17 जुलाई 2026
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कपास आयात शुल्क हटाने से तिरुप्पुर निटवियर उद्योग को राहत, 1 जून से 30 अक्टूबर तक छूट लागू

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कपास आयात शुल्क हटाने से तिरुप्पुर निटवियर उद्योग को राहत, 1 जून से 30 अक्टूबर तक छूट लागू

सारांश

केंद्र सरकार ने 1 जून से 30 अक्टूबर तक कपास आयात पर सीमा शुल्क हटा दिया है — तिरुप्पुर के निटवियर निर्यातकों के लिए यह वह राहत है जिसका वे महीनों से इंतज़ार कर रहे थे। उत्पादन लागत घटने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद के बीच असली सवाल यह है कि अक्टूबर के बाद क्या होगा।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने 1 जून से 30 अक्टूबर 2026 तक कपास आयात पर सभी सीमा शुल्क अस्थायी रूप से हटाए।
फैसले का उद्देश्य बढ़ती कपास कीमतों पर नियंत्रण और कपड़ा उद्योग के लिए कच्चे माल की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना।
अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के अध्यक्ष ए.
शक्तिवेल ने कहा — इससे उत्पादन लागत घटेगी और निर्यात अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा।
तिरुप्पुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष के.एम.
सुब्रमण्यम ने कहा — निटवियर निर्माताओं को सीधा लाभ मिलेगा।
स्पिनिंग मिलें, कपड़ा निर्माता, परिधान निर्यातक और SME — सभी को इस छूट से राहत मिलने की उम्मीद।

केंद्र सरकार ने 1 जून से 30 अक्टूबर 2026 तक कपास आयात पर सभी सीमा शुल्क अस्थायी रूप से हटाने का फैसला किया है, जिससे तिरुप्पुर के निटवियर और कपड़ा उद्योग में उत्साह की लहर है। उद्योग जगत के नेताओं का कहना है कि यह निर्णय उत्पादन लागत घटाने, कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ाने और भारतीय परिधान निर्यात की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

फैसले की पृष्ठभूमि

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब घरेलू बाज़ार में कपास की कीमतें लगातार बढ़ रही थीं और स्पिनिंग मिलें, कपड़ा निर्माता तथा निर्यातक कच्चे माल की बढ़ती लागत से जूझ रहे थे। केंद्र सरकार ने यह कदम पर्याप्त कपास आपूर्ति सुनिश्चित करने और उद्योग को राहत देने के उद्देश्य से उठाया है। गौरतलब है कि तिरुप्पुर भारत के कुल निटवियर निर्यात में अग्रणी भूमिका निभाता है और यहाँ लाखों श्रमिक रोज़गार पाते हैं।

उद्योग नेताओं की प्रतिक्रिया

अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के अध्यक्ष ए. शक्तिवेल ने इस घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि ड्यूटी हटाने से भारतीय कपड़ा और परिधान उद्योग के लिए कपास की उपलब्धता में काफी सुधार होगा। उन्होंने कहा, 'कपास आयात पर सीमा शुल्क हटाना समय की जरूरत है। इससे घरेलू बाज़ार में कपास की कीमतों को नियंत्रित करने, अच्छी गुणवत्ता वाली कपास की उपलब्धता बढ़ाने और पूरे कपड़ा उद्योग में उत्पादन लागत कम करने में मदद मिलेगी।'

शक्तिवेल ने यह भी रेखांकित किया कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भारतीय परिधान निर्यात को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा, खासकर तब जब भारतीय निर्यातकों को कई अन्य कपड़ा उत्पादक देशों से कड़ी चुनौती मिल रही है। उन्होंने विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्यमों (SME) का उल्लेख किया, जो कपास और धागे की कीमतों में तेज़ वृद्धि के कारण सबसे अधिक दबाव में थे।

