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गुजरात में ₹1,147 करोड़ की ग्रीन टेक्नोलॉजी से 20 सड़कों का कायापलट, 10 जिलों में शुरू होगा काम

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गुजरात में ₹1,147 करोड़ की ग्रीन टेक्नोलॉजी से 20 सड़कों का कायापलट, 10 जिलों में शुरू होगा काम

सारांश

गुजरात सरकार ने ₹1,147 करोड़ की लागत से 15 से अधिक जिलों में 20 सड़कों को ग्रीन टेक्नोलॉजी से पुनर्निर्मित करने की योजना बनाई है। पुरानी सड़क सामग्री का पुनः उपयोग, SAMI फाइबर शीट और सीमेंट स्टेबिलाइजेशन — यह परियोजना लागत, पर्यावरण और टिकाऊपन तीनों मोर्चों पर एक साथ काम करने का दावा करती है।

मुख्य बातें

गुजरात सरकार ने ₹1,147 करोड़ की लागत से राज्य के विभिन्न जिलों में 20 सड़कों पर ग्रीन टेक्नोलॉजी से निर्माण की घोषणा की।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में तैयार इस वर्ष के बजट में क्लाइमेट रेजिलिएंट तकनीक का प्रावधान किया गया है।
भरूच में जंबूसर-टंकाली-देवला रोड पर ₹50 करोड़ की विशेष परियोजना को मंजूरी, जो फार्मास्युटिकल बल्क ड्रग पार्क और ONGC प्लांट को जोड़ती है।
पुरानी सड़क सामग्री के पुनः उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी और प्राकृतिक संसाधनों की बचत होगी।
वेस्ट प्लास्टिक रोड, व्हाइट टॉपिंग, ग्लास ग्रिड, SAMI और पर्पेच्युअल पेवमेंट सहित कई आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।

गुजरात सरकार ने 24 मई 2026 को ₹1,147 करोड़ की लागत से राज्य के विभिन्न जिलों में 20 सड़कों के पुनर्निर्माण की योजना की घोषणा की, जिसमें क्लाइमेट रेजिलिएंट और ग्रीन टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में तैयार इस वर्ष के बजट में यह प्रावधान किया गया है, जो पुरानी सड़क सामग्री के पुनः उपयोग पर आधारित है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ बुनियादी ढाँचे को एक साथ साधने का प्रयास है।

किन सड़कों पर होगा काम

इस योजना के तहत राज्य के पाटण, गिर सोमनाथ, महिसागर, भरूच, मोरबी, सुरेन्द्रनगर, सूरत, वडोदरा, छोटा उदेपुर, आणंद, मेहसाणा, कच्छ, भावनगर, जामनगर और नर्मदा जिलों की सड़कों को शामिल किया गया है। इनमें लणवा-मणुंद-संडेर-बालीसाणा रोड (पाटण), राधनपुर-मशाली-माधापुरा रोड (पाटण), भीड़िया सोमनाथ रोड (गिर सोमनाथ), संतरामपुर-झालोद रोड (महिसागर), दयादरा-नबीपुर-झनोर रोड (भरूच), इलाव-कोसंबा रोड (भरूच), मोरबी-नानी वावड़ी-बगथळा रोड (मोरबी), सुरेन्द्रनगर बाईपास रोड, डिंडोली-करड़वा-इकलेरा रोड (सूरत), मांगलेज-नारेश्वर रोड (वडोदरा), कोसिंद्रा-भाखा रोड (छोटा उदेपुर), करजण-आमोद रोड (वडोदरा), इसरवाड़ा-उंदेल रोड (आणंद), वालम-कड़ी रोड (मेहसाणा), पेपळु-कापरा रोड (मेहसाणा), लुणी-गुंदाला-पत्री-टप्पर-बाबिया रोड (कच्छ), वड़ताल-जोळ-बाकरोल रोड (आणंद), तळाजा-गोपनाथ रोड (भावनगर), कालावड़-जामवंथली-फल्ला रोड (जामनगर) और कोठारा एप्रोच रोड (नर्मदा) शामिल हैं।

ग्रीन टेक्नोलॉजी की कार्यप्रणाली

इस तकनीक में मौजूदा सड़क को उखाड़कर उसकी पुरानी सामग्री को ही पुनः उपयोग में लाया जाता है। पहले सड़क की पुरानी परत को हटाकर उस पर चूना बिछाया जाता है, फिर उसे पीसकर रोलर से स्थिर किया जाता है। इसके बाद उखाड़ी गई सामग्री को पुनः बिछाकर ड्राई रोलिंग की जाती है।

सात दिनों की इस प्रक्रिया के बाद नॉन वूवन मटीरियल — स्ट्रेस एब्जॉर्बिंग मेंब्रेन (SAMI) बिछाई जाती है, जो एक हाई-टेक फाइबर शीट होती है। यह शीट दरारों को सतह तक पहुँचने से रोकती है, वाहनों के दबाव को अवशोषित करती है और सड़क की आयु बढ़ाती है। अंत में इस पर डामर की परत लगाई जाती है।

भरूच में ₹50 करोड़ की विशेष परियोजना

भरूच जिले में जंबूसर-टंकाली-देवला रोड पर ₹50 करोड़ की लागत से ग्रीन टेक्नोलॉजी से पुनर्निर्माण की मंजूरी दी गई है। यह सड़क जंबूसर के निकट फार्मास्युटिकल बल्क ड्रग पार्क और ONGC प्लांट को जोड़ती है। इसके साथ ही यह नमक की खेती वाले क्षेत्र और झिंगा पालन के तालाबों तक भी पहुँच प्रदान करती है। यह सड़क वडोदरा को रेलवे, एयरपोर्ट और एक्सप्रेस-वे के माध्यम से देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण राज्य हाईवे है।

