प्रियंका गांधी का प्रह्लाद जोशी पर पलटवार: 'सच के लिए सजा मिले तो भी आवाज उठाती रहूंगी'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने 29 जुलाई 2026 को संसद के मॉनसून सत्र के दौरान केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के खिलाफ दिए गए अपने बयान का पुरज़ोर बचाव किया और स्पष्ट किया कि उन्होंने संसद में कुछ भी असंसदीय नहीं कहा — केवल तथ्य प्रस्तुत किए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सच बोलने की कीमत दंड के रूप में चुकानी पड़े, तो भी वह जनता से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज़ बुलंद करती रहेंगी।
बयान हटाने पर प्रियंका का विरोध
प्रियंका गांधी ने कहा कि उनके बयान को सदन के रिकॉर्ड से हटाए जाने का कोई औचित्य नहीं है। उनके अनुसार, उन्होंने जो मुद्दे उठाए वे किसी एक घटना तक सीमित नहीं हैं, बल्कि महिलाओं के प्रति समाज और सत्ता की सोच तथा व्यवहार को उजागर करते हैं।
उन्होंने मंगलुरु के एक पब में महिलाओं पर हुए हमले का संदर्भ देते हुए आरोप लगाया कि उस मामले से जुड़े व्यक्ति को भारतीय जनता पार्टी (BJP) में किसने शामिल किया, यह सवाल उठना चाहिए। उन्होंने कहा कि भले ही बाद में उसे पार्टी से हटा दिया गया हो, लेकिन उसके BJP में शामिल होने की तस्वीरें मौजूद हैं।
महिला सुरक्षा पर आवाज़ उठाना ज़रूरी
प्रियंका गांधी ने दोहराया कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के सवाल पर संसद में बोलना न केवल उनका अधिकार है, बल्कि उनकी ज़िम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि वह भविष्य में भी इस तरह के मुद्दों पर निर्भीकता से अपनी बात रखती रहेंगी।
पेपर लीक विधेयक पर शशि थरूर की आपत्ति
इसी सत्र में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा के दौरान सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने तर्क दिया कि केवल सजा का प्रावधान करने से पेपर लीक जैसी समस्याएँ समाप्त नहीं होंगी — इसके लिए ठोस संरचनात्मक सुधार आवश्यक हैं।
थरूर ने फास्ट ट्रैक कोर्ट की क्षमता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2025 में फास्ट ट्रैक अदालतों में बड़ी संख्या में नए मामले दर्ज हुए, लेकिन उनमें से सीमित मामलों में ही फैसले हो सके। उनके अनुसार, न्यायिक क्षमता और संसाधनों को बढ़ाए बिना कानून पारित करना पर्याप्त नहीं है।
गोगोई और के. सुरेश की माँग — गृह मंत्री सदन में आएं
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने परीक्षा व्यवस्था पर चर्चा के दौरान यह सवाल उठाया कि इतने अहम विषय पर बहस हो रही है, फिर भी प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री सदन में अनुपस्थित हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष की माँग है कि गृह मंत्री सदन में आकर जवाब दें।
गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही से बच रही है। उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस मुद्दे पर लोकसभा में अपना पक्ष रखेंगे।
कांग्रेस सांसद के. सुरेश ने भी कहा कि विपक्ष छात्रों और उनके अभिभावकों की चिंताओं को लेकर लगातार सरकार पर दबाव बना रहा है। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी का सदन में भाषण महत्वपूर्ण होगा। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के एक सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े सवाल पर के. सुरेश ने कहा कि विजयन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था और राज्य सरकार पहले ही जाँच के निर्देश दे चुकी है।
यह ऐसे समय में आया है जब मॉनसून सत्र में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तीखी नोकझोंक का सिलसिला जारी है, और परीक्षा सुधार से लेकर महिला सुरक्षा तक के मुद्दे सदन की कार्यवाही पर हावी हो रहे हैं।