सुजॉय घोष: मीडिया कंपनी की बड़ी नौकरी छोड़ 'कहानी' से बने बॉलीवुड के सस्पेंस मास्टर
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड निर्देशक सुजॉय घोष उन विरले फिल्मकारों में शुमार हैं, जिन्होंने एक चमकदार कॉर्पोरेट करियर को ठुकराकर सिनेमा की राह चुनी — और इस फैसले ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को सस्पेंस-थ्रिलर की एक नई भाषा दी। 21 मई 1966 को कोलकाता में जन्मे घोष ने मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग और एमबीए की डिग्री हासिल की और एक प्रमुख मीडिया कंपनी में दक्षिण एशिया मीडिया विभाग के प्रमुख बने। 1999 में उन्होंने यह शानदार पद छोड़कर फिल्म निर्माण को अपना लिया।
लंदन से लेकर लाइमलाइट तक का सफर
करीब 13 साल की उम्र में सुजॉय घोष कोलकाता से लंदन चले गए, जहाँ उन्होंने अपनी आगे की पढ़ाई पूरी की। मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग और एमबीए की डिग्री लेने के बाद उन्होंने मीडिया क्षेत्र में प्रवेश किया और जल्द ही एक बड़े पद तक पहुँचे। लेकिन बचपन से पली-बढ़ी सिनेमा की चाहत ने उन्हें चैन से नहीं बैठने दिया। गौरतलब है कि जिस दौर में एक सुरक्षित और प्रतिष्ठित नौकरी छोड़ना बड़ा जोखिम माना जाता था, घोष ने अपने सपनों को तरजीह दी।
पहली फिल्म से अलग पहचान
2003 में सुजॉय घोष ने बतौर निर्देशक फिल्म 'झंकार बीट्स' से बॉलीवुड में दस्तक दी। यह फिल्म दिग्गज संगीतकार आरडी बर्मन को श्रद्धांजलि के रूप में बनाई गई थी। बॉक्स ऑफिस पर भले ही यह फिल्म बड़ी हिट नहीं बनी, लेकिन इसने घोष को एक संवेदनशील और अलग नज़रिये वाले फिल्मकार के रूप में स्थापित किया। इसके बाद 'होम डिलीवरी' और 'अलादीन' जैसी फिल्मों का निर्देशन किया, जो व्यावसायिक रूप से अपेक्षित सफलता नहीं पा सकीं।
'कहानी' — वह मोड़ जिसने सब बदल दिया
2012 में आई 'कहानी' सुजॉय घोष के करियर की निर्णायक फिल्म साबित हुई। विद्या बालन अभिनीत इस सस्पेंस-थ्रिलर में कोलकाता की गलियों में एक गर्भवती महिला की तलाश की कहानी थी, जिसने दर्शकों को अंत तक बाँधे रखा। फिल्म को आलोचकों और दर्शकों दोनों की भरपूर सराहना मिली और इसे राष्ट्रीय पुरस्कार सहित कई बड़े सम्मान प्राप्त हुए। यह ऐसे समय में आई जब बॉलीवुड में महिला-केंद्रित थ्रिलर फिल्में बेहद कम बनती थीं।
थ्रिलर की विरासत: 'बदला' से 'जाने जां' तक
'कहानी' की सफलता के बाद सुजॉय घोष ने 'कहानी 2', 'बदला', 'टाइपराइटर' और 'जाने जां' जैसी फिल्मों और वेब सीरीज़ पर काम किया। अमिताभ बच्चन और तापसी पन्नू अभिनीत 'बदला' ने भी दर्शकों के बीच गहरी छाप छोड़ी। उनकी शॉर्ट फिल्म 'अहल्या' ने ऑनलाइन खूब चर्चा बटोरी और उनकी कहानी कहने की क्षमता को एक नए मंच पर साबित किया।
निर्देशन से परे: लेखन, अभिनय और KKR का नारा
बहुत कम लोग जानते हैं कि सुजॉय घोष ने आईपीएल टीम कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) का मशहूर नारा 'कोरबो लोरबो जीतबो रे' भी लिखा था। निर्देशन के अलावा उन्होंने लेखन और अभिनय में भी अपना हुनर आज़माया है और बंगाली फिल्मों में अभिनय भी किया है। आज सुजॉय घोष फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हैं और नई कहानियों पर काम जारी है।