तिरुप्पुर निर्यातकों की आवाज़

तिरुप्पुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष के.एम. सुब्रमण्यम ने कहा कि इससे निटवियर निर्माण क्षेत्र को सीधा लाभ मिलेगा। उनके अनुसार, 'उद्योग लंबे समय से कच्चे माल की बढ़ती लागत का बोझ कम करने के लिए उपायों की माँग कर रहा था। यह फैसला उत्पादन खर्च घटाने और निटवियर निर्यातकों के लिए कारोबारी माहौल बेहतर बनाने में मदद करेगा।'

स्पिनिंग मिलों और SME पर असर

साउथ इंडिया होजरी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि सीमा शुल्क में यह अस्थायी छूट पूरे कपड़ा मूल्य श्रृंखला — स्पिनिंग मिलों, कपड़ा निर्माताओं और परिधान निर्यातकों — को फायदा पहुँचाएगी। उन्होंने कहा कि कपास की कीमतों में कमी आने से तिरुप्पुर जैसे प्रमुख कपड़ा केंद्रों को नई गति मिलेगी।

आगे की राह

उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इस पाँच महीने की छूट अवधि में कपास की कीमतें स्थिर होंगी, निर्यात ऑर्डर बढ़ेंगे और देश के सर्वाधिक रोज़गार देने वाले क्षेत्रों में से एक — कपड़ा उद्योग — को नई ऊर्जा मिलेगी। यह देखना अहम होगा कि 30 अक्टूबर 2026 के बाद सरकार इस छूट को जारी रखती है या नहीं, जो उद्योग की दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए महत्वपूर्ण होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह मूलतः एक अस्थायी पैच है — न कि संरचनात्मक सुधार। भारत के कपड़ा उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता की समस्या केवल कच्चे माल की लागत तक सीमित नहीं है; श्रम उत्पादकता, तकनीकी उन्नयन और लॉजिस्टिक्स भी उतने ही अहम हैं। यह भी ध्यान देने योग्य है कि 30 अक्टूबर के बाद शुल्क वापस आने पर उद्योग फिर उसी दबाव में होगा, जब तक कि दीर्घकालिक नीति नहीं बनती। तिरुप्पुर के SME को राहत ज़रूर मिलेगी, पर बांग्लादेश और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धियों से आगे निकलने के लिए यह पर्याप्त नहीं।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कपास आयात शुल्क छूट का फैसला क्या है?
केंद्र सरकार ने 1 जून से 30 अक्टूबर 2026 तक कपास के आयात पर सभी सीमा शुल्क अस्थायी रूप से हटा दिए हैं। यह कदम बढ़ती कपास कीमतों को नियंत्रित करने और कपड़ा उद्योग के लिए पर्याप्त कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
तिरुप्पुर के निटवियर उद्योग को इससे क्या फायदा होगा?
कपास आयात पर शुल्क हटने से उत्पादन लागत में कमी आएगी और अच्छी गुणवत्ता की कपास की उपलब्धता बढ़ेगी। इससे तिरुप्पुर के निटवियर निर्माता और निर्यातक अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अधिक प्रतिस्पर्धी दरों पर ऑर्डर ले सकेंगे।
यह छूट कब तक लागू रहेगी?
यह अस्थायी छूट 1 जून 2026 से 30 अक्टूबर 2026 तक लागू है। इसके बाद सरकार की नीति क्या होगी, इसे लेकर उद्योग जगत प्रतीक्षारत है।
इस फैसले से किन-किन को फायदा मिलेगा?
इस छूट से स्पिनिंग मिलें, कपड़ा निर्माता, परिधान निर्यातक और विशेष रूप से छोटे व मध्यम उद्यम (SME) लाभान्वित होंगे। ये सभी पिछले कई महीनों से कपास और धागे की बढ़ती कीमतों के कारण दबाव में थे।
अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ने इस फैसले पर क्या कहा?
अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के अध्यक्ष ए. शक्तिवेल ने कहा कि यह कदम समय की ज़रूरत है और इससे घरेलू कपास कीमतें नियंत्रित होंगी, उत्पादन लागत घटेगी और भारतीय परिधान निर्यात वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा।
राष्ट्र प्रेस
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