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जेएनयू में अभाविप ने वामपंथी दलों और 'महिला विरोधी इंडी गठबंधन' का पुतला जलाया

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जेएनयू में अभाविप ने वामपंथी दलों और 'महिला विरोधी इंडी गठबंधन' का पुतला जलाया

सारांश

अभाविप ने जेएनयू परिसर में वामपंथी दलों और 'महिला विरोधी इंडी गठबंधन' के खिलाफ प्रदर्शन किया, जिसमें पुतला दहन किया गया। यह प्रदर्शन महिला आरक्षण विधेयक में रुकावट और महिलाओं के प्रति संकीर्ण मानसिकता के विरोध में था।

मुख्य बातें

महिला अधिकारों का समर्थन करना आवश्यक है।
वामपंथी दलों की राजनीति पर सवाल उठाना चाहिए।
इंडी गठबंधन की दोहरी राजनीति का विरोध आवश्यक है।
महिलाओं की आवाज को दबाना गलत है।
जेएनयू में महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम उठाना आवश्यक है।

नई दिल्ली, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की जेएनयू इकाई ने रविवार को जेएनयू परिसर के साबरमती ढाबा पर वामपंथी दलों और 'महिला विरोधी इंडी गठबंधन' के खिलाफ एक विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया।

महिला आरक्षण विधेयक में रुकावट डालने और महिलाओं के प्रति संकीर्ण सोच के विरोध में, विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने विपक्ष का पुतला दहन किया।

इस अवसर पर छात्रों ने वामपंथी संगठनों और कांग्रेस की 'महिला विरोधी' राजनीति का कड़ा विरोध किया और उनके पाखंड को बेनकाब किया। कांग्रेस, वामपंथी दलों और उनके छात्र संगठनों का इतिहास महिलाओं के अधिकारों को कुचलने और उनके नाम पर सिर्फ राजनीतिक लाभ उठाने का रहा है। इन दलों ने हमेशा प्रगतिशील होने का ढोंग किया है, लेकिन जब भी महिलाओं को वास्तविक शक्ति देने का अवसर आया, इन समूहों ने अपनी पितृसत्तात्मक सोच के कारण उसे बाधित किया।

छात्रों ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि इंडी गठबंधन की दोहरी राजनीति अब और नहीं चलेगी। वामपंथी विचारधारा वाले संगठन जेएनयू परिसर में महिलाओं के मुद्दों का उपयोग केवल शैक्षणिक अशांति फैलाने के लिए करते हैं, जबकि उनके संगठनों में महिलाओं की आवाज को हमेशा दबाया जाता है। यह स्पष्ट है कि महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाले पदों पर अभी भी केवल पुरुषों का वर्चस्व है।

अभाविप ने कहा कि इंडी गठबंधन में शामिल दल महिलाओं को केवल एक 'वोट बैंक' की तरह इस्तेमाल करते रहे हैं और उनकी नीतियों में छुपा यह विरोधाभास अब बेनकाब हो चुका है।

अभाविप जेएनयू के अध्यक्ष मयंक पांचाल ने कहा कि वामपंथी दलों और कांग्रेस ने वर्षों से महिलाओं के अधिकारों के विमर्श को बंधक बनाए रखा है। इंडी गठबंधन की यह सोची-समझी साजिश थी कि महिलाओं को मुख्यधारा की राजनीति में नहीं आने दिया जाए। इन दलों की 'महिला विरोधी' सोच के कारण ही महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण सुधारों में देरी हुई, जिसे महिला शक्ति ने सड़क पर उतरकर पूरी तरह नकार दिया है।

अभाविप जेएनयू के मंत्री प्रवीण कुमार पीयूष ने कहा कि साबरमती ढाबा पर यह प्रदर्शन इंडी गठबंधन और वामपंथी दलों के असली चेहरे को उजागर करने के लिए था। ये दल महिला सशक्तिकरण के नाम पर केवल झूठ और भ्रम फैलाते रहे हैं, जबकि वास्तव में इनका तंत्र महिलाओं की प्रगति को रोकने का कार्य करता है। जेएनयू इस महिला विरोधी सिंडिकेट को कभी स्वीकार नहीं करेगा और महिलाओं की गरिमा तथा उनके वास्तविक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो महिलाओं के अधिकारों के लिए गंभीर सवाल उठाती है। यह प्रदर्शन केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभाविप का क्या उद्देश्य है?
अभाविप का उद्देश्य छात्र राजनीति में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना और वामपंथी दलों की राजनीति का विरोध करना है।
इस प्रदर्शन में क्या हुआ?
प्रदर्शन के दौरान अभाविप कार्यकर्ताओं ने वामपंथी दलों और इंडी गठबंधन का पुतला जलाया और महिलाओं के अधिकारों के लिए आवाज उठाई।
महिला आरक्षण विधेयक में रुकावट का क्या कारण है?
अभाविप का कहना है कि वामपंथी दलों की संकीर्ण सोच और पितृसत्तात्मक प्रवृत्तियां महिला आरक्षण विधेयक में रुकावट का कारण बन रही हैं।
इस प्रदर्शन का संदेश क्या था?
प्रदर्शन का मुख्य संदेश था कि महिला सशक्तिकरण के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं और दोहरी राजनीति का अंत किया जाए।
जेएनयू में महिलाओं की स्थिति क्या है?
जेएनयू में महिलाओं की स्थिति में सुधार की आवश्यकता है, क्योंकि महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाले पदों पर अभी भी पुरुषों का वर्चस्व है।
राष्ट्र प्रेस
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