30 सितंबर 2026
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दिल्ली विश्वविद्यालय के हजारों छात्र महिला सुरक्षा के लिए सड़कों पर, कालकाजी गैंगरेप के बाद आंदोलन तेज

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दिल्ली विश्वविद्यालय के हजारों छात्र महिला सुरक्षा के लिए सड़कों पर, कालकाजी गैंगरेप के बाद आंदोलन तेज

सारांश

कालकाजी में 17 वर्षीय लड़की के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय का गुस्सा सड़कों पर आ गया। मिरांडा हाउस से गार्गी तक के छात्र एकजुट हुए और नॉर्थ कैंपस में हजारों का मार्च निकला — यह सवाल सिर्फ एक घटना का नहीं, बल्कि उस पूरे ढाँचे का है जो महिलाओं को सुरक्षा की जगह पाबंदी देता है।

मुख्य बातें

दिल्ली विश्वविद्यालय के हजारों छात्रों ने 28-30 सितंबर 2026 के बीच महिला सुरक्षा को लेकर नॉर्थ कैंपस में बड़ा मार्च निकाला।
कालकाजी के आस्था कुंज पार्क के पास 17 वर्षीय लड़की के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म के बाद आंदोलन और तेज हुआ।
मिरांडा हाउस , लेडी श्रीराम कॉलेज , गार्गी कॉलेज , कमला नेहरू कॉलेज और श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज के छात्र प्रदर्शन में शामिल हुए।
छात्रों की माँग — सरकार दुष्कर्म की घटनाओं की जिम्मेदारी ले, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और महिलाओं की सार्वजनिक आवाजाही सुनिश्चित की जाए।
हाल के वर्षों में DU में महिला सुरक्षा पर यह सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक बताया जा रहा है।

दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के हजारों छात्र 30 सितंबर 2026 को महिला सुरक्षा की माँग को लेकर सड़कों पर उतर आए। कालकाजी के आस्था कुंज पार्क के पास 17 वर्षीय एक नाबालिग लड़की के साथ हुए कथित सामूहिक दुष्कर्म के बाद यह आंदोलन और तेज हो गया है। छात्र पोस्टर और तख्तियाँ लेकर जवाबदेही की माँग कर रहे हैं और सरकार से ठोस कदम उठाने का आग्रह कर रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

28 सितंबर को सैकड़ों छात्र फैकल्टी ऑफ आर्ट्स में एकत्रित हुए, जिसके बाद हजारों की संख्या में छात्रों ने नॉर्थ कैंपस में मार्च निकाला। हाल के वर्षों में दिल्ली विश्वविद्यालय में महिला सुरक्षा के मुद्दे पर यह सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक बताया जा रहा है।

शुरुआत में यह प्रदर्शन महिला कॉलेजों तक सीमित था, लेकिन बहुत तेजी से यह पूरे विश्वविद्यालय परिसर में फैल गया। श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज फॉर विमेन, मिरांडा हाउस, लेडी श्रीराम कॉलेज (LSR), कमला नेहरू कॉलेज और गार्गी कॉलेज के छात्र बड़ी संख्या में इसमें शामिल हुए।

कालकाजी घटना: आंदोलन की चिंगारी

यह विरोध-प्रदर्शन इसी महीने कालकाजी के आस्था कुंज पार्क के पास एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ हुए कथित सामूहिक दुष्कर्म के बाद और अधिक तीव्र हो गया। इस घटना ने राष्ट्रीय राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर छात्रों की पुरानी चिंताओं और नाराज़गी को फिर से हवा दे दी।

गौरतलब है कि दिल्ली में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों को लेकर यह कोई पहली बड़ी प्रतिक्रिया नहीं है। 2012 के निर्भया कांड के बाद भी इसी तरह का जनाक्रोश देखा गया था। आलोचकों का कहना है कि उस दौर में किए गए कानूनी बदलावों के बावजूद ज़मीनी हालात नहीं बदले।

छात्रों की आवाज़

प्रदर्शनकारियों ने अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए हास्य, व्यंग्य और रचनात्मक नारों का सहारा लिया। 'पितृसत्ता को खत्म करो' जैसे सीधे संदेशों के साथ-साथ 'एक कचौरी, दो समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा' जैसे व्यंग्यात्मक नारे भी चर्चा में रहे।

एक छात्रा ने कहा, 'हम चाहते हैं कि सरकार दुष्कर्म की सभी घटनाओं की जिम्मेदारी ले। हम बाहर क्यों नहीं जा सकते? सुरक्षित तरीके से बाहर घूमना हमारा अधिकार है और हम इसी अधिकार की माँग करने यहाँ आए हैं।'

एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा, 'हम अपनी सुरक्षा के लिए सड़कों पर उतरे हैं। अगर यहाँ लड़कियाँ सुरक्षित होतीं, तो कालकाजी में सामूहिक दुष्कर्म की घटना नहीं होती। हम कब तक घर के अंदर रहेंगे? हमें अपने घरों तक ही सीमित क्यों रहना चाहिए?'

