यूपी में पंचायत चुनाव के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग गठित, न्यायमूर्ति राम अवतार सिंह बने अध्यक्ष
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार ने 20 मई 2026 को उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का औपचारिक गठन कर दिया। पंचायतीराज अनुभाग-3 द्वारा जारी अधिसूचना के तहत यह आयोग राज्य के ग्रामीण स्थानीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण से जुड़े मामलों का अध्ययन कर सरकार को सुझाव देगा। यह कदम प्रदेश में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच उठाया गया है।
आयोग की संरचना
राज्यपाल की मंजूरी के बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति राम अवतार सिंह को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। आयोग में चार सदस्य भी शामिल किए गए हैं — सेवानिवृत्त अपर जिला न्यायाधीश बृजेश कुमार, सेवानिवृत्त अपर जिला न्यायाधीश संतोष कुमार विश्वकर्मा, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया तथा सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी एस.पी. सिंह।
कार्यकाल और अधिकार
प्रमुख सचिव अनिल कुमार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति उनके पदभार ग्रहण की तिथि से छह माह के लिए प्रभावी रहेगी। आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के मानदेय, भत्ते एवं अन्य सुविधाओं के संबंध में अलग से आदेश जारी किए जाएंगे। यह अधिसूचना पंचायतीराज अनुभाग-3 की पूर्व अधिसूचना संख्या 1274/33-3-2026 दिनांक 18 मई 2026 के तहत किए गए प्रावधानों के क्रम में जारी की गई है।
आयोग का काम क्या होगा
आयोग पंचायतों में पिछड़ा वर्ग की सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी से जुड़े आंकड़ों एवं संवैधानिक प्रावधानों का परीक्षण करेगा। माना जा रहा है कि आयोग की सिफारिशों के आधार पर ही पंचायत चुनाव में OBC आरक्षण का अंतिम खाका तय किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर सरकार आयोग के कार्यकाल अथवा रिपोर्ट प्रस्तुत करने की समय सीमा में विस्तार भी कर सकेगी।
पंचायत चुनाव से जुड़ी पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व में स्पष्ट किया था कि पंचायत चुनावों में OBC आरक्षण लागू करने से पहले ट्रिपल टेस्ट — यानी समर्पित आयोग की रिपोर्ट, पिछड़ेपन का अनुभवजन्य डेटा और आरक्षण की 50% सीमा का पालन — अनिवार्य है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की तारीखें निर्धारित होने की प्रतीक्षा है और OBC आरक्षण का मुद्दा राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील बना हुआ है। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही चुनाव आयोग आरक्षण रोस्टर को अंतिम रूप दे सकेगा।