गुजरात में ₹1,147 करोड़ की ग्रीन टेक्नोलॉजी से 20 सड़कों का कायापलट, 10 जिलों में शुरू होगा काम
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने 24 मई 2026 को ₹1,147 करोड़ की लागत से राज्य के विभिन्न जिलों में 20 सड़कों के पुनर्निर्माण की योजना की घोषणा की, जिसमें क्लाइमेट रेजिलिएंट और ग्रीन टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में तैयार इस वर्ष के बजट में यह प्रावधान किया गया है, जो पुरानी सड़क सामग्री के पुनः उपयोग पर आधारित है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ बुनियादी ढाँचे को एक साथ साधने का प्रयास है।
किन सड़कों पर होगा काम
इस योजना के तहत राज्य के पाटण, गिर सोमनाथ, महिसागर, भरूच, मोरबी, सुरेन्द्रनगर, सूरत, वडोदरा, छोटा उदेपुर, आणंद, मेहसाणा, कच्छ, भावनगर, जामनगर और नर्मदा जिलों की सड़कों को शामिल किया गया है। इनमें लणवा-मणुंद-संडेर-बालीसाणा रोड (पाटण), राधनपुर-मशाली-माधापुरा रोड (पाटण), भीड़िया सोमनाथ रोड (गिर सोमनाथ), संतरामपुर-झालोद रोड (महिसागर), दयादरा-नबीपुर-झनोर रोड (भरूच), इलाव-कोसंबा रोड (भरूच), मोरबी-नानी वावड़ी-बगथळा रोड (मोरबी), सुरेन्द्रनगर बाईपास रोड, डिंडोली-करड़वा-इकलेरा रोड (सूरत), मांगलेज-नारेश्वर रोड (वडोदरा), कोसिंद्रा-भाखा रोड (छोटा उदेपुर), करजण-आमोद रोड (वडोदरा), इसरवाड़ा-उंदेल रोड (आणंद), वालम-कड़ी रोड (मेहसाणा), पेपळु-कापरा रोड (मेहसाणा), लुणी-गुंदाला-पत्री-टप्पर-बाबिया रोड (कच्छ), वड़ताल-जोळ-बाकरोल रोड (आणंद), तळाजा-गोपनाथ रोड (भावनगर), कालावड़-जामवंथली-फल्ला रोड (जामनगर) और कोठारा एप्रोच रोड (नर्मदा) शामिल हैं।
ग्रीन टेक्नोलॉजी की कार्यप्रणाली
इस तकनीक में मौजूदा सड़क को उखाड़कर उसकी पुरानी सामग्री को ही पुनः उपयोग में लाया जाता है। पहले सड़क की पुरानी परत को हटाकर उस पर चूना बिछाया जाता है, फिर उसे पीसकर रोलर से स्थिर किया जाता है। इसके बाद उखाड़ी गई सामग्री को पुनः बिछाकर ड्राई रोलिंग की जाती है।
सात दिनों की इस प्रक्रिया के बाद नॉन वूवन मटीरियल — स्ट्रेस एब्जॉर्बिंग मेंब्रेन (SAMI) बिछाई जाती है, जो एक हाई-टेक फाइबर शीट होती है। यह शीट दरारों को सतह तक पहुँचने से रोकती है, वाहनों के दबाव को अवशोषित करती है और सड़क की आयु बढ़ाती है। अंत में इस पर डामर की परत लगाई जाती है।
भरूच में ₹50 करोड़ की विशेष परियोजना
भरूच जिले में जंबूसर-टंकाली-देवला रोड पर ₹50 करोड़ की लागत से ग्रीन टेक्नोलॉजी से पुनर्निर्माण की मंजूरी दी गई है। यह सड़क जंबूसर के निकट फार्मास्युटिकल बल्क ड्रग पार्क और ONGC प्लांट को जोड़ती है। इसके साथ ही यह नमक की खेती वाले क्षेत्र और झिंगा पालन के तालाबों तक भी पहुँच प्रदान करती है। यह सड़क वडोदरा को रेलवे, एयरपोर्ट और एक्सप्रेस-वे के माध्यम से देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण राज्य हाईवे है।
नई सड़क निर्माण तकनीकें
इस परियोजना में कई आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। वेस्ट प्लास्टिक रोड में प्लास्टिक को डामर के साथ मिलाया जाता है। व्हाइट टॉपिंग में पुराने डामर पर कंक्रीट बिछाई जाती है। जियोग्रिड नरम मिट्टी में सड़क का भार वितरित करने में सहायक है, जबकि ग्लास ग्रिड डामर की परतों के बीच बिछाकर सड़क की मजबूती और आयु बढ़ाता है।
इसके अलावा कोल्ड मिक्स एस्फाल्ट मानसून में भी काम आता है, सीमेंट स्टेबिलाइजेशन से मजबूत बेस तैयार होता है, फ्लाई ऐश (थर्मल पावर प्लांट का उपोत्पाद) का उपयोग होता है, और पर्पेच्युअल पेवमेंट तकनीक से बहुपरतीय मजबूत सड़क बनाई जाती है जिसकी मरम्मत लागत न्यूनतम रहती है।
पर्यावरण और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
गौरतलब है कि पुरानी सड़क सामग्री के पुनः उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है और प्राकृतिक संसाधनों की बचत होती है। साथ ही, नई सामग्री की खरीद न होने से निर्माण लागत भी घटती है और सड़क का बेस अधिक मजबूत बनता है। इन सड़कों पर सड़क चौड़ीकरण, आरसीसी गटरलाइन, रीसर्फेसिंग, प्रोटेक्शन वर्क, फोरलेन, रंबल स्ट्रिप, रोड फर्नीचर, साइड शोल्डर और व्हाइट टॉपिंग जैसे कार्य भी किए जाएंगे। यह परियोजना गुजरात के बुनियादी ढाँचे को टिकाऊ और भविष्योन्मुखी बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।