10 अगस्त 2026
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ग्रीन गुजरात अभियान: नर्सरी विकास योजना पर ₹50 करोड़, 1 करोड़ पौधे रोपने का लक्ष्य

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ग्रीन गुजरात अभियान: नर्सरी विकास योजना पर ₹50 करोड़, 1 करोड़ पौधे रोपने का लक्ष्य

सारांश

गुजरात सरकार ने 'ग्रीन गुजरात' अभियान को ठोस रूप देते हुए नर्सरी विकास योजना पर ₹50 करोड़ का आवंटन किया है। 423 नर्सरियों से प्रतिवर्ष 1 करोड़ पौधे तैयार करने और 80-90% सर्वाइवल रेट का लक्ष्य इसे राज्य के अब तक के सबसे बड़े वृक्षारोपण प्रयासों में से एक बनाता है।

मुख्य बातें

गुजरात सरकार ने नर्सरी विकास योजना के लिए ₹50 करोड़ का बजट आवंटित किया है।
राज्य की 423 सरकारी नर्सरियों में प्रतिवर्ष 1 करोड़ पौधे तैयार करने का लक्ष्य।
पौधों की ऊँचाई 8 से 12 फीट ; अनुमानित सर्वाइवल रेट 80 से 90 प्रतिशत ।
टाल सीडलिंग पद्धति से स्थानीय प्रजातियों के पौधे विकसित किए जा रहे हैं।
किसान, ग्रामीण महिलाएँ, आदिवासी समुदाय और स्वयं सहायता समूह अभियान में भागीदार।
वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया के अनुसार यह पिछले प्रयोगों से कहीं बड़े पैमाने पर लागू किया जा रहा है।

गुजरात सरकार ने ग्रीन गुजरात अभियान को नई गति देते हुए नर्सरी विकास योजना के लिए ₹50 करोड़ का बजट आवंटित किया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार का लक्ष्य 423 सरकारी नर्सरियों के माध्यम से प्रतिवर्ष 1 करोड़ उच्च-गुणवत्ता पौधे तैयार कर राज्य का हरित आवरण बढ़ाना है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों और ग्रामीण समुदायों की आजीविका से भी सीधे जुड़ी है।

योजना की मुख्य विशेषताएँ

नर्सरी विकास कार्यक्रम के अंतर्गत सामाजिक वानिकी विभाग की पौधशालाओं में स्थानीय प्रजातियों के पौधे आधुनिक टाल सीडलिंग पद्धति से विकसित किए जा रहे हैं। इस तकनीक से तैयार पौधों की ऊँचाई 6 से 8 फीट तक होती है। वन मंत्री के अनुसार इस वर्ष रोपे जाने वाले पौधों की ऊँचाई 8 से 12 फीट तक है और उनका अनुमानित सर्वाइवल रेट 80 से 90 प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद है।

वन मंत्री की प्रतिक्रिया

गुजरात के वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने बताया कि वन विभाग इस वर्ष 'ग्रीन गुजरात' अभियान के तहत एक नई और व्यापक योजना लेकर आया है। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी इस प्रकार के प्रयोग किए गए थे, लेकिन इस बार इसे कहीं अधिक बड़े पैमाने पर लागू किया जा रहा है। मोढवाडिया के अनुसार इससे राज्य के ग्रीन कवर में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और पर्यावरणीय संतुलन मजबूत होगा।

किसानों को मिल रहा लाभ

कृषि और बागवानी क्षेत्र से जुड़े किसानों का कहना है कि सरकारी नर्सरियों से मिलने वाले पौधे निजी नर्सरियों की तुलना में किफायती और बेहतर गुणवत्ता के होते हैं। किसान राजूभाई पटेल ने बताया कि सरकारी नर्सरी में पौधे कम लागत पर उपलब्ध होते हैं और साथ में तकनीकी मार्गदर्शन भी मिलता है। किसान तुलसीदास पटेल ने बताया कि उन्होंने चार वर्ष पहले राजभवन नर्सरी से फालसा के पौधे खरीदे थे, जो अब फल दे रहे हैं और अच्छी आय का स्रोत बन चुके हैं।

समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी

इस योजना का प्रभाव केवल पौध उत्पादन तक सीमित नहीं है। तैयार किए गए पौधों को सामान्य नागरिकों, किसानों, ग्रामीण महिलाओं, आदिवासी समुदायों और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से बड़े पैमाने पर रोपा जा रहा है। गौरतलब है कि यह अभियान ऐसे समय में आया है जब देशभर में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वृक्षारोपण को नीतिगत प्राथमिकता दी जा रही है।

आगे की राह

वन विभाग का लक्ष्य प्रतिवर्ष 1 करोड़ पौधे तैयार करना है ताकि वृक्षारोपण अभियान को निरंतर गति मिलती रहे। सरकार पारंपरिक जंगलों के संरक्षण के साथ-साथ वन क्षेत्र के विस्तार को भी बढ़ावा देना चाहती है। यदि सर्वाइवल रेट अनुमान के अनुरूप रहा, तो यह अभियान गुजरात के हरित आवरण को नई ऊँचाई दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी सर्वाइवल रेट की निगरानी और पारदर्शी रिपोर्टिंग होगी — जो अक्सर वृक्षारोपण अभियानों की कमज़ोर कड़ी साबित होती है। टाल सीडलिंग पद्धति और 80-90% सर्वाइवल रेट का दावा उत्साहजनक है, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि ज़रूरी है। यह अभियान ऐसे समय में आया है जब गुजरात का वन आवरण राष्ट्रीय औसत से पीछे है, इसलिए सामुदायिक भागीदारी की यह रणनीति सही दिशा में एक कदम है — बशर्ते क्रियान्वयन ज़मीन पर दिखे।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रीन गुजरात नर्सरी विकास योजना क्या है?
यह गुजरात सरकार की एक पर्यावरण पहल है जिसके तहत राज्य की 423 सामाजिक वानिकी विभाग की नर्सरियों में प्रतिवर्ष 1 करोड़ उच्च-गुणवत्ता पौधे तैयार किए जाएँगे। इस कार्यक्रम के लिए ₹50 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है।
नर्सरी विकास योजना में कितना बजट रखा गया है?
गुजरात सरकार ने इस योजना के लिए ₹50 करोड़ का प्रावधान किया है। इस राशि का उपयोग राज्यभर की नर्सरियों में बेहतर गुणवत्ता के पौधे तैयार करने और आधुनिक टाल सीडलिंग पद्धति अपनाने में किया जाएगा।
टाल सीडलिंग पद्धति क्या है और इसके क्या फायदे हैं?
टाल सीडलिंग पद्धति में पौधों को नर्सरी में ही 6 से 12 फीट की ऊँचाई तक विकसित किया जाता है। इससे रोपण के बाद पौधों के जीवित रहने की दर (सर्वाइवल रेट) 80 से 90 प्रतिशत तक रहने का अनुमान है, जो सामान्य पौधों की तुलना में अधिक है।
इस योजना से किसानों को क्या फायदा होगा?
सरकारी नर्सरियों से किसानों को निजी नर्सरियों की तुलना में कम लागत पर पौधे मिलते हैं और साथ में तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध होता है। किसान तुलसीदास पटेल के अनुभव के अनुसार, चार वर्ष पहले खरीदे गए फालसा के पौधे अब फल दे रहे हैं और अच्छी आय का स्रोत बन चुके हैं।
इस अभियान में समाज के किन वर्गों को शामिल किया गया है?
नर्सरियों में तैयार पौधों को सामान्य नागरिकों, किसानों, ग्रामीण महिलाओं, आदिवासी समुदायों और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से रोपा जा रहा है। इस व्यापक सामुदायिक भागीदारी का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन का रूप देना है।
राष्ट्र प्रेस
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