स्लीपर बस गैंगरेप के विरोध में DU छात्राओं का आधी रात मार्च, SFI ने जारी किया 'छात्रा घोषणापत्र'
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की सैकड़ों छात्राओं ने 2 सितंबर 2026 की आधी रात 'रीक्लेम द नाइट' मार्च निकाला — यह प्रदर्शन उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में एक चलती स्लीपर बस में 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ कथित गैंगरेप की घटना के विरोध में था। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के नेतृत्व में आयोजित इस मार्च में DU के अलग-अलग कॉलेजों की छात्राएं शामिल हुईं और महिलाओं के सार्वजनिक स्थानों पर निर्भय विचरण के अधिकार की माँग की।
मार्च का स्वरूप और उद्देश्य
SFI की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, छात्राओं ने आधी रात सड़कों पर उतरकर यह संदेश दिया कि महिलाओं को किसी भी समय सार्वजनिक स्थानों पर स्वतंत्र रूप से रहने का अधिकार है। प्रदर्शनकारियों ने मैनपुरी की पीड़िता के साथ हुई कथित घटना के विरुद्ध अपना आक्रोश व्यक्त किया और माँग की कि विश्वविद्यालय व सरकार महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें — न कि उनकी आज़ादी पर पाबंदी लगाएं।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में महिला सुरक्षा को लेकर बहस तेज़ है और छात्र संगठन विश्वविद्यालय प्रशासन पर जवाबदेही का दबाव बना रहे हैं।
SFI का 'छात्रा घोषणापत्र'
मार्च के दौरान SFI ने दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) चुनावों के मद्देनज़र एक विशेष 'छात्रा घोषणापत्र' जारी किया। इस घोषणापत्र में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और प्रतिनिधित्व को DUSU चुनाव-चर्चाओं का केंद्रीय मुद्दा बनाने की माँग की गई।
घोषणापत्र की प्रमुख माँगों में शामिल हैं — DUSU चुनावों में सभी महिला कॉलेजों को मतदान का अधिकार, और DUSU पदाधिकारी पदों पर महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण।
सुरक्षा और कल्याण की माँगें
घोषणापत्र में भेदभावपूर्ण कर्फ्यू से मुक्त सुरक्षित और किफायती महिला छात्रावास, छात्राओं के प्रतिनिधित्व वाली सक्रिय आंतरिक शिकायत समिति (ICC), और कैंपस परिसर में महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती सहित मज़बूत आपातकालीन सहायता की माँग की गई। इसके अतिरिक्त आसानी से उपलब्ध मासिक धर्म स्वच्छता सुविधाएं और मॉरल पुलिसिंग व लैंगिक उत्पीड़न को समाप्त करने की भी माँग रखी गई।
शैक्षणिक और संस्थागत सुधारों की अपील
घोषणापत्र में महिला छात्राओं के ड्रॉपआउट को रोकने के उपाय, छात्रवृत्ति और फेलोशिप तक बेहतर पहुँच, लैंगिक-न्यायपूर्ण पाठ्यक्रम और DU परिसर में नियमित स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट की माँग भी शामिल है।
SFI का स्पष्ट कहना है कि 'महिलाओं की सुरक्षा उनकी आज़ादी की कीमत पर नहीं हो सकती' — विश्वविद्यालय और सरकार की ज़िम्मेदारी है कि महिलाएं बिना भय के पढ़ सकें, यात्रा कर सकें और सार्वजनिक स्थानों पर विचरण कर सकें।
गौरतलब है कि यह मार्च निर्भया काण्ड (2012) के बाद से महिला सुरक्षा को लेकर दिल्ली में आयोजित उन प्रदर्शनों की श्रृंखला में एक और कड़ी है, जो हर बड़ी घटना के बाद सड़कों पर उतर आती है। आने वाले DUSU चुनावों में यह घोषणापत्र छात्र राजनीति के एजेंडे को किस हद तक प्रभावित करता है, यह देखने वाली बात होगी।