नितिन नवीन के बयान पर सियासी घमासान: भाजपा ने साधा निशाना, सपा बोली — अखिलेश की लोकप्रियता से घबराई सरकार
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर की गई टिप्पणी के बाद 7 नवंबर 2026 को देशभर में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। BJP के कई वरिष्ठ नेताओं ने नवीन का बचाव करते हुए सपा और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) पर परिवारवाद, तुष्टिकरण और माफिया संरक्षण के आरोप लगाए, जबकि विपक्षी दलों ने पलटवार करते हुए इसे 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव की बढ़ती लोकप्रियता से घबराहट का संकेत बताया।
भाजपा नेताओं का समर्थन और विपक्ष पर हमला
मुंबई में शिवसेना नेता शाइना एनसी ने विपक्षी दलों पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेताओं को भगवान राम याद नहीं आते, लेकिन वे अयोध्या पर टिप्पणियाँ ज़रूर करते हैं। शाइना एनसी ने सवाल किया कि क्या अखिलेश यादव ने कभी कहा कि वे अयोध्या जाकर सभी के साथ दिवाली मनाएंगे? उनका कहना था कि केवल वोट बैंक की राजनीति करने वालों को आगामी चुनावों में जनता उचित जवाब देगी।
अयोध्या में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने नवीन के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि पूरी दुनिया जानती है कि अखिलेश यादव गुंडों और माफिया को संरक्षण देते हैं। दिल्ली में भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव और राहुल गांधी की राजनीति अपने परिवार से आगे नहीं जाती। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अखिलेश यादव शुरुआती दिनों में सनातन की बात करते हैं, लेकिन लोगों को उनकी असलियत पता है।
माफिया संबंध और परिवारवाद पर भाजपा के आरोप
लखनऊ में मंत्री संजय निषाद ने नवीन के बयान का समर्थन करते हुए परिवारवाद पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि यदि परिवारवाद को बढ़ावा न दिया जाता तो स्वतंत्रता संग्राम में अपना जीवन बलिदान करने वाले परिवारों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं रहना पड़ता। उत्तर प्रदेश के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा पर माफिया संबंध का आरोप लगाते हुए दावा किया कि अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी जैसे माफिया सपा के साथ रहे हैं और नेताओं के साथ उनके मंचों पर दिखते थे।
सिद्धार्थनगर से भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि सपा में अखिलेश यादव, धर्मेंद्र यादव और रामगोपाल यादव तथा कांग्रेस में राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा गांधी और सोनिया गांधी के नाम ही सामने आते हैं। इसके विपरीत, उन्होंने दावा किया कि भाजपा में एक सामान्य कार्यकर्ता भी देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुँच सकता है।
सपा और कांग्रेस का पलटवार
अयोध्या में सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने भाजपा के हमलों को अखिलेश यादव की बढ़ती लोकप्रियता और जनता के बीच उनके प्रति बढ़ते स्नेह से उपजी परेशानी का नतीजा बताया। उन्होंने दावा किया कि इन हथकंडों का 2027 के विधानसभा चुनाव पर कोई असर नहीं पड़ेगा। लखनऊ में कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि देश के स्वतंत्रता आंदोलन, लोकतंत्र और संविधान की रक्षा में गांधी परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि इस परिवार ने देश की एकता के लिए कभी किसी के सामने घुटने नहीं टेके।
बेंगलुरु में कांग्रेस एमएलसी रमेश बाबू ने कहा कि नितिन नवीन अपने ही विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हार चुके हैं और इसी निराशा में राहुल गांधी के बारे में बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश के लोग एसआईआर के मुद्दे पर राहुल गांधी द्वारा शुरू किए गए आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं और कांग्रेस लगभग 14 करोड़ से अधिक वोटों को सुरक्षित रखने की लड़ाई लड़ रही है।
दिल्ली में कांग्रेस का तीखा प्रतिवाद
दिल्ली में कांग्रेस नेता उदित राज ने भाजपा पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी काम करना और विकास सुनिश्चित करना है, न कि सड़कों पर पदयात्राएँ, प्रदर्शन और रैलियाँ करना। उनके अनुसार, प्रदर्शन और आंदोलन विपक्ष की जिम्मेदारी होती है, लेकिन सत्ताधारी दल ही इस तरह के कार्यक्रम कर रहा है।
मुंबई में भाजपा विधायक आर. तमिल सेल्वन ने नवीन का बचाव करते हुए कांग्रेस पर विदेशी फंडिंग पर निर्भर होने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि भाजपा देश के 22 राज्यों में सत्ता में है, जबकि कांग्रेस केवल 6 राज्यों में है और वे राज्य भी जल्द हाथ से निकल जाएंगे।
आगे क्या: 2027 चुनाव से पहले बढ़ेगी तल्खी
यह बयानबाजी ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ तेज हो रही हैं। गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच परिवारवाद और माफिया संरक्षण के आरोपों पर इस तरह की जुबानी जंग छिड़ी हो। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले महीनों में यह तल्खी और बढ़ने की संभावना है।