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बीएमसी लापरवाही: शिवसेना (यूबीटी) की माँग — राजनीतिक नेताओं पर गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज हो

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बीएमसी लापरवाही: शिवसेना (यूबीटी) की माँग — राजनीतिक नेताओं पर गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज हो

सारांश

मुंबई में मानसून की शुरुआत में ही दो मौतें — एक स्कूली छात्र और एक बुजुर्ग — और शिवसेना (यूबीटी) का सीधा आरोप: बीएमसी पर काबिज भ्रष्ट व्यवस्था जिम्मेदार है। 'सामना' ने सिर्फ इस्तीफे की नहीं, गैर-इरादतन हत्या के मुकदमे की माँग उठाई — और निशाना सीधे सत्ताधारी गठबंधन पर।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) ने बीएमसी पर शासन करने वाले राजनीतिक नेताओं के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की माँग की।
चेंबूर में पेड़ गिरने से स्कूली छात्र की मौत; साकीनाका में खुले मैनहोल में गिरने से 60 वर्षीय व्यक्ति की मौत।
मेयर रितु तावड़े के '104% डीसिल्टिंग' के दावे पर आलोचकों ने सवाल उठाए।
उपमहापौर संजय घाड़ी (शिंदे गुट) ने आयुक्त अश्विनी भिड़े का इस्तीफा माँगा; 'सामना' ने इसे 'बौद्धिक दिवालियापन' बताया।
आयुक्त भिड़े ने लापरवाह ठेकेदारों के खिलाफ पुलिस केस दर्ज करने के निर्देश दिए।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने 5 जुलाई 2025 को आरोप लगाया कि बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) का प्रशासन कथित तौर पर भ्रष्ट तत्वों के नियंत्रण में है, और मानसून की शुरुआती बारिश में हुई दो मौतों की जिम्मेदारी सत्ताधारी राजनीतिक नेताओं पर डालते हुए उनके खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की माँग की। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में यह माँग उठाई गई।

दो मौतें, दो अलग हादसे

चेंबूर इलाके में एक स्कूल बस पर पेड़ गिरने से एक स्कूली छात्र की मौत हो गई। वहीं साकीनाका में एक 60 वर्षीय व्यक्ति खुले और बिना सुरक्षा इंतजाम वाले सीवर मैनहोल में गिरकर मारा गया। 'सामना' के संपादकीय में कहा गया कि ये मौतें मुंबई की जर्जर नागरिक व्यवस्था और बुनियादी ढाँचे की विफलता का सीधा परिणाम हैं।

बीएमसी की मानसून-पूर्व तैयारियों पर सवाल

संपादकीय के अनुसार, बीएमसी समय पर नालों की सफाई, सड़कों की मरम्मत और खतरनाक पेड़ों की छंटाई करने में नाकाम रही। आलोचकों ने मेयर रितु तावड़े के उस दावे पर सवाल उठाए, जिसमें उन्होंने घोषणा की थी कि मानसून से पहले नालों की डीसिल्टिंग का 104 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। आलोचकों का कहना है कि '100 से अधिक प्रतिशत' के इस आँकड़े का कोई गणितीय आधार नहीं है और यह ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुँचाने की व्यवस्था को छुपाने की कोशिश है।

सत्ताधारी गठबंधन में दरार

इस संकट ने सत्ताधारी महायुति गठबंधन के भीतर भी मतभेद उजागर कर दिए हैं। शिवसेना (शिंदे गुट) से जुड़े उपमहापौर संजय घाड़ी ने बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े के इस्तीफे की माँग की है। हालाँकि, 'सामना' के संपादकीय में इस माँग को 'बौद्धिक दिवालियापन' बताते हुए कहा गया कि शहरी विकास मंत्रालय स्वयं एकनाथ शिंदे के पास है, इसलिए जवाबदेही केवल आयुक्त तक सीमित नहीं की जा सकती।

