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क्या वडनगर में हरियाली की नई कहानी बन रही है? हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट की बड़ी पहल

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क्या वडनगर में हरियाली की नई कहानी बन रही है? हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट की बड़ी पहल

सारांश

गुजरात सरकार ने वडनगर में हरित विकास की दिशा में एक अद्वितीय पहल की है। हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट के सहयोग से हजारों दुर्लभ पौधे लगाए जा रहे हैं। जानें इस पहल का महत्व और इसके पीछे की सोच।

मुख्य बातें

गुजरात सरकार का हरित विकास के लिए प्रयास हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट द्वारा पौधरोपण की पहल लगभग 50 हजार पौधे लगाए जा चुके हैं पर्यावरण संरक्षण का एक महत्वपूर्ण कदम ‘ एक पेड़ मां के नाम ’ अभियान का हिस्सा

वडनगर, १३ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक इकोसिस्टम के पुनर्जीवन के लिए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने बड़े पैमाने पर कार्य शुरू किया है। इसी दिशा में मेहसाणा जिले के वडनगर शहर को हरित बनाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास किया जा रहा है।

तेलंगाना स्थित हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट के सहयोग से वडनगर के आठ ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जा रहा है। इन स्थलों में तोरण होटल, लटेरी वाव, अंबाजी कोठा झील और विष्णुपुरी झील शामिल हैं, जहां रुद्राक्ष, महोगनी, गोल्डन बैम्बू जैसी दुर्लभ प्रजातियों के हजारों पौधे लगाए गए हैं।

हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट के अहमदाबाद जोनल कॉर्डिनेटर केजल कंसारा ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान एक प्रेरणादायक पहल है। जैसे हमारी जननी मां हमें जीवन देती है, वैसे ही धरती मां भी हमें पोषित करती है। पेड़ इस सृष्टि का अभिन्न हिस्सा हैं, जो न केवल पृथ्वी को जीवनदायिनी ऑक्सीजन देते हैं बल्कि पर्यावरण के संतुलन को भी बनाए रखते हैं। पेड़ सूर्य की रोशनी, पानी और पोषण लेकर हमें फल, छाया और स्वच्छ हवा प्रदान करते हैं, साथ ही वे कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर वातावरण को साफ करते हैं। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के माध्यम से हम प्रकृति को कुछ लौटाने का भाव विकसित कर सकते हैं, और हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट इसी सोच के साथ आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने बताया कि वडनगर में अभियान की शुरुआत विष्णुपुरी तालाब से हुई थी और इसके लिए कुल आठ स्थलों का चयन किया गया है। ये सभी स्थान ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। वडनगर, जो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन्मस्थली है, यहां के पर्यावरणीय प्रयासों का महत्व बढ़ाता है। अब तक यहां लगभग ५० हजार पौधे लगाए जा चुके हैं और यह प्रक्रिया अभी भी जारी है। इन पौधों के संरक्षण और रखरखाव पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट के वॉलंटियर डॉ. आदित्य चौधरी ने कहा कि सरकार द्वारा दी गई आठ स्थलों पर इकोसिस्टम को पुनर्जीवित करने का कार्य संस्थान को सौंपा गया है। इसके तहत झीलों के आसपास रेन फॉरेस्ट प्लांटेशन किया जा रहा है। पौधरोपण के बाद इन स्थलों का कम से कम तीन वर्षों तक रखरखाव किया जाता है। जब तीन वर्ष बाद पेड़ों का विकास हो जाता है, तब इन स्थलों को स्थानीय प्रशासन को सौंप दिया जाता है। गुजरात सरकार की ओर से सुरक्षा, जल आपूर्ति और अन्य आवश्यक सुविधाओं का पूरा सहयोग मिलता है।

उन्होंने आगे कहा कि पौधे हैदराबाद से लाए जाते हैं और इन्हें लगाने के लिए एक विशेष वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनाई जाती है। पौधों के लिए तीन फीट गहरी पिटिंग की जाती है, जिसे सात से दस दिन तक अनुकूलन के लिए छोड़ा जाता है। इसके बाद उसमें एक्टिवेटेड चारकोल, कोकोपिट और मिट्टी का मिश्रण डाला जाता है। पिट में वर्मी कम्पोस्ट और नीम केक मिलाने के बाद पौधरोपण किया जाता है और ड्रिप इरिगेशन के जरिए पानी दिया जाता है। अब तक लगाए गए लगभग ५० हजार पौधों का विकास अच्छे से हो रहा है, जिससे यह साबित होता है कि इस प्रकार का वैज्ञानिक पौधरोपण इकोसिस्टम के पुनर्जीवन के लिए अत्यंत प्रभावी है।

यह उल्लेखनीय है कि इन पौधों को ड्रिप इरिगेशन और रेन गन जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से पानी देकर बड़ा किया जा रहा है, ताकि उनका स्वस्थ विकास सुनिश्चित हो सके। पेड़ों के सही ढंग से पनपने पर ही वे पर्यावरण को स्वच्छ और संतुलित बनाने के उद्देश्य को पूरा कर सकेंगे। वडनगर में किया जा रहा यह पौधरोपण न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान और ‘ग्रीन गुजरात, ग्रीन इंडिया’ के संकल्प को भी साकार कर रहा है।

हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट का यह प्रयास इस बात का उदाहरण है कि सरकार और समाज के संयुक्त प्रयास से प्राकृतिक वातावरण को बेहतर बनाया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह हमें यह भी बताती है कि समाज और सरकार मिलकर कैसे एक सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। वडनगर जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर इस तरह के प्रयासों से हमारा प्राकृतिक समृद्धि बढ़ेगा।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वडनगर में पौधरोपण कब शुरू हुआ?
वडनगर में पौधरोपण की शुरुआत विष्णुपुरी तालाब से की गई थी।
कितने पौधे लगाए गए हैं?
अब तक लगभग 50 हजार पौधे लगाए जा चुके हैं।
पौधों की देखभाल कैसे की जाती है?
पौधों की देखभाल के लिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है और इन्हें ड्रिप इरिगेशन द्वारा पानी दिया जा रहा है।
इस पहल का उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और इकोसिस्टम का पुनर्जीवन है।
हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट का इसमें क्या रोल है?
हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट इस पहल का नेतृत्व कर रहा है और पौधरोपण का कार्य करवा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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