उत्तराखंड: भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) का छह जिलों में धरना खत्म, एक महीने में देहरादून घेराव की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) ने 23 अगस्त 2026 को उत्तराखंड के छह जिलों में चल रहे तीन दिवसीय कलेक्ट्रेट धरने को स्थगित कर दिया। किसान नेताओं ने प्रशासन को आठ सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा है और सोमवार को जिलाधिकारी के साथ होने वाली बैठक का इंतजार कर रहे हैं। नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समयसीमा में मांगें नहीं मानी गईं, तो खटीमा से ट्रैक्टर मार्च निकालकर देहरादून को घेरा जाएगा।
धरने का घटनाक्रम
किसान यूनियन का यह धरना उत्तराखंड के छह जिलों में एक साथ आयोजित किया गया था, जो तीन दिन तक चला। किसान नेताओं ने बताया कि उन्होंने अपनी आठ सूत्रीय मांगें जिला प्रशासन को सौंपी हैं। एक किसान नेता ने कहा, 'हमारे किसानों और गरीबों की जो आठ सूत्रीय मांगें थीं, वो डीएम को सौंपी हैं। हमारी मांगपत्र पर आगे सरकार काम करेगी।'
प्रशासन की प्रतिक्रिया
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि किसान यूनियन का ज्ञापन शासन को प्रेषित किया जा चुका है और सोमवार दोपहर 3 बजे कलेक्ट्रेट के सभागार में जिलाधिकारी किसान कमेटी के साथ बैठक करेंगे। अधिकारी ने आश्वासन दिया कि जिला स्तर पर जितनी समस्याओं का समाधान संभव है, उन पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। धरने के दौरान जिलाधिकारी के न आने पर उठे सवालों पर प्रशासन ने पारिवारिक कारणों का हवाला दिया।
देहरादून कूच की चेतावनी
किसान नेताओं ने साफ कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो रूद्रपुर में बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि आज से ठीक एक महीने बाद खटीमा से ट्रैक्टर मार्च निकाला जाएगा और देहरादून को घेरा जाएगा। किसान नेताओं ने इसकी तुलना पाँच साल पहले हुए दिल्ली किसान आंदोलन से करते हुए कहा, 'जैसे पाँच साल पहले किसानों ने दिल्ली को घेरा था, उसी तरीके से देहरादून को घेरेंगे।'
किसानों की प्रमुख माँगें
यूनियन ने प्रशासन को आठ सूत्रीय ज्ञापन सौंपा है, जिसमें किसानों और गरीबों से जुड़े नीतिगत मुद्दे शामिल हैं। किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि ये मांगें शासन स्तर पर निर्णय की माँग करती हैं और जिला प्रशासन ने माना कि इनमें से कई 'नीतिगत फैसले' हैं जिन पर ऊपरी स्तर पर विचार होगा।
आगे की राह
सोमवार की बैठक में यह स्पष्ट होगा कि प्रशासन किसानों की मांगों पर क्या समयसीमा देता है। यदि बैठक बेनतीजा रही तो रूद्रपुर में यूनियन की अगली बैठक में ट्रैक्टर मार्च की तारीख घोषित की जाएगी। यह आंदोलन उत्तराखंड में किसान असंतोष की बढ़ती आवाज़ का हिस्सा है, जो राज्य सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा बन सकता है।