28 जुलाई 2026
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प्रियंका गांधी का मोदी को करारा जवाब: 'जेन जी का भरोसा जीतना है तो दिल का एंगल बदलो, कैमरे का नहीं'

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प्रियंका गांधी का मोदी को करारा जवाब: 'जेन जी का भरोसा जीतना है तो दिल का एंगल बदलो, कैमरे का नहीं'

सारांश

लोकसभा में परीक्षा संशोधन विधेयक पर बहस के दौरान प्रियंका गांधी ने मोदी सरकार को आईना दिखाया — 10 वर्षों में 152 पेपर लीक, एक भी सजा नहीं, और छात्रों पर कथित पेलेट गन का इस्तेमाल। उनका संदेश साफ था: जेन जी का भरोसा PR से नहीं, ठोस सुधारों से मिलेगा।

मुख्य बातें

प्रियंका गांधी वाड्रा ने 28 जुलाई 2026 को लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस संशोधन विधेयक, 2026 पर बहस के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने PM मोदी को सलाह दी कि जेन जी का विश्वास जीतने के लिए सोशल मीडिया कैमरे का नहीं, दिल का एंगल बदलना होगा।
पिछले 10 वर्षों में 152 पेपर लीक की घटनाओं का आरोप; 2024 के कानून के तहत अब तक एक भी दोषी को सजा नहीं।
छात्र प्रदर्शनों में कथित पेलेट गन और एके-47 के इस्तेमाल के आदेश पर सरकार से जवाब माँगा।
शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने दावों पर प्रमाण माँगे; लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हस्तक्षेप किया।
NEP में व्यापक बदलाव, विशेषज्ञों की भागीदारी और नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की माँग की।

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने 28 जुलाई 2026 को लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर बहस के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि यदि देश के युवाओं — खासकर जेन जी — का विश्वास जीतना है, तो सोशल मीडिया वीडियो के लिए फोन कैमरे का नहीं, बल्कि अपने दिल का एंगल बदलना होगा।

सदन में क्या कहा प्रियंका गांधी ने

प्रियंका गांधी ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा, 'आप प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटा सकते हैं, लेकिन उनके सवालों को नजरअंदाज नहीं कर सकते। सरकार को अपनी नीयत सुधारनी होगी और अपनी साख वापस हासिल करनी होगी।' उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में व्यापक बदलाव, शिक्षा क्षेत्र में विशेषज्ञों की भागीदारी, रोजगार सृजन और नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की माँग की।

उन्होंने यह भी कहा कि केवल विशेषज्ञ समितियाँ गठित कर देने से समस्या हल नहीं होगी — प्रधानमंत्री को ठोस और जवाबदेह कदम उठाने होंगे।

सदन में तीखी नोकझोंक

बहस के दौरान प्रियंका गांधी की नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को लेकर की गई टिप्पणी पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा टकराव हुआ। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और जोशी ने उनसे दावों के समर्थन में प्रमाण माँगे। जोशी ने उनकी टिप्पणियों का खंडन करते हुए उन्हें सदन की कार्यवाही से हटाने की माँग की। जब प्रियंका गांधी ने कहा कि वह अपने दावे प्रमाणित करेंगी, तब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हस्तक्षेप कर उन्हें चर्चा को विधेयक तक सीमित रखने की सलाह दी।

पेपर लीक और परीक्षा तंत्र पर हमला

प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार 2024 में भी पेपर लीक रोकने के लिए कानून लाई थी, लेकिन उस कानून के तहत अब तक एक भी आरोपी को सजा नहीं मिल सकी। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में 152 पेपर लीक की घटनाओं से करोड़ों छात्र प्रभावित हुए, फिर भी पेपर लीक माफिया के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने कहा, 'छात्रों के खिलाफ फेस रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन पेपर लीक करने वालों के खिलाफ यही तकनीक अब तक लागू नहीं की गई।' उन्होंने नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में गठित समिति के सदस्यों की योग्यता पर भी सवाल उठाए।

