प्रियंका गांधी का लोकसभा में सरकार पर प्रहार: 'छात्रों पर पेलेट गन किसके आदेश पर चली?'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने 28 जुलाई को लोकसभा में एंटी-पेपर लीक विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने छात्र आंदोलन में बल प्रयोग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सीधे जवाब माँगा और आरोप लगाया कि सरकार देश के युवाओं की आवाज़ कुचलने पर उतारू है।
संसद में उठे तीखे सवाल
प्रियंका गांधी ने सदन में कहा, 'मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से पूछना चाहती हूँ कि छात्रों पर आँसू गैस छोड़ने, लाठीचार्ज करने, पेलेट गन और एके-47 का इस्तेमाल करने की क्या ज़रूरत थी? क्या वे छात्र आतंकवादी थे? देश के युवाओं पर पेलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया — प्रधानमंत्री ने या गृह मंत्री ने? इसका जवाब उन्हें देना होगा। सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, पूरा देश इसका जवाब माँग रहा है।'
उनके इस भाषण ने सदन में तीखी बहस को जन्म दिया। यह ऐसे समय में आया है जब एंटी-पेपर लीक विधेयक पर विपक्ष पहले से ही सरकार को घेरे हुए है।
आईसीयू में घायल छात्रा का मार्मिक प्रसंग
प्रियंका गांधी ने बताया कि कुछ दिन पहले वह नई दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल में उस छात्रा का हाल जानने गई थीं, जो पुलिस लाठीचार्ज में घायल होकर आईसीयू में जिंदगी की जंग लड़ रही थी। उन्होंने बताया कि उनके पहुँचने से कुछ समय पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और अन्य नेता भी वहाँ पहुँचे थे।
प्रियंका गांधी के अनुसार, छात्रा की माँ ने हाथ जोड़कर कहा, 'आपके आने के लिए धन्यवाद, लेकिन मैं किसी से मिलना नहीं चाहती। सुबह से बड़े-बड़े नेता एक के बाद एक आ रहे हैं, वीडियो बना रहे हैं। मेरी बेटी की इस हालत के लिए जो ज़िम्मेदार हैं, वे भी यहाँ आए — आखिर क्यों?' कांग्रेस सांसद ने कहा कि उस माँ का पूरा शरीर दर्द से काँप रहा था।
परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर आरोप
प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने पिछले वर्षों में रोज़गार सृजन करने वाले तमाम क्षेत्रों को कमज़ोर किया है और देश की परीक्षा प्रणाली पूरी तरह विफल हो चुकी है। उन्होंने कहा, 'पिछले 10 वर्षों में 152 पेपर लीक हुए हैं, जिससे करोड़ों छात्र प्रभावित हुए, लेकिन पेपर लीक माफिया के एक भी सदस्य को सज़ा नहीं मिली।'
गौरतलब है कि यह विधेयक उसी पृष्ठभूमि में लाया गया है जब NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में छात्र आंदोलन भड़के थे।
सरकार से जवाबदेही की माँग
कांग्रेस सांसद ने सदन में सरकार से पूछा कि वह देश के युवाओं से आखिर क्यों डर रही है और छात्रों की आवाज़ दबाने का अधिकार उसे किसने दिया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि बल प्रयोग और परीक्षा प्रणाली की विफलता जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार को संसद और देश के सामने जवाब देना होगा।
आने वाले दिनों में इस विधेयक पर संसद में बहस और तेज़ होने की संभावना है, क्योंकि विपक्ष ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह छात्र हितों से जुड़े सवालों पर सरकार को घेरता रहेगा।