यूपी में पंचायत चुनाव के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग गठित, न्यायमूर्ति राम अवतार सिंह बने अध्यक्ष

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यूपी में पंचायत चुनाव के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग गठित, न्यायमूर्ति राम अवतार सिंह बने अध्यक्ष

सारांश

उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित पंचायत चुनाव से पहले सरकार ने OBC आरक्षण तय करने के लिए पाँच सदस्यीय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग गठित किया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति राम अवतार सिंह को अध्यक्ष बनाया गया है। आयोग की रिपोर्ट के बाद ही आरक्षण रोस्टर तय होगा।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश सरकार ने 20 मई 2026 को उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग गठित किया।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति राम अवतार सिंह आयोग के अध्यक्ष नियुक्त।
आयोग में 4 सदस्य — दो सेवानिवृत्त अपर जिला न्यायाधीश, एक सेवानिवृत्त आईएएस और एक सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी।
अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल पदभार ग्रहण की तिथि से 6 माह का होगा।
आयोग की सिफारिशों के आधार पर पंचायत चुनाव में OBC आरक्षण का अंतिम खाका तय होगा।
यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के ट्रिपल टेस्ट निर्देश के अनुपालन में उठाया गया है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने 20 मई 2026 को उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का औपचारिक गठन कर दिया। पंचायतीराज अनुभाग-3 द्वारा जारी अधिसूचना के तहत यह आयोग राज्य के ग्रामीण स्थानीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण से जुड़े मामलों का अध्ययन कर सरकार को सुझाव देगा। यह कदम प्रदेश में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच उठाया गया है।

आयोग की संरचना

राज्यपाल की मंजूरी के बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति राम अवतार सिंह को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। आयोग में चार सदस्य भी शामिल किए गए हैं — सेवानिवृत्त अपर जिला न्यायाधीश बृजेश कुमार, सेवानिवृत्त अपर जिला न्यायाधीश संतोष कुमार विश्वकर्मा, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया तथा सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी एस.पी. सिंह

कार्यकाल और अधिकार

प्रमुख सचिव अनिल कुमार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति उनके पदभार ग्रहण की तिथि से छह माह के लिए प्रभावी रहेगी। आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के मानदेय, भत्ते एवं अन्य सुविधाओं के संबंध में अलग से आदेश जारी किए जाएंगे। यह अधिसूचना पंचायतीराज अनुभाग-3 की पूर्व अधिसूचना संख्या 1274/33-3-2026 दिनांक 18 मई 2026 के तहत किए गए प्रावधानों के क्रम में जारी की गई है।

आयोग का काम क्या होगा

आयोग पंचायतों में पिछड़ा वर्ग की सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी से जुड़े आंकड़ों एवं संवैधानिक प्रावधानों का परीक्षण करेगा। माना जा रहा है कि आयोग की सिफारिशों के आधार पर ही पंचायत चुनाव में OBC आरक्षण का अंतिम खाका तय किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर सरकार आयोग के कार्यकाल अथवा रिपोर्ट प्रस्तुत करने की समय सीमा में विस्तार भी कर सकेगी।

पंचायत चुनाव से जुड़ी पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व में स्पष्ट किया था कि पंचायत चुनावों में OBC आरक्षण लागू करने से पहले ट्रिपल टेस्ट — यानी समर्पित आयोग की रिपोर्ट, पिछड़ेपन का अनुभवजन्य डेटा और आरक्षण की 50% सीमा का पालन — अनिवार्य है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की तारीखें निर्धारित होने की प्रतीक्षा है और OBC आरक्षण का मुद्दा राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील बना हुआ है। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही चुनाव आयोग आरक्षण रोस्टर को अंतिम रूप दे सकेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि छह माह के भीतर आयोग कितना विश्वसनीय अनुभवजन्य डेटा जुटा पाता है। अतीत में कई राज्यों में ऐसे आयोगों की रिपोर्टें न्यायिक समीक्षा में टिक नहीं पाईं, जिससे चुनाव प्रक्रिया लंबी खिंची। यूपी में पंचायत चुनाव की तारीखें अभी तय नहीं हैं, और OBC आरक्षण का मुद्दा सत्तारूढ़ दल के लिए राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है — ऐसे में आयोग की स्वतंत्रता और समयबद्धता दोनों पर नज़र रखना ज़रूरी होगा।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन क्यों किया गया है?
यह आयोग उत्तर प्रदेश के ग्रामीण स्थानीय निकायों में OBC आरक्षण निर्धारण के लिए गठित किया गया है। सर्वोच्च न्यायालय के ट्रिपल टेस्ट निर्देश के तहत पंचायत चुनाव में OBC आरक्षण लागू करने से पहले समर्पित आयोग की रिपोर्ट अनिवार्य है।
आयोग के अध्यक्ष और सदस्य कौन हैं?
आयोग के अध्यक्ष इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति राम अवतार सिंह हैं। सदस्यों में सेवानिवृत्त अपर जिला न्यायाधीश बृजेश कुमार, संतोष कुमार विश्वकर्मा, सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया और सेवानिवृत्त आईएफएस एस.पी. सिंह शामिल हैं।
आयोग का कार्यकाल कितने समय का है?
अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति उनके पदभार ग्रहण की तिथि से छह माह के लिए प्रभावी रहेगी। आवश्यकता पड़ने पर सरकार कार्यकाल या रिपोर्ट प्रस्तुत करने की समय सीमा बढ़ा भी सकती है।
इस आयोग का पंचायत चुनाव से क्या संबंध है?
आयोग की सिफारिशों के आधार पर ही पंचायत चुनाव में OBC आरक्षण का अंतिम रोस्टर तय किया जाएगा। जब तक आयोग रिपोर्ट नहीं सौंपता, चुनाव आयोग आरक्षण को अंतिम रूप नहीं दे सकता।
सर्वोच्च न्यायालय का ट्रिपल टेस्ट क्या है?
सर्वोच्च न्यायालय ने पंचायत चुनावों में OBC आरक्षण के लिए तीन शर्तें अनिवार्य की हैं — समर्पित आयोग द्वारा पिछड़ेपन का अनुभवजन्य अध्ययन, उस डेटा के आधार पर आरक्षण का निर्धारण, और कुल आरक्षण 50% की सीमा से अधिक न हो। इसी ट्रिपल टेस्ट के अनुपालन में यूपी ने यह आयोग गठित किया है।
राष्ट्र प्रेस
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