12 अगस्त 2026
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राकेश टिकैत का ऐलान: 13 अगस्त को तिरंगा यात्रा, ट्रैक्टर के साथ जुड़ने की अपील

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राकेश टिकैत का ऐलान: 13 अगस्त को तिरंगा यात्रा, ट्रैक्टर के साथ जुड़ने की अपील

सारांश

भाकियू नेता राकेश टिकैत ने 13 अगस्त को तिरंगा यात्रा का आह्वान किया है — यह महज एक जुलूस नहीं, बल्कि MSP गारंटी, कर्जा माफी और फसल बीमा सुधार की माँगों को धार देने की कोशिश है। 9 अगस्त से शुरू हुई अगस्त क्रांति यात्रा 21 अगस्त तक जारी रहेगी।

मुख्य बातें

राकेश टिकैत ने 13 अगस्त को मुजफ्फरनगर समेत देशभर में तिरंगा यात्रा निकालने का ऐलान किया।
अगस्त क्रांति यात्रा 9 अगस्त से शुरू होकर 21 अगस्त तक चलेगी; हर जिले में अलग-अलग तारीख पर।
यात्रा के दौरान किसान स्थानीय प्रशासन को MSP गारंटी और कर्जा माफी का ज्ञापन सौंपेंगे।
टिकैत ने किसानों से ट्रैक्टर लेकर शामिल होने की अपील की, इसे खेती से जुड़ाव का प्रतीक बताया।
फसल बीमा कंपनियों पर निशाना साधते हुए कहा — स्थानीय कार्यालय नहीं, प्रीमियम लेते हैं पर दावा नहीं देते।

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने 13 अगस्त को मुजफ्फरनगर और देशभर के विभिन्न जिलों में तिरंगा यात्रा निकालने का ऐलान किया है। अगस्त क्रांति यात्रा नाम से शुरू हुई यह पहल 9 अगस्त से आरंभ हो चुकी है और 21 अगस्त तक जारी रहेगी। दिल्ली के शहीदों और क्रांतिवीरों की स्मृति में आयोजित इस यात्रा में किसानों से ट्रैक्टर लेकर शामिल होने की अपील की गई है।

यात्रा का स्वरूप और संगठन

टिकैत ने बताया कि अगस्त क्रांति यात्रा हर जिले में अलग-अलग तारीख पर निकाली जा रही है। यात्रा में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा के साथ-साथ संगठन का झंडा भी रखा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि तहसील, ब्लॉक, कस्बे और गाँव स्तर पर आपसी सहमति से यात्राएँ निकाली जा सकती हैं।

यात्रा के समापन पर प्रत्येक क्षेत्र में स्थानीय प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा जाएगा। टिकैत ने कहा कि वे स्वयं मुजफ्फरनगर में रहेंगे जबकि अन्य नेता और कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रों में यात्रा का नेतृत्व करेंगे।

ट्रैक्टर और खेती से जुड़ाव का संदेश

टिकैत ने यात्रा में ट्रैक्टर लेकर आने की विशेष अपील की। उनका कहना है कि जो बच्चे ट्रैक्टर लेकर यात्रा में शामिल होंगे, वे अपने खेत से जुड़े रहेंगे और अपनी जमीन बेचने से बचेंगे। उन्होंने किसानों से कहा, 'अपने ट्रैक्टर को साफ-सुथरा रखें और खेती के औजारों को भी ठीक रखें।' यह यात्रा खेती और किसानी के प्रति युवा पीढ़ी में जागरूकता लाने का प्रयास भी है।

किसानों की प्रमुख माँगें

यात्रा के दौरान किसानों से आग्रह किया गया है कि वे अपने-अपने जिले में प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की गारंटी और कर्जा माफी की माँग करें। टिकैत ने फसल बीमा व्यवस्था पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि बीमा कंपनियों का कोई स्थानीय कार्यालय नहीं है — 'ऑफिस मुंबई में है, वे सिर्फ बैंक के जरिए पैसा लेते हैं, लेकिन पैसा देते नहीं।'

शांतिपूर्ण यात्रा की अपील

टिकैत ने यात्रा में शामिल होने वाले सभी लोगों से अनुशासन और शांति बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सभी लोग शांति से लाइन में यात्रा निकालें। यह यात्रा दिल्ली के उन शहीदों और क्रांतिवीरों की याद में समर्पित है जिन्होंने किसान आंदोलन में अपना योगदान दिया।

आगे क्या

यात्रा 21 अगस्त तक जारी रहेगी और इस दौरान देशभर के विभिन्न जिलों में किसान संगठन प्रशासन को ज्ञापन सौंपेंगे। यह पहल ऐसे समय में आई है जब किसान संगठन MSP कानून और कर्जा माफी जैसी दीर्घकालिक माँगों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश में लगे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राकेश टिकैत की तिरंगा यात्रा क्या है?
यह भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) द्वारा आयोजित 'अगस्त क्रांति यात्रा' है, जो 9 अगस्त से 21 अगस्त तक देशभर के विभिन्न जिलों में निकाली जा रही है। इसका उद्देश्य दिल्ली के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ MSP और कर्जा माफी की माँग उठाना है।
यात्रा में ट्रैक्टर लाने की अपील क्यों की गई है?
टिकैत का मानना है कि ट्रैक्टर के साथ यात्रा में शामिल होने से युवा किसानों का अपनी जमीन और खेती से जुड़ाव मजबूत होगा। उनका कहना है कि जो बच्चा अपने खेत में ट्रैक्टर चलाएगा, वह अपनी जमीन नहीं बेचेगा।
यात्रा के दौरान किसान कौन-सी माँगें रखेंगे?
किसान स्थानीय प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की कानूनी गारंटी, कर्जा माफी और फसल बीमा व्यवस्था में सुधार की माँग करेंगे।
यह यात्रा कहाँ-कहाँ निकाली जाएगी?
यात्रा देशभर के अलग-अलग जिलों में अलग-अलग तारीखों पर निकाली जा रही है। राकेश टिकैत स्वयं मुजफ्फरनगर में रहेंगे, जबकि अन्य नेता और कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रों में यात्रा का नेतृत्व करेंगे।
टिकैत ने फसल बीमा पर क्या कहा?
टिकैत ने फसल बीमा कंपनियों की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि इनका कोई स्थानीय कार्यालय नहीं है — ऑफिस मुंबई में है। उनका आरोप है कि ये कंपनियाँ बैंक के जरिए प्रीमियम तो लेती हैं, लेकिन किसानों को दावे का पैसा नहीं देतीं।
राष्ट्र प्रेस
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