एक अन्य छात्रा ने आरोप लगाया, 'सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। हम आज़ादी से चलना-फिरना चाहते हैं। हम दुष्कर्म के आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई चाहते हैं।'

आम जनता पर असर

यह आंदोलन केवल परिसर तक सीमित नहीं रहा — इसने दिल्ली में महिलाओं की सार्वजनिक स्थानों पर आवाजाही की स्वतंत्रता के व्यापक सवाल को केंद्र में ला दिया है। छात्रों का तर्क है कि महिलाओं पर पाबंदियाँ लगाना समस्या का समाधान नहीं, बल्कि यह अपराधियों को अप्रत्यक्ष संरक्षण देना है।

यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आँकड़ों के अनुसार दिल्ली लगातार महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में देश के प्रमुख महानगरों में शीर्ष पर बनी हुई है।

क्या होगा आगे

प्रदर्शनकारी छात्रों ने संकेत दिया है कि जब तक सरकार की ओर से ठोस आश्वासन नहीं मिलता, यह आंदोलन जारी रहेगा। उनकी माँगों में यौन हिंसा के दोषियों के विरुद्ध त्वरित और सख्त कार्रवाई, सार्वजनिक स्थानों पर बेहतर सुरक्षा व्यवस्था और महिलाओं की आवाजाही पर लगाई जाने वाली अनौपचारिक पाबंदियों का अंत शामिल है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वादे, और फिर यथास्थिति। 2012 के बाद कानून सख्त हुए, लेकिन NCRB के आँकड़े बताते हैं कि दिल्ली में महिलाओं के विरुद्ध अपराध थमे नहीं। असली सवाल यह है कि क्या सरकार इस बार केवल बयानबाजी से आगे जाएगी — त्वरित अदालतों की क्षमता बढ़ाने, सार्वजनिक स्थानों पर वास्तविक निगरानी और पुलिस संवेदनशीलता जैसे ढाँचागत सुधारों पर। जब तक जवाबदेही का तंत्र नहीं बनता, ये प्रदर्शन इतिहास की उसी लंबी सूची में जुड़ते रहेंगे जिसने नीति की सूई नहीं हिलाई।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली विश्वविद्यालय में महिला सुरक्षा को लेकर प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं?
कालकाजी के आस्था कुंज पार्क के पास एक 17 वर्षीय लड़की के साथ हुए कथित सामूहिक दुष्कर्म के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने विरोध-प्रदर्शन तेज कर दिया। छात्र सरकार से जवाबदेही, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और महिलाओं की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की माँग कर रहे हैं।
DU के किन कॉलेजों के छात्र इस प्रदर्शन में शामिल हैं?
मिरांडा हाउस, लेडी श्रीराम कॉलेज (LSR), गार्गी कॉलेज, कमला नेहरू कॉलेज और श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज फॉर विमेन के छात्र बड़ी संख्या में इस आंदोलन में शामिल हुए हैं। 28 सितंबर को फैकल्टी ऑफ आर्ट्स में जमा होने के बाद हजारों छात्रों ने नॉर्थ कैंपस में मार्च निकाला।
कालकाजी सामूहिक दुष्कर्म की घटना क्या है?
कथित तौर पर इसी महीने कालकाजी के आस्था कुंज पार्क के पास एक 17 वर्षीय लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना हुई। इस घटना ने दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर छात्रों की पुरानी नाराज़गी को फिर से सतह पर ला दिया और विश्वविद्यालय परिसर में व्यापक विरोध की चिंगारी भड़काई।
छात्रों की मुख्य माँगें क्या हैं?
प्रदर्शनकारी छात्र सरकार से यौन हिंसा की सभी घटनाओं की जिम्मेदारी लेने, दोषियों के खिलाफ त्वरित और सख्त कार्रवाई करने और महिलाओं पर लगाई जाने वाली अनौपचारिक पाबंदियों को खत्म करने की माँग कर रहे हैं। वे सार्वजनिक स्थानों पर बिना डर के आने-जाने के अधिकार को मौलिक अधिकार बताते हैं।
DU में महिला सुरक्षा पर इससे पहले भी बड़े प्रदर्शन हुए हैं?
हाँ, दिल्ली विश्वविद्यालय में महिला सुरक्षा के मुद्दे पर पहले भी विरोध-प्रदर्शन होते रहे हैं, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार हाल के वर्षों में यह सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक है। 2012 के निर्भया कांड के बाद भी इसी तरह का जनाक्रोश देखा गया था, जिसके बाद कानूनों में बदलाव किए गए थे।
राष्ट्र प्रेस
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