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दिल्ली में 1,000 इलेक्ट्रिक टैक्सियाँ लॉन्च, एक साल में 10,000 का लक्ष्य; विश्व पर्यावरण दिवस पर बड़ी पहल

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दिल्ली में 1,000 इलेक्ट्रिक टैक्सियाँ लॉन्च, एक साल में 10,000 का लक्ष्य; विश्व पर्यावरण दिवस पर बड़ी पहल

सारांश

विश्व पर्यावरण दिवस पर दिल्ली सचिवालय से 1,000 इलेक्ट्रिक टैक्सियों की शुरुआत हुई — AI निगरानी, SOS बटन और ऐप-बुकिंग के साथ। वियतनामी कंपनी ग्रीन एसएम का 'मेक इन इंडिया' दांव: एक साल में 10,000 ईवी टैक्सियों का लक्ष्य।

मुख्य बातें

5 जून 2025 को विश्व पर्यावरण दिवस पर दिल्ली सचिवालय से नई ऐप-आधारित इलेक्ट्रिक टैक्सी सेवा लॉन्च की गई।
पहले चरण में दिल्ली-एनसीआर में 1,000 इलेक्ट्रिक टैक्सियाँ तैनात; एक साल में 10,000 का लक्ष्य।
वियतनाम की कंपनी ग्रीन एसएम (GSM) ने तमिलनाडु में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित किया, 'मेक इन इंडिया' के तहत एफडीआई।
हर टैक्सी में एआई कैमरा निगरानी , रियल-टाइम मॉनिटरिंग और इमरजेंसी एसओएस बटन की सुविधा।
कंपनी भविष्य में बेड़े में महिला ड्राइवरों की भागीदारी बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है।

दिल्ली सरकार ने 5 जून 2025 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राजधानी में एक नई ऐप-आधारित इलेक्ट्रिक टैक्सी सेवा की शुरुआत की, जिसे दिल्ली सचिवालय से हरी झंडी दिखाई गई। पहले चरण में दिल्ली-एनसीआर में 1,000 इलेक्ट्रिक टैक्सियाँ तैनात की गई हैं और अगले एक वर्ष में इनकी संख्या 10,000 तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार इसे दिल्ली को प्रदूषण मुक्त और हरित बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम बता रही है।

लॉन्च समारोह और प्रमुख उपस्थिति

इस अवसर पर पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा और परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से सेवा को रवाना किया। वियतनाम की कंपनी ग्रीन एसएम (GSM) के ग्लोबल सीईओ गुयेन वान थान्ह और विंग्रुप एशिया के सीईओ फाम सान्ह चाऊ भी समारोह में उपस्थित रहे। कंपनी ने तमिलनाडु में अपना मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित किया है और 'मेक इन इंडिया' पहल के अंतर्गत भारत में बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) किया है।

सरकार की प्रतिक्रिया

पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, 'मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार प्रदूषण कम करने और लोगों के जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए लगातार हरित पहलों को बढ़ावा दे रही है।' उन्होंने वृक्षारोपण, स्वच्छ तकनीकों और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को स्वस्थ दिल्ली की दिशा में महत्वपूर्ण स्तंभ बताया।

परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह ने कहा कि यह सेवा दिल्ली ईवी नीति का एक अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य स्वच्छ परिवहन को प्रोत्साहित करना, वाहनों से होने वाले प्रदूषण को घटाना और वायु गुणवत्ता में सुधार लाना है। उन्होंने इसे राजधानी को हरित बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।

सुरक्षा सुविधाएँ

इन टैक्सियों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है। प्रत्येक वाहन में एआई-आधारित आंतरिक और बाहरी कैमरा निगरानी, रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम और ड्राइवर व यात्री दोनों के लिए इमरजेंसी एसओएस बटन लगाए गए हैं। सड़क, ड्राइवर और यात्री क्षेत्र की अलग-अलग निगरानी के लिए अलग कैमरे भी मौजूद हैं।

