24 अगस्त 2026
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उत्तराखंड में BKU टिकैत का छह जिलों में धरना स्थगित, मांगें न मानी तो खटीमा से देहरादून तक ट्रैक्टर मार्च

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उत्तराखंड में BKU टिकैत का छह जिलों में धरना स्थगित, मांगें न मानी तो खटीमा से देहरादून तक ट्रैक्टर मार्च

सारांश

उत्तराखंड में BKU टिकैत गुट का तीन दिवसीय धरना स्थगित — लेकिन यह खत्म नहीं हुआ। आठ सूत्रीय मांगों पर सरकार को एक से डेढ़ महीने की मोहलत दी गई है। जवाब न मिला तो खटीमा से ट्रैक्टर मार्च और देहरादून घेराव — 2020 की दिल्ली की तर्ज पर।

मुख्य बातें

भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) ने 23 अगस्त 2026 को उत्तराखंड के छह जिलों में तीन दिवसीय कलेक्ट्रेट धरना स्थगित किया।
प्रशासन को आठ सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा गया; शासन स्तर पर विचार का अनुरोध।
सोमवार दोपहर 3 बजे कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी के साथ किसान कमेटी की बैठक निर्धारित।
मांगें न मानी गईं तो खटीमा से ट्रैक्टर मार्च निकालकर देहरादून घेराव की चेतावनी — समय-सीमा लगभग एक से डेढ़ महीने ।
किसान नेताओं ने 2020-21 के दिल्ली किसान आंदोलन की तर्ज पर अनिश्चितकालीन धरने का संकेत दिया।

उत्तराखंड में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) ने 23 अगस्त 2026 को छह जिलों के कलेक्ट्रेट परिसरों में चल रहे तीन दिवसीय धरने को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया। किसान नेताओं ने प्रशासन को आठ सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा है और सरकार को एक निश्चित समय-सीमा दी है। नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो खटीमा से ट्रैक्टर मार्च निकालकर देहरादून को घेरा जाएगा।

धरने का घटनाक्रम

यूनियन का यह धरना तीन दिनों से उत्तराखंड के छह जिलों में एक साथ चल रहा था। किसान नेताओं के अनुसार, धरने को किसानों और ग्रामीण समुदायों का व्यापक समर्थन मिला। एक किसान नेता ने कहा, 'उत्तराखंड के अंदर हमारा तीन दिवसीय धरना था, जो छह जिलों में चल रहा था। हमारे किसानों और गरीबों की जो आठ सूत्रीय मांगें थीं, वो डीएम को सौंपी हैं।'

धरने के दौरान एक सवाल उठा कि जिलाधिकारी (डीएम) स्वयं धरना स्थल पर क्यों नहीं आए। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि उनके घर में गंभीर पारिवारिक परेशानी थी, और आवश्यकता पड़ने पर वे शाम या रात तक उपस्थित हो सकते थे। इसके बाद किसानों ने निर्णय लिया कि ज्ञापन मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को सौंपा जाएगा।

प्रशासन का रुख और आश्वासन

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यूनियन की मांगों वाला ज्ञापन शासन को पहले ही प्रेषित किया जा चुका है और उसे पुनः भेजा जा रहा है। अधिकारी ने कहा, 'हमने उन्हें आश्वस्त किया है कि सोमवार को कलेक्ट्रेट के सभागार में जिलाधिकारी किसान कमेटी के साथ बैठक करेंगे। जिला स्तर पर जितनी अधिक से अधिक समस्याओं का समाधान हो सकता है, उस पर विचार किया जाएगा।'

किसान नेताओं ने भी इस बात को रेखांकित किया कि उनके लिए यह महत्वपूर्ण नहीं है कि ज्ञापन किसे सौंपा गया, बल्कि असली मुद्दा यह है कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करे और उन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा करे।

