संसद व्यवधान पर BJP का पलटवार: रवि शंकर प्रसाद ने खड़गे और राहुल गांधी को बताया 'पाखंडी'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ सांसद रवि शंकर प्रसाद ने 6 अगस्त 2026 को संसद परिसर में मीडिया से बातचीत में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। प्रसाद ने दोनों नेताओं से आग्रह किया कि वे दोनों सदनों को सुचारू रूप से चलने दें, ताकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में प्रदर्शनकारी छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सविस्तार जवाब दे सकें।
मुख्य घटनाक्रम
प्रसाद ने राहुल गांधी को 'पाखंडी' करार देते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष हर दिन एक नई कहानी गढ़ता है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक अपने निर्धारित कार्यालय में उपलब्ध रहते हैं। प्रसाद का तर्क था कि यदि संसद को कार्य करने दिया जाए और बहस हो, तो शाह निश्चित रूप से विपक्ष के सवालों का जवाब देंगे।
झारखंड परीक्षा विवाद और दोहरे मानक का आरोप
प्रसाद ने राहुल गांधी पर झारखंड में कथित परीक्षा अनियमितताओं के मामले में चुप्पी साधने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार ने परीक्षा प्रक्रिया एक ऐसी कंपनी को आउटसोर्स की थी, जिसे पहले उत्तर प्रदेश और राजस्थान में प्रतिबंधित किया जा चुका था। प्रसाद ने सवाल किया कि अगर वहाँ नौकरियाँ बेची जा रही हैं, तो राहुल गांधी मौन क्यों हैं। यह ऐसे समय में आया है जब जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर झारखंड के कई छात्र लगभग दो सप्ताह से भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
विपक्ष की माँग और संसद में गतिरोध
गौरतलब है कि खड़गे राज्यसभा में और राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं। दोनों नेता गृह मंत्री को सदन में बुलाकर प्रदर्शनकारी छात्रों पर कथित अत्याचार और बंदूकों के इस्तेमाल पर जवाब माँगने की माँग का नेतृत्व कर रहे हैं। विपक्ष के अनुसार, यह माँग स्वयं प्रदर्शनकारी नेताओं द्वारा भी उठाई जा रही है।
मानसून सत्र में व्यवधान की पृष्ठभूमि
संसद का मानसून सत्र 2026 लगातार गतिरोध की चपेट में रहा है। NEET परीक्षा परिणाम लीक, छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर के चंदे के कथित दुरुपयोग को लेकर विपक्ष के विरोध ने लोकसभा और राज्यसभा दोनों की कार्यवाही बार-बार बाधित की है। इसके बावजूद, विधायी गति बनाए रखने के लिए कुछ विधेयक बिना पर्याप्त चर्चा के पारित किए गए हैं।
आगे क्या
दोनों पक्षों के बीच जारी टकराव के बीच यह देखना होगा कि क्या गृह मंत्री अमित शाह सदन में छात्र आंदोलन से जुड़े सवालों का जवाब देने का अवसर पाते हैं। संसद की उत्पादकता पर बढ़ता दबाव सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों दलों के लिए राजनीतिक परीक्षा बनता जा रहा है।