महिला सशक्तीकरण और 'मेक इन इंडिया'

मंत्री सिरसा ने बताया कि कंपनी भविष्य में अपने बेड़े में महिला ड्राइवरों की भागीदारी बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है, जो महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में निर्मित ये वाहन 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' के सशक्त उदाहरण हैं और देश की बढ़ती तकनीकी व विनिर्माण क्षमता को रेखांकित करते हैं।

आगे की राह

यह पहल ऐसे समय में आई है जब दिल्ली लगातार खराब वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के कारण चर्चा में रहती है। गौरतलब है कि दिल्ली ईवी नीति के तहत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। यदि एक वर्ष में 10,000 इलेक्ट्रिक टैक्सियाँ सड़कों पर उतरती हैं, तो यह दिल्ली-एनसीआर में परिवहन क्षेत्र से होने वाले उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी ला सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में है — एक साल में 1,000 से 10,000 टैक्सियों का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है और इसके लिए चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर, ड्राइवर प्रशिक्षण और नियामक समन्वय की ठोस व्यवस्था जरूरी होगी। यह ध्यान देने योग्य है कि दिल्ली में पहले भी ईवी नीति के तहत कई घोषणाएँ हुई हैं, पर जमीनी स्तर पर चार्जिंग नेटवर्क अभी भी पर्याप्त नहीं है। वियतनामी निवेश और 'मेक इन इंडिया' का संयोजन नीतिगत दृष्टि से उत्साहजनक है, परंतु इस सेवा का दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर वास्तविक प्रभाव तभी दिखेगा जब बेड़ा वास्तव में 10,000 के पार पहुँचे और पारंपरिक डीजल-पेट्रोल टैक्सियों का विकल्प बने।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली की नई इलेक्ट्रिक टैक्सी सेवा क्या है?
यह एक ऐप-आधारित इलेक्ट्रिक टैक्सी सेवा है जिसे 5 जून 2025 को विश्व पर्यावरण दिवस पर दिल्ली सचिवालय से लॉन्च किया गया। पहले चरण में दिल्ली-एनसीआर में 1,000 इलेक्ट्रिक टैक्सियाँ तैनात की गई हैं और एक साल में इनकी संख्या 10,000 तक पहुँचाने का लक्ष्य है।
इस सेवा को किसने लॉन्च किया और इसके पीछे कौन-सी कंपनी है?
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा और परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह ने इसे हरी झंडी दिखाई। वियतनाम की कंपनी ग्रीन एसएम (GSM) इस सेवा की संचालक है, जिसने तमिलनाडु में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित किया है।
इन इलेक्ट्रिक टैक्सियों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए क्या सुविधाएँ हैं?
प्रत्येक टैक्सी में एआई-आधारित आंतरिक और बाहरी कैमरा निगरानी, रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम और ड्राइवर व यात्री दोनों के लिए इमरजेंसी एसओएस बटन दिए गए हैं। सड़क, ड्राइवर और यात्री क्षेत्र की अलग-अलग निगरानी के लिए अलग कैमरे भी लगाए गए हैं।
यह सेवा दिल्ली की वायु गुणवत्ता के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
दिल्ली लगातार खराब वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के लिए जानी जाती है, जिसमें वाहनों का उत्सर्जन एक बड़ा कारण है। इलेक्ट्रिक टैक्सियों के व्यापक उपयोग से परिवहन क्षेत्र से होने वाले प्रदूषण में कमी आने की उम्मीद है, जो दिल्ली ईवी नीति का मूल उद्देश्य भी है।
'मेक इन इंडिया' से इस सेवा का क्या संबंध है?
ग्रीन एसएम ने 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत तमिलनाडु में अपना मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित किया है और भारत में बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) किया है। इन वाहनों को भारत में निर्मित बताते हुए सरकार इसे 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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