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गुजरात वन महोत्सव 2025: 423 नर्सरियों से 11.80 करोड़ पौधे वितरित करने का लक्ष्य, 74,453 हेक्टेयर में होगा रोपण

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गुजरात वन महोत्सव 2025: 423 नर्सरियों से 11.80 करोड़ पौधे वितरित करने का लक्ष्य, 74,453 हेक्टेयर में होगा रोपण

सारांश

गुजरात में इस वर्ष वन महोत्सव सिर्फ परंपरा नहीं — यह राज्य का अब तक का सबसे बड़ा हरित अभियान है। 423 नर्सरियों से 11.80 करोड़ पौधे, 74,453 हेक्टेयर में रोपण और 'ग्रीन वॉल ऑफ अरावली' जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाएँ — भूपेंद्र पटेल सरकार जलवायु परिवर्तन से मुकाबले की दिशा में बड़ा दांव खेल रही है।

मुख्य बातें

गुजरात सरकार वन महोत्सव के तहत 74,453 हेक्टेयर में 5 करोड़ 51 लाख से अधिक पौधे लगाएगी।
423 सरकारी नर्सरियों के ज़रिए 11 करोड़ 80 लाख पौधे वितरित किए जाएंगे।
'वन कवच' पहल के तहत 440 हेक्टेयर में 300 स्थानों पर माइक्रो फॉरेस्ट विकसित होंगे।
'ग्रीन वॉल ऑफ अरावली' परियोजना में 6,652 हेक्टेयर में वृक्षारोपण और 20,100 हेक्टेयर में मैंग्रोव रोपण का लक्ष्य।
अभियान 'एक पेड़ मां के नाम 3.0' के साथ संयुक्त रूप से चलाया जा रहा है।

गुजरात सरकार इस वर्ष वन महोत्सव के तहत राज्यभर में 74,453 हेक्टेयर क्षेत्र में 5 करोड़ 51 लाख से अधिक पौधे लगाने और 423 सरकारी नर्सरियों के माध्यम से 11 करोड़ 80 लाख पौधे वितरित करने की व्यापक तैयारी में जुटी है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में वन विभाग ने यह लक्ष्य 'एक पेड़ मां के नाम 3.0' और वन महोत्सव अभियान के अंतर्गत निर्धारित किया है।

मुख्य घटनाक्रम

राज्य के सभी जिलों में सरकारी नर्सरियों में उच्च गुणवत्ता के पौधे तैयार किए जा रहे हैं। वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने बताया कि ये पौधे सड़क किनारे रोपण, राजस्व क्षेत्र, फॉरेस्ट कवर मॉडल, नगर पालिकाओं, नगर निगमों और स्वयंसेवी संस्थाओं — सभी की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त संख्या में तैयार हैं। बादाम, नीम और नींबू जैसी उपयोगी प्रजातियों के पौधे किफायती दामों पर आम नागरिकों को उपलब्ध कराए जाएंगे।

विशेष पर्यावरण पहलें

वन विभाग ने इस वर्ष 'वन कवच' पहल के तहत माइक्रो फॉरेस्ट विकास का लक्ष्य भी बढ़ाया है। चालू वर्ष में 440 हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग 300 स्थानों पर वन कवच विकसित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, 'ग्रीन वॉल ऑफ अरावली' परियोजना के अंतर्गत 6,652 हेक्टेयर में वृक्षारोपण और 20,100 हेक्टेयर में मैंग्रोव रोपण का भी लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

जनभागीदारी और जागरूकता

बनासकांठा के निवासी नितिनभाई पटेल ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग की बढ़ती चुनौती के बीच गुजरात सरकार का वन महोत्सव आयोजन सराहनीय है और धीरे-धीरे लोग पर्यावरण संरक्षण के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं। डीसा के युवा किसान मयूर ने बताया कि सरकारी नर्सरियों में पौधे सही दाम पर मिलते हैं और उन्होंने सभी नागरिकों से इस अवसर का लाभ उठाने की अपील की।

सरकार की प्रतिक्रिया

मंत्री अर्जुन मोढवाडिया के अनुसार, इन दूरगामी पहलों का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करना, कार्बन अवशोषण क्षमता को बढ़ाना और प्राकृतिक इकोसिस्टम को सुदृढ़ करना है। यह अभियान ऐसे समय में आया है जब देशभर में हरित आवरण बढ़ाने की माँग तेज़ हो रही है।

आम जनता पर असर

गौरतलब है कि इस अभियान से न केवल राज्य का हरित आवरण बढ़ेगा, बल्कि किसानों और आम नागरिकों को सस्ती दर पर फलदार और छायादार पौधे मिलने से दीर्घकालिक आर्थिक लाभ भी होगा। 423 नर्सरियों का विशाल नेटवर्क यह सुनिश्चित करेगा कि राज्य के दूरदराज़ के क्षेत्रों तक भी पौधे पहुँचें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी रोपण के बाद की जीवित रहने की दर है — जो राष्ट्रीय स्तर पर अक्सर 30-40% तक सिमट जाती है। करोड़ों पौधे वितरित करना और उनका वास्तव में पेड़ बनना दो अलग बातें हैं। 'वन कवच' और 'ग्रीन वॉल ऑफ अरावली' जैसी परियोजनाएँ सोच में परिपक्वता दिखाती हैं, पर इनकी सफलता स्वतंत्र निगरानी और दीर्घकालिक रखरखाव बजट पर निर्भर करेगी — जिसका विवरण अभी सार्वजनिक नहीं है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात वन महोत्सव 2025 में कितने पौधे वितरित किए जाएंगे?
राज्य की 423 सरकारी नर्सरियों के माध्यम से इस वर्ष 11 करोड़ 80 लाख पौधे वितरित करने का लक्ष्य है। बादाम, नीम और नींबू जैसी विभिन्न प्रजातियों के पौधे किफायती दामों पर आम नागरिकों, किसानों, नगर पालिकाओं और स्वयंसेवी संस्थाओं को उपलब्ध कराए जाएंगे।
'एक पेड़ मां के नाम 3.0' अभियान क्या है?
यह केंद्र सरकार की 'एक पेड़ मां के नाम' पहल का तीसरा संस्करण है, जिसे गुजरात में वन महोत्सव के साथ जोड़कर चलाया जा रहा है। इसके तहत नागरिकों को अपनी माँ के नाम पर पेड़ लगाने के लिए प्रेरित किया जाता है।
'ग्रीन वॉल ऑफ अरावली' परियोजना का लक्ष्य क्या है?
इस परियोजना के तहत 6,652 हेक्टेयर क्षेत्र में वृक्षारोपण और 20,100 हेक्टेयर में मैंग्रोव रोपण का लक्ष्य है। इसका उद्देश्य अरावली क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ाकर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करना है।
'वन कवच' पहल क्या है और इसका लक्ष्य क्या है?
'वन कवच' गुजरात वन विभाग की माइक्रो फॉरेस्ट विकास पहल है। इस वर्ष 440 हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग 300 स्थानों पर वन कवच विकसित किए जाएंगे, जिससे शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्थानीय जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा।
वन महोत्सव के पौधे कहाँ से और कैसे प्राप्त किए जा सकते हैं?
राज्य की 423 सरकारी नर्सरियों से पौधे किफायती दामों पर उपलब्ध हैं। आम नागरिक, किसान, नगर पालिकाएँ और स्वयंसेवी संगठन — सभी इन नर्सरियों से अपनी ज़रूरत के अनुसार पौधे प्राप्त कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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