दिल्ली की 96,000 स्ट्रीट लाइटें होंगी स्मार्ट एलईडी में तब्दील, ₹473.24 करोड़ की योजना को मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में बुधवार, 20 मई 2026 को हुई व्यय वित्त समिति (EFC) की संयुक्त बैठक में राजधानी की लगभग 96,000 स्ट्रीट लाइटों को उन्नत स्मार्ट एलईडी प्रणाली से बदलने की महत्वाकांक्षी योजना को औपचारिक मंजूरी दे दी गई। ₹473.24 करोड़ की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना को लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा अनुरक्षित सड़कों पर चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। सरकार ने दिवाली 2026 से पहले यह परिवर्तन पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
मौजूदा ढाँचे की खामियाँ
वर्तमान में PWD की सड़कों पर लगभग 45,000 पुरानी हाई प्रेशर सोडियम वेपर (HPSV) लाइटें और लगभग 51,000 HPSV एलईडी लाइटें हैं — कुल मिलाकर 96,000 लाइटें और 51,160 खंभे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बैठक में स्पष्ट किया कि मौजूदा प्रणाली में रियल-टाइम मॉनिटरिंग का अभाव था, जिससे खराब लाइटों की पहचान अक्सर शिकायत मिलने के बाद ही हो पाती थी। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में अंधेरे स्थानों की लंबे समय तक मरम्मत नहीं होती थी, जिससे सड़क दृश्यता, सार्वजनिक सुरक्षा और विशेष रूप से महिलाओं की सुरक्षा प्रभावित होती थी। असमान प्रकाश गुणवत्ता, उच्च बिजली खपत और प्रकाश प्रदूषण जैसी समस्याएँ भी चिन्हित की गईं।
स्मार्ट एलईडी प्रणाली की प्रमुख विशेषताएँ
नई परियोजना के तहत सभी HPSV लाइटों और पुराने एलईडी उपकरणों को स्मार्ट एलईडी से बदला जाएगा। इसके अतिरिक्त, वर्तमान में रोशनी से वंचित क्षेत्रों को कवर करने के लिए 5,000 अतिरिक्त खंभे लगाने का भी प्रावधान है। परियोजना की सबसे अहम विशेषता एक केंद्रीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (CCC) होगी, जो प्रत्येक स्ट्रीट लाइट की वास्तविक समय में निगरानी करेगी। इस प्रणाली के ज़रिये खराबी का तुरंत पता लगाया जा सकेगा और लाइटों को दूर से संचालित किया जा सकेगा। आवश्यकतानुसार प्रकाश की तीव्रता को 90 प्रतिशत तक बढ़ाने या घटाने की सुविधा भी होगी।
वित्तीय बचत और दीर्घकालिक लाभ
मुख्यमंत्री ने बताया कि स्मार्ट एलईडी प्रणाली के पूरी तरह चालू होने के बाद सरकार को लगभग ₹25 करोड़ की वार्षिक बिजली बचत की उम्मीद है। पाँच वर्षों की अवधि में मौजूदा व्यवस्था की तुलना में बिजली व्यय में उल्लेखनीय कमी आने का अनुमान है। गौरतलब है कि यह परियोजना मुख्यमंत्री द्वारा 2026-27 के बजट में की गई घोषणा का हिस्सा है।
सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की योजना
बैठक में सार्वजनिक परिवहन विभाग के मंत्री परवेश साहिब सिंह सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। मंत्री परवेश साहिब सिंह ने परियोजना के महत्व को देखते हुए इसे एक विशेष नाम देने का सुझाव दिया, जिस पर मुख्यमंत्री ने सहमति जताई। रेखा गुप्ता ने दोहराया कि इस पहल से दिल्ली की सड़कों पर अंधेरे वाले क्षेत्र समाप्त होंगे, सड़क दुर्घटनाएँ कम होंगी और राजधानी को एक आधुनिक, सुरक्षित तथा ऊर्जा-कुशल प्रकाश व्यवस्था मिलेगी। दिवाली से पहले परियोजना पूर्ण करने की प्रतिबद्धता के साथ, अब सबकी नज़रें क्रियान्वयन की गति और गुणवत्ता पर टिकी होंगी।