गुजरात के पहले दो एयर-फिल्ड रबर डैम: दक्षिण कोरियाई तकनीक से ₹162 करोड़ की सिंचाई क्रांति
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार दक्षिण कोरियाई रबर ब्लैडर तकनीक का उपयोग करके राज्य के पहले दो एयर-फिल्ड रबर डैम निर्मित कर रही है — एक छोटा उदयपुर जिले की हेरन नदी पर और दूसरा तापी जिले की अंबिका नदी पर। इन दोनों परियोजनाओं में कुल मिलाकर ₹162 करोड़ से अधिक का निवेश किया गया है और इनसे सिंचाई, भूजल पुनर्भरण तथा बाढ़ प्रबंधन में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है।
मुख्य परियोजनाएँ
राजवासना रबर बांध, छोटा उदयपुर जिले के बोदेली तालुका में हेरन नदी पर ₹82.97 करोड़ से अधिक की अनुमानित लागत से निर्मित हो रहा है। इस परियोजना में 180 मीटर लंबा और 3.5 मीटर ऊँचा हवा से भरने वाला रबर ब्लैडर लगाया जाएगा। निर्माण कार्य का लगभग 75 प्रतिशत पूरा हो चुका है और इसे सितंबर 2027 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है।
दूसरी परियोजना, पाठकवाड़ी रबर बांध, तापी जिले के डोलवन तालुका में अंबिका नदी पर ₹79.13 करोड़ की अनुमानित लागत से बन रही है। इसका 90 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।
तकनीकी विशेषताएँ
पाठकवाड़ी बांध को जापानी कोड 2000 मानकों के अनुसार डिज़ाइन किया गया है। इसके रबर ब्लैडर की मोटाई 18 मिमी से 32 मिमी के बीच है और यह 50 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान सहने में सक्षम है। इसकी अनुमानित आयु लगभग 30 वर्ष बताई गई है।
अधिकारियों ने बताया कि हवा से भरे रबर डैम को इसलिए चुना गया क्योंकि सर्वेक्षण में पाया गया कि इलाके की समतल भूमि और नदी के निचले किनारों के कारण पारंपरिक ऊँचे चेक डैम या वियर संरचनाएँ उपयुक्त नहीं थीं। यह निर्णय स्थानीय किसान नेताओं और व्यारा के विधायक मोहन कोकानी के सुझावों के बाद लिया गया।
किसानों और गाँवों पर असर
राजवासना परियोजना से 25 गाँवों के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा, क्योंकि इससे 3,420 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई संभव होगी। यह बांध 3.5 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) पानी संग्रहीत करने में सक्षम होगा।
पाठकवाड़ी बांध से पाठकवाड़ी, ढोडियावाड, उनाई और सिंधाई गाँवों के किसानों को खरीफ और गर्मी की फसलों के लिए पानी उपलब्ध होगा और लगभग 650 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई हो सकेगी। राज्य सरकार की योजना राजवासना वियर स्कीम के तहत नहरों को लाभान्वित गाँवों के तालाबों से जोड़ने की भी है।
बाढ़ प्रबंधन और अतिरिक्त लाभ
अधिकारियों के अनुसार, रबर डैम प्रणाली से मौजूदा वियर में जमा गाद की दीर्घकालिक समस्या भी हल होगी, क्योंकि इससे रेत और गाद को पूरी तरह हटाया जा सकेगा। भारी वर्षा के दौरान ढाँचे की हवा निकालकर उसे नीचे किया जा सकेगा, जिससे बाढ़ का पानी आसानी से निकल सके और आसपास के गाँवों में बाढ़ का खतरा कम हो।
राजवासना परियोजना के तहत नदी के बाएँ किनारे पर 900 मीटर और दाएँ किनारे पर 500 मीटर लंबी बाढ़ सुरक्षा दीवार भी बनाई जाएगी। निर्माण अनुबंध में 10 वर्षों तक संचालन और रखरखाव का कार्य भी शामिल है।
भविष्य की संभावनाएँ
राज्य सरकार के अनुसार, ये परियोजनाएँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'कैच द रेन' अभियान को समर्थन देती हैं और दूरदराज के क्षेत्रों में जल अवसंरचना को सुदृढ़ करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं। अधिकारियों ने यह भी कहा कि इस तकनीक का उपयोग भविष्य में ज्वारीय नियामक के रूप में भी किया जा सकता है, ताकि मीठे पानी के स्रोतों में समुद्री पानी के प्रवेश को रोका जा सके। दोनों परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद गुजरात इस उन्नत तकनीक को अन्य नदी घाटियों में भी लागू करने पर विचार कर सकता है।