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मोरबी में 'नमो वन': 37 दिनों में 10 लाख पौधे, मच्छू डैम के पास बंजर जमीन बनी हरित वन

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मोरबी में 'नमो वन': 37 दिनों में 10 लाख पौधे, मच्छू डैम के पास बंजर जमीन बनी हरित वन

सारांश

मोरबी की बंजर जमीन अब हरे-भरे जंगल में बदल चुकी है — सिर्फ 37 दिनों में। 'नमो वन' परियोजना के तहत 500 मजदूरों ने मच्छू डैम के किनारे 1,200 बीघा जमीन पर 10 लाख पौधे लगाए। कैंसर से जूझ रहे मंत्री कांतिलाल अमृतिया की यह पहल गुजरात में सामुदायिक पर्यावरण संरक्षण की नई मिसाल बन रही है।

मुख्य बातें

मोरबी जिले में 'नमो वन' परियोजना के तहत 37 दिनों में 10 लाख पौधे लगाए गए।
यह वन मच्छू बांध (2) के पास 1,200 बीघा ट्रस्ट भूमि पर विकसित किया गया; ट्रस्ट के पास कुल 4,500 बीघा जमीन है।
प्रतिदिन 25,000–30,000 पौधे लगाए गए; अभियान में लगभग 500 मजदूर शामिल रहे।
उद्घाटन 17 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने किया था।
मुख्यमंत्री पटेल ने दूसरी यात्रा के दौरान वन तक सड़क निर्माण के लिए ₹3 करोड़ मंजूर किए।
नेतृत्वकर्ता मंत्री कांतिलाल अमृतिया कैंसर उपचार के बाद पर्यावरण संरक्षण को जीवन का लक्ष्य बना चुके हैं।

गुजरात के मोरबी जिले में 'नमो वन' परियोजना ने 37 दिनों के भीतर 10 लाख पौधे लगाकर मच्छू बांध (2) के किनारे पड़ी बंजर जमीन को घने हरित वन में तब्दील कर दिया है। यह पौधरोपण अभियान 1,200 बीघा ट्रस्ट भूमि पर 2025 में चलाया गया, और इसका उद्घाटन 17 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर किया था।

मुख्य घटनाक्रम

इस पहल का नेतृत्व श्रम, कौशल विकास और रोजगार राज्य मंत्री कांतिलाल अमृतिया ने किया, जो मोरबी से छह बार विधायक रह चुके हैं और संबंधित ट्रस्ट के ट्रस्टी भी हैं। अभियान के दौरान प्रतिदिन 25,000 से 30,000 पौधे लगाए गए, जिसमें लगभग 500 मजदूरों ने भाग लिया। ट्रस्ट के पास कुल लगभग 4,500 बीघा जमीन है।

अमृतिया ने बताया कि जमीन पूरी तरह बंजर थी, इसलिए पहले उसे समतल किया गया, बाहर से हजारों टन उपजाऊ मिट्टी लाई गई, बड़ी मात्रा में जैविक खाद मिलाई गई और पूरे क्षेत्र के चारों ओर बाड़ लगाई गई।

सद्भावना वृद्धाश्रम की भूमिका

इस पौधरोपण अभियान की विस्तृत योजना सद्भावना वृद्धाश्रम की सहायता से बनाई गई, जो शुरुआती चरणों से ही इस परियोजना से जुड़ा हुआ था। वर्तमान में सिंचाई, खाद की आपूर्ति और लगाए गए पौधों के रखरखाव का प्रबंधन भी सद्भावना वृद्धाश्रम द्वारा किया जा रहा है।

सरकार की प्रतिक्रिया

हाल ही में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने दूसरी बार इस वन क्षेत्र का दौरा किया और आगंतुकों की सुविधा के लिए वन तक जाने वाली सड़क के निर्माण हेतु ₹3 करोड़ की स्वीकृति दी। यह कदम परियोजना को सार्वजनिक पर्यटन और जागरूकता के लिए खोलने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इसके अलावा, अमृतिया ने सरकार से अनुरोध किया है कि मच्छू डैम के पास की सरकारी जमीन उन्हें आवंटित की जाए, ताकि भविष्य में इसी तरह के पौधरोपण अभियान जारी रखे जा सकें।

