दक्षिण गुजरात में १,१८५ करोड़ रुपए की सड़क परियोजनाओं को मिली मंजूरी, ५ जिलों को होगा लाभ
सारांश
Key Takeaways
- दक्षिण गुजरात में १,१८५ करोड़ रुपए की सड़क परियोजनाएं मंजूर हुईं।
- मुख्य उद्देश्य लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है।
- सूरत को ६३१ करोड़ रुपए का आवंटन।
- परियोजनाएं २०४७ तक क्षेत्र को एक प्रमुख आर्थिक केंद्र बनाने का लक्ष्य रखती हैं।
- सरकार का ध्यान बुनियादी ढांचे के विकास पर है।
गांधीनगर, १३ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात सरकार ने लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने और सूरत आर्थिक क्षेत्र (एसईआर) के दीर्घकालिक विकास में मदद के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, दक्षिण गुजरात के पांच जिलों में १,१८५ करोड़ रुपए की सड़क निर्माण परियोजनाओं को हरी झंडी दी है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सूरत, तापी, वलसाड, नवसारी और डांग जिलों में लगभग ३८३ किलोमीटर सड़कों के विस्तार और सुधार के लिए २४ परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की।
अधिकारियों का कहना है कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य इस क्षेत्र के उद्योगों, बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स केंद्रों के बीच संबंध को मज़बूत करना और उन्हें वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ना है।
ये परियोजनाएं एसईआर के लिए एक बड़े विकास ढांचे का हिस्सा हैं। सरकार का इरादा इस क्षेत्र को दुबई और गुआंगजौ जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक केंद्रों के समकक्ष लाने का है।
इस योजना का उद्देश्य सूरत की अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भूमिका को सुदृढ़ करना और विनिर्माण केंद्रों व वैश्विक बाजारों के बीच की दूरी को कम करना है।
अधिकारियों के अनुसार, इन परियोजनाओं में ५ जिलों के कार्य शामिल हैं, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा सूरत को आवंटित किया गया है।
सूरत को ६३१ करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है, जो इस क्षेत्र की औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों में इसकी केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है।
वलसाड जिले के लिए २६४ करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं, जबकि शेष राशि का उपयोग नवसारी, तापी और डांग जिलों की परियोजनाओं के लिए किया जाएगा।
ये सड़क परियोजनाएं नीति आयोग द्वारा तैयार किए गए आर्थिक मास्टर प्लान से संबंधित हैं।
यह योजना लगभग १७ महीने पहले सूरत में शुरू की गई थी, जिसमें सूरत और आसपास के जिलों को २०४७ तक एक प्रमुख आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने की दीर्घकालिक रणनीति तैयार की गई है।
जब यह योजना २०२४ में प्रस्तुत की गई थी, तब मुख्यमंत्री पटेल ने कहा था, "यह आर्थिक मास्टर प्लान केवल एक खाका नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में एक भागीदार के रूप में हमारी दूरदर्शिता और विकास की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।"
अधिकारियों का कहना है कि दक्षिण गुजरात की औद्योगिक प्रोफाइल इस क्षेत्र के चयन का एक महत्वपूर्ण कारक थी। यह क्षेत्र देशभर में चुने गए चार पायलट शहरों में से एक है।
सूरत विश्व स्तर पर अपने कपड़ा विनिर्माण और हीरा तराशने के उद्योगों के लिए प्रसिद्ध है। इसके आस-पास के जिलों में रसायन, दवा, पेट्रोकेमिकल, कृषि-प्रसंस्करण और छोटे पैमाने के विनिर्माण के क्षेत्र हैं।
भरूच में रसायन, दवा और पेट्रोकेमिकल उद्योगों का एक मजबूत आधार है। नवसारी कृषि और खाद्य प्रसंस्करण के लिए जाना जाता है, जबकि तापी में कृषि-प्रसंस्करण और कागज निर्माण होता है। वलसाड में केमिकल इंडस्ट्रीज के साथ व्यापार और पर्यटन भी हैं, जबकि डांग जिला मुख्यतः खेती और जंगल से मिलने वाली चीजों पर निर्भर है।
अधिकारियों के अनुसार, सरकार का ध्यान बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर है, ताकि आर्थिक विविधता और संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिल सके।
तटीय और अंदरूनी हिस्से जो अच्छी तरह जुड़े हुए हैं, वे विश्व के बड़े व्यापारिक केंद्रों के रूप में उभर रहे हैं। इसलिए राज्य सरकार लॉजिस्टिक्स और परिवहन कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दे रही है।
इस क्षेत्र को पहले से ही कई परिवहन सुविधाएं मिल रही हैं, जिनमें एक्सप्रेसवे, रेलवे नेटवर्क, बंदरगाह, एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर शामिल हैं। ये सभी मिलकर एक व्यापक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का निर्माण करते हैं।
राज्य सरकार ने टिकाऊ खेती, रियल एस्टेट, पर्यटन, सूचना प्रौद्योगिकी और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों को भविष्य के विकास के संभावित क्षेत्र के रूप में पहचाना है।
अधिकारियों का अनुमान है कि दक्षिण गुजरात की मौजूदा प्रति व्यक्ति जीडीपी लगभग ४,६०० अमेरिकी डॉलर है।
दीर्घकालिक विकास की रणनीति के तहत, सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेश और औद्योगिक विस्तार के माध्यम से २०४७ तक इस आंकड़े को ४५,००० अमेरिकी डॉलर से अधिक करने का लक्ष्य रखा है।