गुजरात में हाई-टेक नर्सरी और मैंग्रोव विस्तार का ऐतिहासिक निर्णय: सीएम भूपेंद्र पटेल का संबोधन
सारांश
Key Takeaways
- हाई-टेक नर्सरियों का विकास
- पर्यावरण-केंद्रित जीवनशैली का महत्व
- ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ उपाय
- वन विभाग की 10 सिफारिशें
- इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की योजना
गांधीनगर, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात में हरित क्षेत्र (ग्रीन कवर) को बढ़ाने के लिए एक विस्तृत योजना के तहत विभिन्न जिलों में 8-10 हाई-टेक नर्सरियों की स्थापना और मैंग्रोव एवं घासभूमि (ग्रासलैंड) क्षेत्र का विकास किया जाएगा। यह जानकारी गांधीनगर में आयोजित दो दिवसीय वन विभाग की ‘चिंतन शिविर’ बैठक के समापन पर अधिकारियों द्वारा साझा की गई।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि प्रभावी शासन के लिए निरंतर आत्म-मंथन बेहद आवश्यक है और उन्होंने सार्वजनिक सेवाओं में सुधार के लिए तकनीक की अहमियत पर बल दिया।
उन्होंने कहा, "अच्छे शासन के लिए निरंतर आत्म-मंथन अत्यंत आवश्यक है।" उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “तकनीक के माध्यम से सुशासन को एक नई दिशा दी है।
पर्यावरण से संबंधित प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए पटेल ने प्रधानमंत्री के ‘बैक टू बेसिक्स, बैक टू नेचर’ और ‘मिशन लाइफ’ के आह्वान का हवाला दिया और कहा कि पर्यावरण-केंद्रित जीवनशैली अपनाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि बढ़ता हुआ हरित क्षेत्र ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों को कम करने और भविष्य की पीढ़ियों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी पहल के तहत राज्य में पिछले 12 वर्षों में वन क्षेत्र के बाहर पेड़ों की संख्या में 47 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बंजर भूमि पर पौधारोपण में तकनीक का उपयोग करें और बताया कि निरंतर प्रयासों के कारण लोगों में जागरूकता बढ़ी है, जिससे वृक्षारोपण, जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण में अधिक भागीदारी हो रही है।
राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि राज्य पौधारोपण की सफलता दर बढ़ाने के लिए नर्सरी संस्कृति को प्राथमिकता देगा और विभिन्न जिलों में 8 से 10 हाई-टेक नर्सरियां स्थापित करने की योजना है।
उन्होंने कहा कि इनमें कृषि, बागवानी और वानिकी के पौधे शामिल होंगे।
उन्होंने जानकारी दी कि वन विभाग का पहला ‘चिंतन शिविर’ 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित किया गया था और वर्तमान बैठक को दूसरा बताया।
मोढवाडिया ने कहा कि इस दो दिवसीय विचार-विमर्श में वन अधिकारियों की क्षमता और प्रतिभा सामने आई है और इसके सुझावों को मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में आगे बढ़ाया जाएगा।
मोढवाडिया ने कहा कि वन अधिकारियों ने वन भूमि को जिम्मेदारी से संरक्षित किया है और औद्योगिक विकास एवं लंबी समुद्री तटरेखा के बावजूद गुजरात में मैंग्रोव वन क्षेत्र में वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने इको-टूरिज्म की संभावनाओं पर भी ध्यान दिया और कहा कि इसे मजबूत करने के प्रयास किए जाएंगे, ताकि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप हरित क्षेत्र बढ़ाया जा सके।
मुख्य सचिव मनोज कुमार दास ने विकास और पर्यावरण संरक्षण के संतुलन पर जोर देते हुए कहा कि दोनों एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि पूरक हैं और तकनीक के जरिए इस संतुलन को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है।
उन्होंने कहा कि गुजरात का वन क्षेत्र वर्तमान में 11 प्रतिशत है और इसे आधुनिक प्रबंधन के जरिए 13 प्रतिशत तक बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विनोद राव ने बताया कि 10 सिफारिशें अंतिम रूप दी गई हैं, जिनमें एक लाख हेक्टेयर अतिरिक्त मैंग्रोव और एक लाख हेक्टेयर घासभूमि विकसित करने की योजना शामिल है। इसके अलावा अगले दो वर्षों में अन्य जिलों में सांस्कृतिक वन विकसित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि ‘वन कवच’ मॉडल को 2035 तक 10,000 से 15,000 ग्राम पंचायतों तक बढ़ाया जाएगा और रोजगार को बढ़ाने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत इको-टूरिज्म नीति लागू की जाएगी।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में वन विभाग इन सिफारिशों को लागू करेगा और आगामी वर्षों में परिणाम-आधारित कार्य करेगा।