मंत्री की व्यक्तिगत प्रेरणा

64 वर्षीय अमृतिया ने बताया कि कैंसर के विरुद्ध उनकी हालिया लड़ाई ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनके संकल्प को और दृढ़ किया है। उन्होंने कीमोथेरेपी के पाँच राउंड पूरे किए हैं और अभी इम्यूनोथेरेपी करवा रहे हैं। उन्होंने कहा, 'अपनी कैंसर सर्जरी के बाद मुझे लगता है कि प्रकृति ने मुझे दूसरी जिंदगी दी है। अब मैं अपनी जिंदगी प्राकृतिक खेती और पेड़ लगाने के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए समर्पित करना चाहता हूं।'

यह ऐसे समय में आया है जब गुजरात सहित पूरे देश में हरित आवरण बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में सामुदायिक प्रयासों को बल मिल रहा है। आगे इस परियोजना का विस्तार शेष 3,300 बीघा भूमि पर भी किए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन दीर्घकालिक सफलता के लिए पौधों की जीवित रहने की दर और नियमित रखरखाव की निगरानी ज़रूरी होगी — जो अक्सर बड़े पौधरोपण अभियानों की असली कसौटी बनती है। यह भी गौरतलब है कि 4,500 बीघा में से केवल 1,200 बीघा पर अब तक काम हुआ है, यानी शेष भूमि के लिए संसाधनों और सरकारी भूमि आवंटन की माँग अभी लंबित है। सरकार द्वारा ₹3 करोड़ की सड़क स्वीकृति राजनीतिक समर्थन का संकेत है, पर स्वतंत्र पर्यावरणीय मूल्यांकन के बिना इस मॉडल को व्यापक स्तर पर दोहराना जोखिम भरा हो सकता है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'नमो वन' परियोजना क्या है और यह कहाँ स्थित है?
'नमो वन' गुजरात के मोरबी जिले में मच्छू बांध (2) के पास एक ट्रस्ट की 1,200 बीघा भूमि पर विकसित वन क्षेत्र है, जहाँ 37 दिनों में 10 लाख पौधे लगाए गए। इसका उद्घाटन 17 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने किया था।
37 दिनों में 10 लाख पौधे कैसे लगाए गए?
अभियान में लगभग 500 मजदूरों ने प्रतिदिन 25,000 से 30,000 पौधे लगाए। इससे पहले बंजर जमीन को समतल किया गया, बाहर से हजारों टन उपजाऊ मिट्टी लाई गई, जैविक खाद मिलाई गई और पूरे क्षेत्र में बाड़ लगाई गई।
इस परियोजना का प्रबंधन कौन करता है?
परियोजना की योजना और क्रियान्वयन में सद्भावना वृद्धाश्रम की प्रमुख भूमिका रही है, जो अभी भी सिंचाई, खाद आपूर्ति और पौधों के रखरखाव का प्रबंधन कर रहा है। नेतृत्व राज्य मंत्री कांतिलाल अमृतिया कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस परियोजना के लिए क्या घोषणा की?
मुख्यमंत्री पटेल ने दूसरी बार इस स्थल का दौरा करते हुए वन क्षेत्र तक जाने वाली सड़क के निर्माण के लिए ₹3 करोड़ की स्वीकृति दी, ताकि आगंतुक आसानी से इस जगह तक पहुँच सकें।
इस परियोजना का भविष्य में क्या विस्तार होगा?
मंत्री अमृतिया ने सरकार से मच्छू डैम के पास की सरकारी जमीन आवंटित करने का अनुरोध किया है, ताकि भविष्य में भी पौधरोपण अभियान जारी रखे जा सकें। ट्रस्ट के पास कुल 4,500 बीघा जमीन है, जिसमें से अभी 1,200 बीघा पर काम पूरा हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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