें एक पुरानी और बार-बार उठने वाली समस्या बन चुकी है। गौरतलब है कि हर साल बारिश के मौसम में ऐसी घटनाएँ सामने आती हैं, फिर भी नागरिक निकायों द्वारा सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित नहीं हो पाता। आलोचकों का कहना है कि मरम्मत कार्य के दौरान अनिवार्य बैरिकेडिंग और सूचना संकेतों की अनदेखी सीधे तौर पर प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है।
मानवाधिकार आयोग की जाँच और संभावित FIR के नतीजे तय करेंगे कि इस मामले में जवाबदेही किस स्तर तक सुनिश्चित होती है।