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गुजरात में ₹1,147 करोड़ की हरित तकनीक से 20 सड़कों का कायाकल्प, 15 जिलों को मिलेगा लाभ

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गुजरात में ₹1,147 करोड़ की हरित तकनीक से 20 सड़कों का कायाकल्प, 15 जिलों को मिलेगा लाभ

सारांश

गुजरात सरकार ₹1,147 करोड़ की लागत से 15 जिलों की 20 सड़कों को हरित निर्माण तकनीक से नया रूप देगी। पुनर्चक्रित सामग्री, SAMI परत और व्हाइट टॉपिंग जैसी उन्नत विधियों से ये सड़कें अधिक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल बनेंगी — राज्य के बुनियादी ढाँचे में हरित क्रांति की दिशा में एक ठोस कदम।

मुख्य बातें

गुजरात सरकार ने ₹1,147 करोड़ की लागत से 20 सड़क परियोजनाओं को हरित तकनीक से विकसित करने की योजना बनाई है।
15 जिले — पाटन, गिर सोमनाथ, महिसागर, भरूच, मोरबी, सुरेंद्रनगर, सूरत, वडोदरा, छोटा उदेपुर, आनंद, मेहसाणा, कच्छ, भावनगर, जामनगर और नर्मदा — इस कार्यक्रम में शामिल हैं।
निर्माण में पुनर्चक्रित सड़क सामग्री, चूना-सीमेंट स्थिरीकरण और SAMI (तनाव अवशोषक झिल्ली अंतर्परत) का उपयोग होगा।
व्हाइट टॉपिंग और ग्लास ग्रिड सुदृढ़ीकरण जैसी उन्नत तकनीकें यातायात तीव्रता के अनुसार लागू की जाएँगी।
यह पहल मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य के बुनियादी ढाँचा विकास कार्यक्रम का हिस्सा है।

गुजरात सरकार ने ₹1,147 करोड़ की लागत से राज्य के 15 जिलों में 20 सड़क परियोजनाओं को हरित निर्माण तकनीक के जरिए विकसित करने की योजना तैयार की है। गांधीनगर से मिली जानकारी के अनुसार, इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सड़कों की टिकाऊपन बढ़ाना, निर्माण लागत में कमी लाना और पुरानी सड़क सामग्री का अधिकतम पुनर्चक्रण करना है। यह पहल मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य के बुनियादी ढाँचा विकास कार्यक्रम के तहत लागू की जा रही है।

परियोजना में शामिल जिले और प्रमुख मार्ग

इस कार्यक्रम में पाटन, गिर सोमनाथ, महिसागर, भरूच, मोरबी, सुरेंद्रनगर, सूरत, वडोदरा, छोटा उदेपुर, आनंद, मेहसाणा, कच्छ, भावनगर, जामनगर और नर्मदा जिले शामिल हैं। प्रमुख मार्गों में पाटन में लानवा-मनुंद-सांदर-बालिसाना और राधनपुर-मशाली-मधापुरा, गिर सोमनाथ में भिड़िया सोमनाथ रोड, महिसागर में संतरामपुर-जालोद रोड, और सूरत में डिंडोली-कराडवा-इकलेरा रोड शामिल हैं।

इसके अलावा वडोदरा में मंगलेज-नरेश्वर और कर्जन-आमोद रोड, आनंद में इसरवाडा-उंडेल और वडताल-जोल-बकरोल रोड, मेहसाणा में वालम-काडी और पेप्लू-कपरा रोड, कच्छ में लूनी-गुंडला-पत्री-टप्पर-बबिया रोड, भावनगर में तलाजा-गोपनाथ रोड, जामनगर में कलावड-जामवंतली-फला रोड, और नर्मदा जिले में कोठारा अप्रोच रोड भी इस योजना का हिस्सा हैं।

हरित निर्माण तकनीक: कैसे होगा काम

अधिकारियों के अनुसार, इस कार्यक्रम की सबसे खास विशेषता पुनर्चक्रित सड़क सामग्री का उपयोग है। मौजूदा सड़क परतों की खुदाई के बाद चूने और यांत्रिक चूर्णीकरण से स्थिरीकरण किया जाएगा। पुनः प्राप्त सामग्री को संघनन, सीमेंट उपचार और रासायनिक स्थिरीकरण के बाद साइट पर ही दोबारा उपयोग में लाया जाएगा।

आधुनिक मशीनों से समतलीकरण के बाद लगभग सात दिनों की उपचार अवधि का पालन किया जाएगा। इसके बाद तनाव अवशोषक झिल्ली अंतर्परत (SAMI) — एक फाइबर-आधारित सुरक्षात्मक परत — लगाई जाएगी, जो दरारों को कम करने और वाहनों के भार को अधिक प्रभावी ढंग से वितरित करने के लिए डिज़ाइन की गई है।

