ग्रीन गुजरात अभियान: नर्सरी विकास योजना पर ₹50 करोड़, 1 करोड़ पौधे रोपने का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने ग्रीन गुजरात अभियान को नई गति देते हुए नर्सरी विकास योजना के लिए ₹50 करोड़ का बजट आवंटित किया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार का लक्ष्य 423 सरकारी नर्सरियों के माध्यम से प्रतिवर्ष 1 करोड़ उच्च-गुणवत्ता पौधे तैयार कर राज्य का हरित आवरण बढ़ाना है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों और ग्रामीण समुदायों की आजीविका से भी सीधे जुड़ी है।
योजना की मुख्य विशेषताएँ
नर्सरी विकास कार्यक्रम के अंतर्गत सामाजिक वानिकी विभाग की पौधशालाओं में स्थानीय प्रजातियों के पौधे आधुनिक टाल सीडलिंग पद्धति से विकसित किए जा रहे हैं। इस तकनीक से तैयार पौधों की ऊँचाई 6 से 8 फीट तक होती है। वन मंत्री के अनुसार इस वर्ष रोपे जाने वाले पौधों की ऊँचाई 8 से 12 फीट तक है और उनका अनुमानित सर्वाइवल रेट 80 से 90 प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद है।
वन मंत्री की प्रतिक्रिया
गुजरात के वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने बताया कि वन विभाग इस वर्ष 'ग्रीन गुजरात' अभियान के तहत एक नई और व्यापक योजना लेकर आया है। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी इस प्रकार के प्रयोग किए गए थे, लेकिन इस बार इसे कहीं अधिक बड़े पैमाने पर लागू किया जा रहा है। मोढवाडिया के अनुसार इससे राज्य के ग्रीन कवर में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और पर्यावरणीय संतुलन मजबूत होगा।
किसानों को मिल रहा लाभ
कृषि और बागवानी क्षेत्र से जुड़े किसानों का कहना है कि सरकारी नर्सरियों से मिलने वाले पौधे निजी नर्सरियों की तुलना में किफायती और बेहतर गुणवत्ता के होते हैं। किसान राजूभाई पटेल ने बताया कि सरकारी नर्सरी में पौधे कम लागत पर उपलब्ध होते हैं और साथ में तकनीकी मार्गदर्शन भी मिलता है। किसान तुलसीदास पटेल ने बताया कि उन्होंने चार वर्ष पहले राजभवन नर्सरी से फालसा के पौधे खरीदे थे, जो अब फल दे रहे हैं और अच्छी आय का स्रोत बन चुके हैं।
समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी
इस योजना का प्रभाव केवल पौध उत्पादन तक सीमित नहीं है। तैयार किए गए पौधों को सामान्य नागरिकों, किसानों, ग्रामीण महिलाओं, आदिवासी समुदायों और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से बड़े पैमाने पर रोपा जा रहा है। गौरतलब है कि यह अभियान ऐसे समय में आया है जब देशभर में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वृक्षारोपण को नीतिगत प्राथमिकता दी जा रही है।
आगे की राह
वन विभाग का लक्ष्य प्रतिवर्ष 1 करोड़ पौधे तैयार करना है ताकि वृक्षारोपण अभियान को निरंतर गति मिलती रहे। सरकार पारंपरिक जंगलों के संरक्षण के साथ-साथ वन क्षेत्र के विस्तार को भी बढ़ावा देना चाहती है। यदि सर्वाइवल रेट अनुमान के अनुरूप रहा, तो यह अभियान गुजरात के हरित आवरण को नई ऊँचाई दे सकता है।