24 अगस्त 2026
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उत्तराखंड: भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) का छह जिलों में धरना खत्म, एक महीने में देहरादून घेराव की चेतावनी

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उत्तराखंड: भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) का छह जिलों में धरना खत्म, एक महीने में देहरादून घेराव की चेतावनी

सारांश

उत्तराखंड में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) का छह जिलों में तीन दिवसीय धरना खत्म हुआ, लेकिन यह शांति अस्थायी है। आठ सूत्रीय मांगें न मानने पर एक महीने में खटीमा से ट्रैक्टर मार्च और देहरादून घेराव की चेतावनी — दिल्ली किसान आंदोलन की तर्ज़ पर।

मुख्य बातें

भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) ने 23 अगस्त 2026 को उत्तराखंड के छह जिलों में तीन दिवसीय कलेक्ट्रेट धरना स्थगित किया।
किसान नेताओं ने प्रशासन को आठ सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा; सोमवार दोपहर 3 बजे जिलाधिकारी के साथ बैठक निर्धारित।
मांगें न मानने पर एक महीने बाद खटीमा से ट्रैक्टर मार्च निकालकर देहरादून घेरने की चेतावनी।
किसान नेताओं ने तुलना पाँच साल पहले के दिल्ली किसान आंदोलन से की।
प्रशासन ने ज्ञापन शासन को भेजा; जिला स्तर पर संभव समाधान पर विचार का आश्वासन दिया।

भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) ने 23 अगस्त 2026 को उत्तराखंड के छह जिलों में चल रहे तीन दिवसीय कलेक्ट्रेट धरने को स्थगित कर दिया। किसान नेताओं ने प्रशासन को आठ सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा है और सोमवार को जिलाधिकारी के साथ होने वाली बैठक का इंतजार कर रहे हैं। नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समयसीमा में मांगें नहीं मानी गईं, तो खटीमा से ट्रैक्टर मार्च निकालकर देहरादून को घेरा जाएगा।

धरने का घटनाक्रम

किसान यूनियन का यह धरना उत्तराखंड के छह जिलों में एक साथ आयोजित किया गया था, जो तीन दिन तक चला। किसान नेताओं ने बताया कि उन्होंने अपनी आठ सूत्रीय मांगें जिला प्रशासन को सौंपी हैं। एक किसान नेता ने कहा, 'हमारे किसानों और गरीबों की जो आठ सूत्रीय मांगें थीं, वो डीएम को सौंपी हैं। हमारी मांगपत्र पर आगे सरकार काम करेगी।'

प्रशासन की प्रतिक्रिया

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि किसान यूनियन का ज्ञापन शासन को प्रेषित किया जा चुका है और सोमवार दोपहर 3 बजे कलेक्ट्रेट के सभागार में जिलाधिकारी किसान कमेटी के साथ बैठक करेंगे। अधिकारी ने आश्वासन दिया कि जिला स्तर पर जितनी समस्याओं का समाधान संभव है, उन पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। धरने के दौरान जिलाधिकारी के न आने पर उठे सवालों पर प्रशासन ने पारिवारिक कारणों का हवाला दिया।

देहरादून कूच की चेतावनी

किसान नेताओं ने साफ कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो रूद्रपुर में बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि आज से ठीक एक महीने बाद खटीमा से ट्रैक्टर मार्च निकाला जाएगा और देहरादून को घेरा जाएगा। किसान नेताओं ने इसकी तुलना पाँच साल पहले हुए दिल्ली किसान आंदोलन से करते हुए कहा, 'जैसे पाँच साल पहले किसानों ने दिल्ली को घेरा था, उसी तरीके से देहरादून को घेरेंगे।'

किसानों की प्रमुख माँगें

यूनियन ने प्रशासन को आठ सूत्रीय ज्ञापन सौंपा है, जिसमें किसानों और गरीबों से जुड़े नीतिगत मुद्दे शामिल हैं। किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि ये मांगें शासन स्तर पर निर्णय की माँग करती हैं और जिला प्रशासन ने माना कि इनमें से कई 'नीतिगत फैसले' हैं जिन पर ऊपरी स्तर पर विचार होगा।

आगे की राह

सोमवार की बैठक में यह स्पष्ट होगा कि प्रशासन किसानों की मांगों पर क्या समयसीमा देता है। यदि बैठक बेनतीजा रही तो रूद्रपुर में यूनियन की अगली बैठक में ट्रैक्टर मार्च की तारीख घोषित की जाएगी। यह आंदोलन उत्तराखंड में किसान असंतोष की बढ़ती आवाज़ का हिस्सा है, जो राज्य सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार सोमवार की बैठक के बाद ठोस कार्रवाई करेगी या महज़ आश्वासन देकर टालमटोल करेगी। आठ सूत्रीय मांगों में से अधिकांश 'नीतिगत फैसले' बताई जा रही हैं — यानी जिला प्रशासन की सीमा से परे — जो यह संकेत देता है कि राज्य सरकार को सीधे हस्तक्षेप करना होगा। दिल्ली किसान आंदोलन की याद दिलाता यह ट्रैक्टर मार्च का संदर्भ महज़ बयानबाज़ी नहीं है — यह उत्तराखंड में किसान असंतोष की उस गहरी परत को उजागर करता है जिसे चुनावी वादों के बावजूद अनदेखा किया जाता रहा है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तराखंड में भारतीय किसान यूनियन का धरना क्यों खत्म हुआ?
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) ने तीन दिन का पूर्व-निर्धारित धरना समाप्त कर प्रशासन को आठ सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। किसान नेताओं ने सोमवार को जिलाधिकारी के साथ बैठक के बाद आगे की रणनीति तय करने का फैसला किया।
किसान यूनियन की प्रमुख मांगें क्या हैं?
यूनियन ने आठ सूत्रीय ज्ञापन प्रशासन को सौंपा है जिसमें किसानों और गरीबों से जुड़े नीतिगत मुद्दे शामिल हैं। इनमें से अधिकांश मांगें शासन स्तर पर निर्णय की माँग करती हैं, जिन्हें प्रशासन ने ऊपरी स्तर पर भेजने का आश्वासन दिया है।
देहरादून घेराव की चेतावनी क्या है और कब होगा?
किसान नेताओं ने कहा कि यदि एक से डेढ़ महीने में मांगें नहीं मानी गईं तो खटीमा से ट्रैक्टर मार्च निकालकर देहरादून को घेरा जाएगा। इसकी तारीख रूद्रपुर में यूनियन की अगली बैठक में तय की जाएगी।
सोमवार की बैठक में क्या होगा?
सोमवार दोपहर 3 बजे कलेक्ट्रेट के सभागार में जिलाधिकारी और किसान कमेटी के बीच बैठक होगी। इसमें आठ सूत्रीय मांगों पर प्रशासन का रुख और समाधान की समयसीमा पर चर्चा होगी।
उत्तराखंड किसान आंदोलन की तुलना दिल्ली किसान आंदोलन से क्यों की जा रही है?
किसान नेताओं ने स्वयं कहा कि जैसे पाँच साल पहले किसानों ने दिल्ली को घेरा था, उसी तर्ज़ पर देहरादून को घेरा जाएगा। यह संदर्भ आंदोलन की गंभीरता और व्यापक लामबंदी की संभावना की ओर इशारा करता है।
राष्ट्र प्रेस
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