नई सड़क निर्माण तकनीकें

इस परियोजना में कई आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। वेस्ट प्लास्टिक रोड में प्लास्टिक को डामर के साथ मिलाया जाता है। व्हाइट टॉपिंग में पुराने डामर पर कंक्रीट बिछाई जाती है। जियोग्रिड नरम मिट्टी में सड़क का भार वितरित करने में सहायक है, जबकि ग्लास ग्रिड डामर की परतों के बीच बिछाकर सड़क की मजबूती और आयु बढ़ाता है।

इसके अलावा कोल्ड मिक्स एस्फाल्ट मानसून में भी काम आता है, सीमेंट स्टेबिलाइजेशन से मजबूत बेस तैयार होता है, फ्लाई ऐश (थर्मल पावर प्लांट का उपोत्पाद) का उपयोग होता है, और पर्पेच्युअल पेवमेंट तकनीक से बहुपरतीय मजबूत सड़क बनाई जाती है जिसकी मरम्मत लागत न्यूनतम रहती है।

पर्यावरण और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

गौरतलब है कि पुरानी सड़क सामग्री के पुनः उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है और प्राकृतिक संसाधनों की बचत होती है। साथ ही, नई सामग्री की खरीद न होने से निर्माण लागत भी घटती है और सड़क का बेस अधिक मजबूत बनता है। इन सड़कों पर सड़क चौड़ीकरण, आरसीसी गटरलाइन, रीसर्फेसिंग, प्रोटेक्शन वर्क, फोरलेन, रंबल स्ट्रिप, रोड फर्नीचर, साइड शोल्डर और व्हाइट टॉपिंग जैसे कार्य भी किए जाएंगे। यह परियोजना गुजरात के बुनियादी ढाँचे को टिकाऊ और भविष्योन्मुखी बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

147 करोड़ की सड़क परियोजना 'ग्रीन' लेबल के साथ आती है, लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में है — क्या पुरानी सामग्री के पुनः उपयोग का दावा स्वतंत्र सत्यापन से गुजरेगा? राज्य में पिछले कई वर्षों में सड़क निर्माण परियोजनाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठते रहे हैं, और नई तकनीकें तब तक अर्थपूर्ण नहीं होतीं जब तक उनकी दीर्घकालिक निगरानी का ढाँचा न हो। भरूच जैसे औद्योगिक गलियारों में कनेक्टिविटी सुधार निश्चित रूप से आर्थिक लाभ देगी, लेकिन 20 सड़कों की इस सूची में ग्रामीण और शहरी प्राथमिकताओं का संतुलन जनता के लिए असली मायने रखता है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात में ग्रीन टेक्नोलॉजी से सड़क निर्माण की योजना क्या है?
गुजरात सरकार ने ₹1,147 करोड़ की लागत से राज्य के 15 से अधिक जिलों में 20 सड़कों पर क्लाइमेट रेजिलिएंट और ग्रीन टेक्नोलॉजी से निर्माण की योजना बनाई है। इसमें पुरानी सड़क सामग्री का पुनः उपयोग कर लागत और कार्बन उत्सर्जन दोनों कम करने का लक्ष्य है।
ग्रीन टेक्नोलॉजी से सड़क निर्माण की प्रक्रिया कैसे काम करती है?
इस तकनीक में पुरानी सड़क को उखाड़कर उसकी सामग्री को पुनः उपयोग में लाया जाता है। चूना बिछाकर, रोलर से स्थिर करके और SAMI (स्ट्रेस एब्जॉर्बिंग मेंब्रेन) फाइबर शीट लगाने के बाद डामर की परत चढ़ाई जाती है, जिससे सड़क अधिक टिकाऊ और दरार-प्रतिरोधी बनती है।
भरूच में जंबूसर-टंकाली-देवला रोड परियोजना क्यों महत्वपूर्ण है?
यह सड़क जंबूसर के फार्मास्युटिकल बल्क ड्रग पार्क और ONGC प्लांट को जोड़ती है। ₹50 करोड़ की इस परियोजना से वडोदरा को रेलवे, एयरपोर्ट और एक्सप्रेस-वे से सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियाँ तेज होंगी।
इस परियोजना से पर्यावरण को क्या लाभ होगा?
पुरानी सड़क सामग्री के पुनः उपयोग से नई सामग्री के खनन और परिवहन की आवश्यकता कम होती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन घटता है और प्राकृतिक संसाधनों की बचत होती है। साथ ही, बार-बार मरम्मत की ज़रूरत कम होने से दीर्घकालिक पर्यावरणीय बोझ भी घटता है।
इस योजना में कौन-कौन सी नई सड़क निर्माण तकनीकें शामिल हैं?
योजना में वेस्ट प्लास्टिक रोड, व्हाइट टॉपिंग, जियोग्रिड, ग्लास ग्रिड, कोल्ड मिक्स एस्फाल्ट, सीमेंट स्टेबिलाइजेशन, फ्लाई ऐश, इंटरलॉकिंग पेवर्स, पैनल्ड कंक्रीट और पर्पेच्युअल पेवमेंट जैसी आधुनिक तकनीकें शामिल हैं। हर सड़क की ज़रूरत के अनुसार उपयुक्त तकनीक का चयन किया जाएगा।
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