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क्या संभल हिंसा मामले में एएसपी अनुज चौधरी समेत 12 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज होगी?

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क्या संभल हिंसा मामले में एएसपी अनुज चौधरी समेत 12 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज होगी?

सारांश

संभल में हुई हिंसा के मामले में कोर्ट ने एएसपी अनुज चौधरी और 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। यह मुद्दा स्थानीय निवासियों और पुलिस के बीच हुई झड़प से जुड़ा है, जिसमें एक युवक गोली लगने से घायल हुआ था।

मुख्य बातें

संभल में पुलिस फायरिंग से एक युवक घायल हुआ।
अदालत ने 12 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।
याचिकाकर्ता ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया।
यह मामला स्थानीय निवासियों और पुलिस के बीच टकराव का है।
पुलिस का दावा था कि बल प्रयोग आवश्यक था, जबकि स्थानीय लोग इसे अत्यधिक मानते हैं।

संभल, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के संभल जिले में नवंबर 2024 में हुई हिंसा के मामले में अदालत ने संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) विभांशु सुधीर की अदालत ने मंगलवार को तत्कालीन सीओ संभल अनुज चौधरी समेत 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।

यह आदेश यामीन नामक व्यक्ति की याचिका पर पारित किया गया, जिसके बेटे आलम को पुलिस फायरिंग में गोली लगने का आरोप है। याचिकाकर्ता यामीन, जो नखासा थाना क्षेत्र के मोहल्ला खग्गू सराय अंजुमन निवासी हैं, ने 6 फरवरी 2025 को सीजेएम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया कि उनका 24 वर्षीय बेटा आलम 24 नवंबर 2024 को घर से रस्क (टोस्ट) बेचने निकला था।

शाही जामा मस्जिद क्षेत्र में पहुंचने पर पुलिस ने कथित तौर पर उस पर गोली चलाई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। यामीन ने आरोप लगाया कि यह फायरिंग बिना उकसावे के की गई और पुलिस ने हिंसा को दबाने के नाम पर निर्दोष युवक को निशाना बनाया।

याचिका में तत्कालीन सीओ संभल अनुज चौधरी और संभल कोतवाली के इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित कुल 12 पुलिसकर्मियों को नामजद आरोपी बनाया गया था। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि पुलिस ने घटना के बाद कोई उचित जांच नहीं की और घायल युवक को अस्पताल पहुंचाने में भी लापरवाही बरती गई।

मामले की सुनवाई 9 जनवरी 2026 को हुई, जिसमें कोर्ट ने याचिका पर गहन विचार-विमर्श के बाद सभी नामजद पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।

अनुज चौधरी उस समय संभल के सर्कल ऑफिसर थे और वर्तमान में फिरोजाबाद में एएसपी ग्रामीण के पद पर तैनात हैं। आदेश के बाद पुलिस विभाग और जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है। कई वरिष्ठ अधिकारी इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चाधिकारियों से संपर्क में हैं। संभल हिंसा का यह मामला नवंबर 2024 में शाही जामा मस्जिद क्षेत्र में हुई झड़प से जुड़ा है, जिसमें पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच टकराव हुआ था। पुलिस का दावा था कि हिंसा को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया गया, जबकि स्थानीय निवासियों ने इसे अत्यधिक और निर्दोषों पर हमला बताया था।

संपादकीय दृष्टिकोण

अदालत ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया है, जो न्याय व्यवस्था की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि पुलिस बल का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है और क्या यह सही है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संभल हिंसा मामला क्या था?
यह मामला नवंबर 2024 में शाही जामा मस्जिद क्षेत्र में हुई झड़प से संबंधित है, जिसमें एक युवक को पुलिस फायरिंग में गोली लगी।
एफआईआर किसके खिलाफ दर्ज की गई है?
एफआईआर एएसपी अनुज चौधरी और 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज की गई है।
याचिका किसने दायर की थी?
याचिका यामीन नामक व्यक्ति ने दायर की थी, जिसके बेटे आलम को गोली लगी थी।
अदालत ने कब सुनवाई की?
अदालत ने इस मामले की सुनवाई 9 जनवरी 2026 को की थी।
क्या पुलिस ने उचित जांच की थी?
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने घटना के बाद कोई उचित जांच नहीं की।
राष्ट्र प्रेस
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