छात्र आंदोलनों पर बल प्रयोग का मुद्दा

प्रियंका गांधी ने छात्र प्रदर्शनों के दौरान कथित बल प्रयोग को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने पूछा, 'क्या छात्र आतंकवादी थे? छात्रों पर पेलेट गन और एके-47 चलाने की जरूरत क्या थी? कांग्रेस ही नहीं, पूरा देश जानना चाहता है कि यह आदेश किसने दिया।' उन्होंने कहा कि घायल छात्रों के माता-पिता और देशभर के लोग जवाब माँग रहे हैं।

आगे क्या होगा

प्रियंका गांधी ने स्पष्ट किया कि युवाओं का भरोसा बहाल करने के लिए जनसंपर्क अभियानों और नैरेटिव प्रबंधन से काम नहीं चलेगा — ठोस और व्यापक सुधार अनिवार्य हैं। यह बहस ऐसे समय में आई है जब परीक्षा सुधार और छात्र असंतोष राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में हैं, और संशोधन विधेयक पर संसद में आगे की चर्चा प्रस्तावित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

शून्य सजा' वाला आरोप सबसे तीखा तीर है — क्योंकि यह सत्यापन की माँग करता है, न कि केवल सहानुभूति की। संशोधन विधेयक लाने की सरकार की मंशा सराहनीय है, लेकिन यदि 2024 का मूल कानून ही निष्प्रभावी रहा, तो नया संशोधन कितना कारगर होगा — यह असली सवाल है जिसका जवाब सदन में नहीं मिला। छात्र आंदोलनों में बल प्रयोग का मुद्दा विधेयक की सीमा से बाहर है, लेकिन यह जवाबदेही की उस बड़ी माँग का हिस्सा है जिसे सत्ता पक्ष प्रमाण माँगकर टाल रहा है। युवा मतदाताओं की नाराजगी को PR से नहीं, परिणामों से शांत किया जा सकता है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रियंका गांधी ने लोकसभा में किस विधेयक पर बोलते हुए मोदी सरकार को घेरा?
उन्होंने 28 जुलाई 2026 को पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर बहस के दौरान केंद्र सरकार पर हमला बोला। यह विधेयक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम से संबंधित है।
प्रियंका गांधी ने पेपर लीक को लेकर क्या आरोप लगाए?
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 10 वर्षों में 152 पेपर लीक की घटनाएँ हुईं जिनसे करोड़ों छात्र प्रभावित हुए, लेकिन 2024 में बने कानून के तहत अब तक एक भी आरोपी को सजा नहीं मिली। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों पर फेस रिकग्निशन तकनीक लागू की गई, जबकि पेपर लीक माफिया पर यही तकनीक नहीं आजमाई गई।
छात्र आंदोलनों पर बल प्रयोग के बारे में प्रियंका गांधी ने क्या कहा?
प्रियंका गांधी ने सवाल उठाया कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर पेलेट गन और एके-47 के इस्तेमाल की अनुमति किसने दी। उन्होंने कहा कि घायल छात्रों के माता-पिता और पूरा देश इस आदेश के जिम्मेदार व्यक्ति का नाम जानना चाहता है।
सदन में भाजपा ने प्रियंका गांधी के आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया दी?
शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने प्रियंका गांधी से दावों के समर्थन में प्रमाण माँगे। जोशी ने उनकी टिप्पणियों का खंडन करते हुए उन्हें सदन की कार्यवाही से हटाने की माँग की, जिसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हस्तक्षेप किया।
प्रियंका गांधी ने युवाओं का भरोसा बहाल करने के लिए सरकार से क्या माँगा?
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में व्यापक बदलाव, शिक्षा क्षेत्र में विशेषज्ञों की भागीदारी, रोजगार सृजन और नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की माँग की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनसंपर्क अभियानों और नैरेटिव प्रबंधन से युवाओं का विश्वास नहीं लौटेगा — इसके लिए ठोस और जवाबदेह सुधार जरूरी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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