कपास आयात शुल्क हटाने से तिरुप्पुर निटवियर उद्योग को राहत, 1 जून से 30 अक्टूबर तक छूट लागू
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 1 जून से 30 अक्टूबर 2026 तक कपास आयात पर सभी सीमा शुल्क अस्थायी रूप से हटाने का फैसला किया है, जिससे तिरुप्पुर के निटवियर और कपड़ा उद्योग में उत्साह की लहर है। उद्योग जगत के नेताओं का कहना है कि यह निर्णय उत्पादन लागत घटाने, कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ाने और भारतीय परिधान निर्यात की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
फैसले की पृष्ठभूमि
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब घरेलू बाज़ार में कपास की कीमतें लगातार बढ़ रही थीं और स्पिनिंग मिलें, कपड़ा निर्माता तथा निर्यातक कच्चे माल की बढ़ती लागत से जूझ रहे थे। केंद्र सरकार ने यह कदम पर्याप्त कपास आपूर्ति सुनिश्चित करने और उद्योग को राहत देने के उद्देश्य से उठाया है। गौरतलब है कि तिरुप्पुर भारत के कुल निटवियर निर्यात में अग्रणी भूमिका निभाता है और यहाँ लाखों श्रमिक रोज़गार पाते हैं।
उद्योग नेताओं की प्रतिक्रिया
अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के अध्यक्ष ए. शक्तिवेल ने इस घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि ड्यूटी हटाने से भारतीय कपड़ा और परिधान उद्योग के लिए कपास की उपलब्धता में काफी सुधार होगा। उन्होंने कहा, 'कपास आयात पर सीमा शुल्क हटाना समय की जरूरत है। इससे घरेलू बाज़ार में कपास की कीमतों को नियंत्रित करने, अच्छी गुणवत्ता वाली कपास की उपलब्धता बढ़ाने और पूरे कपड़ा उद्योग में उत्पादन लागत कम करने में मदद मिलेगी।'
शक्तिवेल ने यह भी रेखांकित किया कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भारतीय परिधान निर्यात को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा, खासकर तब जब भारतीय निर्यातकों को कई अन्य कपड़ा उत्पादक देशों से कड़ी चुनौती मिल रही है। उन्होंने विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्यमों (SME) का उल्लेख किया, जो कपास और धागे की कीमतों में तेज़ वृद्धि के कारण सबसे अधिक दबाव में थे।
तिरुप्पुर निर्यातकों की आवाज़
तिरुप्पुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष के.एम. सुब्रमण्यम ने कहा कि इससे निटवियर निर्माण क्षेत्र को सीधा लाभ मिलेगा। उनके अनुसार, 'उद्योग लंबे समय से कच्चे माल की बढ़ती लागत का बोझ कम करने के लिए उपायों की माँग कर रहा था। यह फैसला उत्पादन खर्च घटाने और निटवियर निर्यातकों के लिए कारोबारी माहौल बेहतर बनाने में मदद करेगा।'
स्पिनिंग मिलों और SME पर असर
साउथ इंडिया होजरी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि सीमा शुल्क में यह अस्थायी छूट पूरे कपड़ा मूल्य श्रृंखला — स्पिनिंग मिलों, कपड़ा निर्माताओं और परिधान निर्यातकों — को फायदा पहुँचाएगी। उन्होंने कहा कि कपास की कीमतों में कमी आने से तिरुप्पुर जैसे प्रमुख कपड़ा केंद्रों को नई गति मिलेगी।
आगे की राह
उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इस पाँच महीने की छूट अवधि में कपास की कीमतें स्थिर होंगी, निर्यात ऑर्डर बढ़ेंगे और देश के सर्वाधिक रोज़गार देने वाले क्षेत्रों में से एक — कपड़ा उद्योग — को नई ऊर्जा मिलेगी। यह देखना अहम होगा कि 30 अक्टूबर 2026 के बाद सरकार इस छूट को जारी रखती है या नहीं, जो उद्योग की दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए महत्वपूर्ण होगा।