उन्नत इंजीनियरिंग उपाय

यातायात की तीव्रता और जमीनी परिस्थितियों के आधार पर व्हाइट टॉपिंग, ग्लास ग्रिड सुदृढ़ीकरण और अन्य स्थिरीकरण तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक खंड के लिए तकनीक का चयन साइट-विशिष्ट होगा, जो भार आवश्यकताओं और दीर्घकालिक रखरखाव की जरूरतों पर आधारित होगा।

कार्यों में सड़क चौड़ीकरण, पुनर्संदर्भन, चार लेन निर्माण, आरसीसी गटर लाइन, साइड शोल्डर, मिट्टी का काम, रंबल स्ट्रिप्स और सुरक्षात्मक संरचनाओं की स्थापना भी शामिल होगी।

राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जुड़ाव

यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप बताई जा रही है, जिसमें जलवायु-अनुकूल इंजीनियरिंग पद्धतियों और आधुनिक प्रौद्योगिकी के एकीकरण पर जोर दिया गया है। गौरतलब है कि गुजरात, देश में हरित बुनियादी ढाँचे को अपनाने वाले अग्रणी राज्यों में शुमार होता रहा है, और यह परियोजना उसी दिशा में एक और कदम है। इस कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन से राज्य के अन्य जिलों में भी इसी मॉडल को अपनाने की संभावना बनती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

147 करोड़ की यह परियोजना महत्वाकांक्षी है, लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की गुणवत्ता होगी — गुजरात में पहले भी बड़े सड़क निर्माण कार्यक्रमों में गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर सवाल उठते रहे हैं। हरित तकनीक और पुनर्चक्रित सामग्री का उपयोग पर्यावरणीय दृष्टि से सराहनीय है, किंतु SAMI परत और व्हाइट टॉपिंग जैसी तकनीकों की दीर्घकालिक सफलता साइट-स्तरीय निगरानी पर निर्भर करती है। यदि यह मॉडल 15 जिलों में सफल रहा, तो यह देश के अन्य राज्यों के लिए एक प्रतिलिपि योग्य टेम्पलेट बन सकता है — लेकिन इसके लिए पारदर्शी परिणाम-रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात की हरित सड़क निर्माण योजना क्या है?
यह ₹1,147 करोड़ की एक सरकारी परियोजना है, जिसके तहत गुजरात के 15 जिलों में 20 सड़कों को हरित निर्माण तकनीक से विकसित किया जाएगा। इसमें पुनर्चक्रित सड़क सामग्री, SAMI परत और व्हाइट टॉपिंग जैसी उन्नत विधियों का उपयोग होगा।
इस योजना में कौन-से जिले शामिल हैं?
पाटन, गिर सोमनाथ, महिसागर, भरूच, मोरबी, सुरेंद्रनगर, सूरत, वडोदरा, छोटा उदेपुर, आनंद, मेहसाणा, कच्छ, भावनगर, जामनगर और नर्मदा — कुल 15 जिले इस कार्यक्रम में शामिल हैं।
हरित निर्माण तकनीक में क्या होता है?
इस प्रक्रिया में मौजूदा सड़क परतों की खुदाई कर चूने और सीमेंट से स्थिरीकरण किया जाता है, और पुनः प्राप्त सामग्री को साइट पर ही दोबारा उपयोग में लाया जाता है। इसके बाद SAMI (तनाव अवशोषक झिल्ली अंतर्परत) लगाई जाती है, जो दरारों को कम करती है और वाहन भार को बेहतर ढंग से वितरित करती है।
SAMI परत क्या होती है और इसे क्यों लगाया जाता है?
SAMI यानी स्ट्रेस एब्सॉर्बिंग मेम्ब्रेन इंटरलेयर एक फाइबर-आधारित सुरक्षात्मक परत है। यह सड़क की सतह पर दरारें पड़ने से रोकती है और वाहनों के भार को अधिक प्रभावी ढंग से वितरित करती है, जिससे सड़क की उम्र बढ़ती है।
इस योजना से आम जनता को क्या फायदा होगा?
इस योजना से 15 जिलों की 20 प्रमुख सड़कें अधिक मजबूत और टिकाऊ बनेंगी, जिससे यातायात सुगम होगा और दुर्घटनाओं में कमी आने की संभावना है। पुनर्चक्रित सामग्री के उपयोग से निर्माण लागत कम होगी और पर्यावरणीय प्रभाव भी घटेगा।
राष्ट्र प्रेस
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