देहरादून कूच की चेतावनी

यूनियन ने सरकार को लगभग एक से डेढ़ महीने की समय-सीमा दी है। किसान नेता के अनुसार, यदि सरकार इस अवधि में मांगें पूरी नहीं करती, तो पहले रूद्रपुर में बैठक होगी और तारीख तय की जाएगी। इसके बाद खटीमा से ट्रैक्टर मार्च निकाला जाएगा और देहरादून को घेरा जाएगा।

एक नेता ने कहा, 'जैसे पाँच साल पहले किसानों ने दिल्ली को घेरा था, उसी तरीके से देहरादून को घेरेंगे। मांग पूरी नहीं हुई तो अनिश्चितकाल तक धरना देंगे।' यह संदर्भ 2020-21 के किसान आंदोलन की याद दिलाता है, जब हजारों किसान महीनों तक दिल्ली की सीमाओं पर डटे रहे थे।

आगे की राह

सोमवार दोपहर 3 बजे कलेक्ट्रेट में होने वाली बैठक निर्णायक मानी जा रही है। इस बैठक में प्रशासन की ओर से आठ सूत्रीय मांगों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया और कार्यान्वयन की समय-सीमा स्पष्ट होने की उम्मीद है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में किसान संगठन अपनी माँगों को लेकर फिर से सक्रिय हो रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

समर्पण नहीं — और प्रशासन के 'आश्वासन' की राजनीति से परिचित कोई भी इसे समझ सकता है। सोमवार की बैठक में यदि ठोस समयबद्ध प्रतिबद्धता नहीं मिली, तो खटीमा से देहरादून तक ट्रैक्टर मार्च की धमकी महज़ बयानबाज़ी नहीं रहेगी। गौरतलब है कि 2020-21 का दिल्ली किसान आंदोलन भी इसी तरह के 'ज्ञापन और प्रतीक्षा' चक्र से शुरू होकर महीनों की घेराबंदी में बदला था। उत्तराखंड सरकार के पास अभी भी समय है, लेकिन नीतिगत फैसलों को जिला स्तर की बैठकों पर टालना उस घड़ी को तेज़ करता है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय किसान यूनियन टिकैत गुट का उत्तराखंड धरना क्यों स्थगित हुआ?
यूनियन ने तीन दिवसीय धरने के बाद प्रशासन को आठ सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंप दिया और सोमवार को जिलाधिकारी के साथ होने वाली बैठक का इंतज़ार करने का निर्णय लिया। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि ज्ञापन शासन को भेजा जा रहा है और जिला स्तर पर समाधान के प्रयास होंगे।
किसानों की आठ सूत्रीय मांगें क्या हैं?
स्रोत में मांगों का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है, लेकिन किसान नेताओं के अनुसार ये मांगें किसानों और गरीब तबके से जुड़े मुद्दों पर आधारित हैं। ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया है और सोमवार की बैठक में इन पर विस्तृत चर्चा होगी।
देहरादून कूच और ट्रैक्टर मार्च कब होगा?
यदि सरकार एक से डेढ़ महीने की समय-सीमा में मांगें पूरी नहीं करती, तो पहले रूद्रपुर में बैठक होगी और तारीख तय की जाएगी। इसके बाद खटीमा से ट्रैक्टर मार्च निकालकर देहरादून को घेरने की योजना है।
सोमवार की बैठक में क्या होगा?
सोमवार दोपहर 3 बजे कलेक्ट्रेट के सभागार में जिलाधिकारी और किसान कमेटी के बीच बैठक होगी। इसमें आठ सूत्रीय मांगों पर प्रशासन का आधिकारिक रुख और कार्यान्वयन की संभावित समय-सीमा स्पष्ट होने की उम्मीद है।
2020-21 के किसान आंदोलन से यह आंदोलन कैसे जुड़ा है?
किसान नेताओं ने स्वयं 2020-21 के दिल्ली किसान आंदोलन का संदर्भ दिया, जब किसानों ने दिल्ली को महीनों तक घेरे रखा था। उनका कहना है कि उसी रणनीति को अपनाते हुए इस बार देहरादून को घेरा जाएगा यदि मांगें नहीं मानी गईं।
राष्ट्र प्रेस
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