भ्रष्टाचार और राजनीतिक विचलन के आरोप

ठाकरे गुट ने आरोप लगाया कि एक गैर-जवाबदेह व्यवस्था के उभरने से निजी ठेकेदारों से मिलने वाला कमीशन भ्रष्ट अधिकारियों के बीच बाँटा जा रहा है। संपादकीय में मुलुंड के एक भाजपा नेता — जिन्हें व्यंग्यात्मक रूप से 'पोपटलाल' कहा गया — पर निशाना साधा गया, जो कथित तौर पर बांग्लादेशी घुसपैठियों के मुद्दे पर बार-बार बीएमसी मुख्यालय जा रहे हैं, जबकि यह विषय कानूनी रूप से केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है। संपादकीय में कहा गया, "इन्हें दिल्ली जाकर गृह मंत्री अमित शाह से सवाल पूछने चाहिए।"

आयुक्त की प्रतिक्रिया और आगे की राह

बढ़ती आलोचना के बीच आयुक्त अश्विनी भिड़े ने पुलिस को निर्देश दिया कि लापरवाह ठेकेदारों के खिलाफ मामले दर्ज किए जाएँ। भिड़े को अंडरग्राउंड मेट्रो टनल निर्माण की देखरेख के कारण 'मेट्रो वुमन' के नाम से जाना जाता है, लेकिन गड्ढों और डीसिल्टिंग की विफलता को लेकर उनके कार्यकाल की तीखी आलोचना हो रही है। यह ऐसे समय में आया है जब मुंबई में मानसून अभी शुरुआती चरण में ही है और आने वाले हफ्तों में और भारी बारिश की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक असली सवाल उठाती है — जब नागरिक बुनियादी ढाँचे की विफलता से जानें जाती हैं, तो जवाबदेही केवल अफसरशाही तक सीमित क्यों रहे? '104% डीसिल्टिंग' जैसे दावे जब जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते, तो यह सिर्फ प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि जनता के साथ छल है। गौरतलब है कि बीएमसी देश की सबसे धनी नगर निगमों में से एक है — फिर भी हर मानसून में यही कहानी दोहराई जाती है। असली सवाल यह है कि क्या ठेकेदारों पर केस दर्ज करना पर्याप्त है, या जिस राजनीतिक-प्रशासनिक तंत्र ने इस व्यवस्था को पनपने दिया, उसकी भी जाँच होनी चाहिए।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवसेना (यूबीटी) ने बीएमसी पर क्या माँग की है?
शिवसेना (यूबीटी) ने माँग की है कि बीएमसी का संचालन करने वाले राजनीतिक नेताओं के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जाए। यह माँग पार्टी के मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में उठाई गई, जिसमें मानसून की शुरुआती बारिश में हुई दो मौतों को बीएमसी की लापरवाही का नतीजा बताया गया।
मुंबई में मानसून के दौरान कौन-सी दो मौतें हुईं?
चेंबूर में एक स्कूल बस पर पेड़ गिरने से एक स्कूली छात्र की मौत हुई। साकीनाका में एक 60 वर्षीय व्यक्ति खुले और बिना सुरक्षा इंतजाम वाले सीवर मैनहोल में गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई।
बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े के इस्तीफे की माँग किसने की?
शिवसेना के शिंदे गुट से जुड़े उपमहापौर संजय घाड़ी ने बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े के इस्तीफे की माँग की है। हालाँकि 'सामना' के संपादकीय में इस माँग को 'बौद्धिक दिवालियापन' बताया गया, क्योंकि शहरी विकास मंत्रालय एकनाथ शिंदे के पास है।
मेयर रितु तावड़े के '104% डीसिल्टिंग' के दावे पर विवाद क्यों है?
मेयर रितु तावड़े ने घोषणा की थी कि मानसून से पहले नालों की डीसिल्टिंग का 104 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। आलोचकों ने इस आँकड़े पर सवाल उठाया है कि 100 से अधिक प्रतिशत का गणितीय आधार क्या है, और आरोप लगाया है कि शहर सरकार के पसंदीदा ठेकेदारों को अनुचित लाभ दिया जा रहा है।
बीएमसी आयुक्त ने लापरवाही के आरोपों पर क्या कदम उठाया?
बढ़ती आलोचना के बीच आयुक्त अश्विनी भिड़े ने पुलिस को निर्देश दिया कि उन लापरवाह ठेकेदारों के खिलाफ मामले दर्ज किए जाएँ जिनकी कथित लापरवाही के कारण लोगों की जान गई। हालाँकि आलोचकों का कहना है कि यह कदम पर्याप्त नहीं है और व्यापक जवाबदेही की जरूरत है।
राष्ट्र प्रेस
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