शाहनवाज हुसैन का सोनिया गांधी पर पलटवार: 'कांग्रेस अपने शासन की विदेश नीति की गलतियाँ भूल गई'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने 28 जून 2026 को पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान कांग्रेस नेता सोनिया गांधी पर तीखा पलटवार किया। गाजा मुद्दे पर सोनिया गांधी की हालिया टिप्पणी को आधार बनाते हुए हुसैन ने कहा कि कांग्रेस को अपने शासनकाल की विदेश नीति की विफलताओं को पहले याद करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक साख आज पहले से कहीं अधिक मजबूत है।
मुख्य आरोप: पाकिस्तान नीति पर कांग्रेस की 'बड़ी भूल'
शाहनवाज हुसैन ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भारत ने यह मान लिया था कि वह पाकिस्तान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा — और यही वह दौर था जब पाकिस्तान से आतंकवाद को बढ़ावा मिल रहा था। उन्होंने इसे कांग्रेस की 'बहुत बड़ी भूल' करार दिया। हुसैन ने कहा, 'हमारी विदेश नीति बहुत सक्षम है। सोनिया गांधी को शायद याद नहीं कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में विदेश नीति के स्तर पर कितनी बड़ी गलतियाँ की थीं।'
मोदी सरकार की विदेश नीति की तारीफ
भाजपा नेता ने दावा किया कि आज भारत एक साथ अमेरिका, चीन, रूस, यूक्रेन, ईरान और इजरायल — सभी के साथ सकारात्मक संबंध बनाए हुए है। उन्होंने कहा, 'भारत की विदेश नीति आज पूरी दुनिया में अलग पहचान रखती है। यही वजह है कि अमेरिका भी हमारा दोस्त है, चीन भी हमारा दोस्त है, रूस भी हमारा दोस्त है, यूक्रेन भी हमारा दोस्त है। ईरान भी हमारा मित्र है और इजरायल भी हमारे साथ अच्छे संबंध रखता है।'
खाड़ी देशों में मोदी की प्रतिष्ठा का उल्लेख
हुसैन ने यह भी कहा कि खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख सम्मान और पुरस्कार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिल चुके हैं और पूरे गल्फ क्षेत्र में भारत का प्रभाव पहले के किसी भी कार्यकाल से अधिक है। उनके अनुसार, यह भारत की बहुआयामी विदेश नीति की सफलता का प्रमाण है।
सोनिया गांधी पर राजनीतिक निशाना
शाहनवाज हुसैन ने सोनिया गांधी की गाजा पर की गई टिप्पणी को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा, 'सोनिया गांधी को राजनीति के लिए कोई मुद्दा नहीं मिल रहा है, इसलिए अब उन्हें गाजा की याद आ रही है।' गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस और भाजपा के बीच विदेश नीति को लेकर वाद-विवाद तेज होता जा रहा है। भाजपा का यह पलटवार आगामी राजनीतिक बहस में विदेश नीति को केंद्र में लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।