सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026: विपक्ष का आरोप — 'कानून की आड़ में छात्रों को गुमराह कर रही सरकार'
सारांश
मुख्य बातें
संसद के मॉनसून सत्र में सोमवार, 27 जुलाई 2026 को सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों ने आरोप लगाया कि सरकार पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की खामियों को दूर करने की बजाय केवल नए कानूनों की आड़ में जनता और छात्रों को गुमराह कर रही है। विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सार्वजनिक माफी और गृह मंत्री अमित शाह की निंदा की माँग भी दोहराई।
प्रियंका गांधी का बयान — अपुष्ट एफआईआर का मुद्दा
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि बिहार और पश्चिम बंगाल में छात्रों के विरुद्ध अब भी एफआईआर दर्ज की जा रही हैं। हालाँकि उन्होंने स्वयं स्वीकार किया कि इस सूचना की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जानकारी ही अपुष्ट है, तो संसद में इस पर बहस का औचित्य क्या है।
इमरान मसूद के सवाल — पुराना कानून काफी था, तो संशोधन क्यों?
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने संशोधन विधेयक पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार इस विषय पर पहले भी कानून बना चुकी है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि पूर्व के कानून पर्याप्त थे, तो नए संशोधन की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। मसूद ने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया और पूछा कि क्या सरकार को पढ़े-लिखे युवाओं से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा महसूस हो रहा था।
पेपर लीक मामलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई है और मुख्य आरोपी कथित तौर पर फरार है। उनके अनुसार सरकार केवल नए कानून लाने की बात कर रही है, जबकि प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही।
गौरव गोगोई का आरोप — भ्रष्टाचारियों को बचाने की कोशिश
लोकसभा में कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने चर्चा के दौरान आरोप लगाया कि सरकार भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों को बचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि हाल ही में एक अदालत ने जाँच में खामियों के कारण एक आरोपी को बरी कर दिया, जिससे स्पष्ट होता है कि कानून में बदलाव के साथ-साथ निष्पक्ष और प्रभावी जाँच भी अनिवार्य है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि प्रधानमंत्री मोदी शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार को लेकर गंभीर हैं।
कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमन सिंह ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी कानून की सफलता उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। उन्होंने चेताया कि यदि 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं होती, तो आरोपी कानूनी प्रक्रिया के तहत रिहा हो सकता है। उनके अनुसार असली मुद्दा सरकार की इच्छाशक्ति का है।
TMC की माँगें — माफी, निंदा और NTA सुधार
TMC के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में सुधार के लिए हाई पावर्ड टास्क फोर्स के गठन का स्वागत किया, लेकिन कहा कि इससे विपक्ष की प्रमुख माँगें पूरी नहीं होतीं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से माफी और छात्रों के खिलाफ कथित पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर गृह मंत्री शाह की निंदा की माँग दोहराई।
TMC सांसद सागरिका घोष ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं के विरुद्ध पैलेट गन और अन्य बल-प्रयोग के साधनों का इस्तेमाल हुआ। उन्होंने दावा किया कि कनॉट प्लेस क्षेत्र में पैलेट गन से कई राउंड फायरिंग हुई। उन्होंने सरकार से पूछा कि निहत्थे और शांतिपूर्ण छात्रों के खिलाफ इतनी कठोर कार्रवाई क्यों की गई।
झामुमो का रुख — विपक्ष की राय से बने कानून
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) सांसद महुआ माजी ने कहा कि उनकी पार्टी विधेयक पर गंभीर चर्चा चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पहले भी पेपर लीक रोकने के आश्वासन देती रही है, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन के दौरान लाठीचार्ज और आँसू गैस के इस्तेमाल की घटनाएँ सामने आईं और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए विपक्ष की राय लेकर कानून बनाया जाना चाहिए।
यह बहस ऐसे समय में हुई है जब देशभर में पेपर लीक के मामलों को लेकर छात्रों में गहरा असंतोष है और CBI जाँच की प्रगति सवालों के घेरे में है। आने वाले दिनों में विधेयक पर आगे की चर्चा और संभावित संशोधन प्रस्तावों पर सबकी नजर रहेगी।