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पंजाब के गांवों में लगेंगी 3 लाख सोलर स्ट्रीटलाइट, ₹470 करोड़ की योजना को मंजूरी

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पंजाब के गांवों में लगेंगी 3 लाख सोलर स्ट्रीटलाइट, ₹470 करोड़ की योजना को मंजूरी

सारांश

पंजाब सरकार ₹470 करोड़ खर्च कर राज्य के हर गांव में 3 लाख सोलर एलईडी स्ट्रीटलाइट लगाएगी। 70:30 की नई फंडिंग व्यवस्था, 7 साल का रखरखाव और जियो-टैगिंग जैसी तकनीक के साथ यह योजना 1 करोड़ 73 लाख ग्रामीण निवासियों की सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा पहुंच को बदलने का दावा करती है।

मुख्य बातें

पंजाब सरकार ₹470 करोड़ की लागत से राज्य के 23 जिलों के गांवों में 3 लाख एलईडी सोलर स्ट्रीटलाइट लगाएगी।
परियोजना की लागत में 70% राज्य सरकार और 30% ग्राम पंचायतें वहन करेंगी — पहले का अनुपात उलटा था।
नोडल एजेंसी PEDA स्थापना और मरम्मत की निगरानी करेगी; रखरखाव अवधि 5 साल से बढ़ाकर 7 साल की गई।
हर लाइट की जियो-टैगिंग , QR कोड , IVRS शिकायत प्रणाली और रिमोट मॉनिटरिंग की व्यवस्था होगी; खराबी 72 घंटों में ठीक होगी।
पंजाब की 62.51% आबादी यानी लगभग 1 करोड़ 73 लाख लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं और इस योजना से सीधे लाभान्वित होंगे।

पंजाब सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री अमन अरोड़ा ने बुधवार, 12 अगस्त को चंडीगढ़ में घोषणा की कि राज्य के हर गांव में ₹470 करोड़ की लागत से 3 लाख एलईडी-आधारित सोलर स्ट्रीटलाइट स्थापित की जाएंगी। यह पहल मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में राज्य के 23 जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।

योजना का ढांचा और वित्तीय व्यवस्था

मंत्री अरोड़ा ने मीडिया को बताया कि इस परियोजना की कुल लागत का 70 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी, जबकि शेष 30 प्रतिशत संबंधित ग्राम पंचायतों द्वारा वहन किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पहले के 30:70 अनुपात से एक बड़ा बदलाव है, जिसमें पंचायतों पर अधिक आर्थिक बोझ पड़ता था। नई व्यवस्था सीमित संसाधनों वाली पंचायतों को भी इस कार्यक्रम में समान रूप से भाग लेने का अवसर देती है।

परियोजना को लागू करने की जिम्मेदारी पंजाब एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (PEDA) को सौंपी गई है, जो नई स्ट्रीटलाइट की स्थापना के साथ-साथ मौजूदा प्रणालियों की मरम्मत और नवीनीकरण की भी निगरानी करेगी।

रखरखाव और तकनीकी निगरानी

पंचायतों के फीडबैक के आधार पर मेंटेनेंस सपोर्ट की अवधि को पाँच साल से बढ़ाकर सात साल कर दिया गया है, ताकि दीर्घकालिक संचालन सुनिश्चित हो सके। पारदर्शिता के लिए हर स्ट्रीटलाइट की जियो-टैगिंग और यूनिक आईडी दी जाएगी। इसके अलावा QR कोड और IVRS-आधारित शिकायत निवारण प्रणाली तथा रिमोट मॉनिटरिंग सिस्टम से कामकाज पर नजर रखी जाएगी।

यह प्रणाली स्वचालित वार्षिक रखरखाव अनुबंध (AMC) अलर्ट भी भेजेगी, जिससे किसी भी खराबी को 72 घंटों के भीतर ठीक किया जा सके।

स्थान चयन में प्राथमिकता

स्ट्रीटलाइट लगाने के लिए सार्वजनिक स्थानों को प्राथमिकता दी जाएगी — जिनमें गांव की फिरनी, स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्र, सरकारी स्वास्थ्य केंद्र, धार्मिक स्थल और घनी आबादी वाले क्षेत्र शामिल हैं। अरोड़ा ने कहा कि इस दृष्टिकोण से यह सुनिश्चित होता है कि रोशनी का लाभ सबसे पहले समाज के कमजोर वर्गों तक पहुंचे।

आम जनता पर असर

पंजाब की कुल आबादी का 62.51 प्रतिशत, यानी लगभग 1 करोड़ 73 लाख लोग ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करते हैं। अंधेरी सड़कों पर दुर्घटनाओं और अपराध का जोखिम इन क्षेत्रों में लंबे समय से एक गंभीर समस्या रही है। यह योजना ऐसे समय में आई है जब राज्य सरकार ग्रामीण विद्युतीकरण और स्वच्छ ऊर्जा के मोर्चे पर अपनी उपस्थिति मजबूत करने में जुटी है।

आगे की राह

PEDA द्वारा परियोजना के क्रियान्वयन की समयसीमा और चरणबद्ध कार्यक्रम की जानकारी जल्द सार्वजनिक किए जाने की उम्मीद है। यह पहल पंजाब के ग्रामीण विकास और नवीकरणीय ऊर्जा एजेंडे को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर बिना स्वतंत्र ऑडिट के ये वादे खोखले साबित हो सकते हैं। जियो-टैगिंग और रिमोट मॉनिटरिंग जैसे तकनीकी उपाय तभी कारगर होंगे जब PEDA के पास पर्याप्त जनशक्ति और बजट हो — जो अभी स्पष्ट नहीं है।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब की सोलर स्ट्रीटलाइट योजना क्या है?
यह ₹470 करोड़ की परियोजना है जिसके तहत पंजाब के 23 जिलों के हर गांव में 3 लाख एलईडी-आधारित सोलर स्ट्रीटलाइट लगाई जाएंगी। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाना है।
इस योजना का खर्च कौन उठाएगा?
परियोजना की कुल लागत का 70 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी और 30 प्रतिशत ग्राम पंचायतें। यह पहले की व्यवस्था से उलट है, जिसमें पंचायतों पर 70% का बोझ था।
इस योजना को कौन लागू करेगा और रखरखाव कितने साल का होगा?
पंजाब एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (PEDA) नोडल एजेंसी के रूप में इसे लागू करेगी। रखरखाव की अवधि पहले की पाँच साल की तुलना में बढ़ाकर सात साल कर दी गई है, और किसी भी खराबी को 72 घंटों के भीतर ठीक करने की व्यवस्था होगी।
स्ट्रीटलाइट कहाँ-कहाँ लगाई जाएंगी?
गांव की फिरनी, स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्र, सरकारी स्वास्थ्य केंद्र, धार्मिक स्थल और घनी आबादी वाले इलाकों को प्राथमिकता दी जाएगी। उद्देश्य यह है कि रोशनी का लाभ सबसे कमजोर वर्गों तक पहले पहुंचे।
इस योजना से कितने लोग लाभान्वित होंगे?
पंजाब की 62.51 प्रतिशत आबादी, यानी लगभग 1 करोड़ 73 लाख लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं। ये सभी इस योजना के प्राथमिक लाभार्थी हैं, जो अंधेरी सड़कों से जुड़े दुर्घटना और अपराध के जोखिम को कम करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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