महिला आरक्षण विधेयक पर प्रतिक्रिया: क्यों कुछ लोग अधिक प्रतिनिधित्व से दूर भाग रहे हैं? के. लक्ष्मण

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महिला आरक्षण विधेयक पर प्रतिक्रिया: क्यों कुछ लोग अधिक प्रतिनिधित्व से दूर भाग रहे हैं? के. लक्ष्मण

सारांश

महिला आरक्षण विधेयक पर उठते सवालों का जवाब देते हुए भाजपा सांसद के. लक्ष्मण ने बताया कि क्यों कुछ लोग अधिक प्रतिनिधित्व को लेकर चिंतित हैं। जानें इस राजनीतिक विमर्श की बारीकियाँ।

Key Takeaways

  • महिला आरक्षण विधेयक पर चल रही बहस महत्वपूर्ण है।
  • के. लक्ष्मण ने परिसीमन प्रक्रिया पर चिंता जताई।
  • कुछ दलों का महिलाओं के प्रतिनिधित्व को लेकर तर्क कमजोर है।
  • प्रधानमंत्री मोदी ने इस विधेयक को 2023 में पारित करवाया।
  • आगामी विशेष सत्र ऐतिहासिक होने की संभावना है।

नई दिल्ली, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल और के. लक्ष्मण ने महिला आरक्षण विधेयक पर हो रहे विरोध और विशेष सत्र बुलाए जाने पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी द्वारा प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को लेकर चिंता जताते हुए के. लक्ष्मण ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "संसद और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटों की संख्या भी बढ़ेगी। मुझे समझ नहीं आता कि कुछ लोग संसद और विधानसभाओं में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व मिलने के पक्ष में क्यों नहीं हैं। उनके पास कोई ठोस तर्क नहीं है। हमारे तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का तर्क है कि यह प्रक्रिया जीएसडीपी (जनसंख्या विकास नीति) पर आधारित होनी चाहिए, जो संविधान विरोधी है। दुनिया में कहीं भी परिसीमन जीएसडीपी या जीएसटी के आधार पर नहीं किया जाता है। यह पूरी तरह से जनसंख्या पर आधारित होता है।"

के. लक्ष्मण ने आगे कहा, "यह कुछ ऐसी पार्टियों द्वारा गढ़ी गई मनगढ़ंत कहानी है, जिनका दक्षिण में कोई आधार नहीं है। यह स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री मोदी ने लगभग 30 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद लंबित महिला आरक्षण विधेयक को 2023 में पारित करवाया। उन्होंने 2029 के चुनावों में आरक्षण लागू करने का इरादा भी जताया। हालांकि, मुझे यह समझ नहीं आता कि 50 वर्षों से अधिक समय तक सत्ता में रही तथाकथित कांग्रेस पार्टी विधानसभा में महिला आरक्षण के पक्ष में विधेयक क्यों नहीं ला सकी।"

महिला आरक्षण विधेयक पर आगामी विशेष सत्र के संदर्भ में भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे पर प्रतिबद्ध हैं और उनका लक्ष्य राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है। इसी के अनुरूप, महिला आरक्षण पर अंततः चर्चा होगी और इसी संदर्भ में परिसीमन पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। इसलिए, यह संसदीय सत्र निश्चित रूप से ऐतिहासिक होगा और ये तीन दिन महिला सशक्तीकरण के संदर्भ में इतिहास में दर्ज होंगे।"

प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, "सम्राट चौधरी के बिहार के मुख्यमंत्री चुने जाने पर मैं अपनी ओर से और कारोबारी समुदाय की ओर से उन्हें बधाई देता हूं। निःसंदेह, भारतीय जनता पार्टी की राजनीति ईमानदारी पर आधारित है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्र 'सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास' से प्रेरित है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सरकार अच्छा प्रदर्शन करेगी और विकास की दिशा में काम करेगी।"

Point of View

क्योंकि यह न केवल महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने का प्रयास है, बल्कि विभिन्न राजनीतिक दलों के दृष्टिकोण को भी उजागर करता है।
NationPress
15/04/2026

Frequently Asked Questions

महिला आरक्षण विधेयक क्या है?
महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों की संख्या को बढ़ाना है।
के. लक्ष्मण ने किस चीज पर चिंता जताई?
के. लक्ष्मण ने परिसीमन प्रक्रिया पर चिंता जताई है, जो अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के लिए अधिक प्रतिनिधित्व से जुड़ी है।
कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में क्यों नहीं है?
के. लक्ष्मण के अनुसार, कांग्रेस पार्टी ने 50 वर्षों से अधिक समय में महिला आरक्षण विधेयक को विधानसभा में नहीं ला सकी।
महिला आरक्षण विधेयक की चर्चा कब होगी?
महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा आगामी विशेष सत्र में होगी।
प्रधानमंत्री मोदी का इस मुद्दे पर क्या कहना है?
प्रधानमंत्री मोदी महिला आरक्षण विधेयक के पक्ष में हैं और राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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