महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष का विरोध, अन्नपूर्णा देवी की चेतावनी — भुगतना होगा खामियाजा
सारांश
Key Takeaways
- केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने विपक्ष को चेताया कि महिला आरक्षण बिल रोकने का खामियाजा आगामी चुनावों में भुगतना होगा।
- संसद के विशेष सत्र में इंडिया ब्लॉक के विरोध के चलते महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका।
- झारखंड और बेंगलुरु में भाजपा महिला मोर्चा की हजारों कार्यकर्ताओं ने विपक्ष के खिलाफ सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराया।
- केंद्रीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि परिसीमन विधेयक से तमिलनाडु की सीटें 39 से 59 और कर्नाटक की सीटें 28 से 42 हो सकती थीं।
- देश में 47 करोड़ से अधिक महिला मतदाता हैं, जो इस मुद्दे को आगामी चुनावों में निर्णायक बना सकती हैं।
- भाजपा ने इंडिया ब्लॉक के खिलाफ देशव्यापी विरोध अभियान जारी रखने की घोषणा की है।
नई दिल्ली, 25 अप्रैल: संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के पारित न हो पाने के बाद पूरे देश में महिलाओं में गहरा आक्रोश उभर आया है। केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने विपक्षी दलों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि इस विश्वासघात की कीमत उन्हें आगामी चुनावों में चुकानी पड़ेगी। भाजपा की महिला विंग ने झारखंड और बेंगलुरु समेत देश के कई हिस्सों में सड़कों पर उतरकर इंडिया ब्लॉक के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है।
महिलाओं की उम्मीदों पर विपक्ष ने फेरा पानी
केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि महिलाओं को आरक्षण दिलाने के लिए ही संसद का यह विशेष सत्र बुलाया गया था। करोड़ों बहनें और बेटियां लोकसभा की कार्यवाही इस उम्मीद से देख रही थीं कि आज उन्हें उनका संवैधानिक हक मिलेगा और वर्ष 2029 के चुनावों में वे लोकसभा व विधानसभाओं में अपना प्रतिनिधित्व सुनिश्चित कर सकेंगी।
उन्होंने कहा कि महिलाएं नीति-निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की आस लगाए बैठी थीं, लेकिन इंडी गठबंधन ने उनकी उम्मीदों को चकनाचूर कर दिया और उनका घोर अपमान किया। अन्नपूर्णा देवी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "आने वाले समय में विपक्षी दलों को इसका खामियाजा भुगतना होगा।"
झारखंड की नारी शक्ति सड़कों पर उतरी
झारखंड में भाजपा महिला मोर्चा की हजारों कार्यकर्ताओं ने शनिवार को विपक्षी दलों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। भाजपा का आरोप है कि इंडी गठबंधन ने जानबूझकर बहनों और बेटियों की आवाज को दबाने का प्रयास किया है। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने नारे लगाते हुए विपक्ष के इस रवैये को लोकतंत्र के लिए काला दिन बताया।
बेंगलुरु में भी उठी विरोध की लहर
बेंगलुरु में भी महिलाओं ने इंडिया ब्लॉक के विरुद्ध सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। केंद्रीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक के माध्यम से महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व और अवसर मिल सकते थे, लेकिन इंडिया ब्लॉक ने उन्हें हाशिए पर धकेलने का काम किया है।
शोभा करंदलाजे ने परिसीमन विधेयक का हवाला देते हुए बताया कि इसमें संसदीय सीटों में 50 प्रतिशत की वृद्धि का प्रस्ताव है, जिससे दक्षिण भारत को विशेष लाभ मिलता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि तमिलनाडु की मौजूदा 39 सीटें बढ़कर 59 और कर्नाटक की 28 सीटें बढ़कर 42 हो सकती थीं।
राजनीतिक विश्लेषण: महिला वोट बैंक पर असर
गौरतलब है कि महिला आरक्षण विधेयक का मुद्दा दशकों से भारतीय राजनीति में लंबित रहा है। 1996 से लेकर अब तक इस विधेयक को कई बार संसद में पेश किया गया, लेकिन हर बार राजनीतिक सहमति न बन पाने के कारण यह अटकता रहा। 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित होने के बाद यह उम्मीद जगी थी कि इसका क्रियान्वयन शीघ्र होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुद्दे पर भाजपा की आक्रामक राजनीति 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद भी जारी है और अब इसे 2025-2026 के राज्य चुनावों में महिला मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए प्रमुख हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। देश में महिला मतदाताओं की संख्या 47 करोड़ से अधिक है, जो किसी भी दल की चुनावी किस्मत बदलने में सक्षम है।
आने वाले दिनों में भाजपा महिला मोर्चा देशव्यापी प्रदर्शनों की योजना बना रही है और यह मुद्दा संसद के अगले सत्र में भी गरमाए रहने की पूरी संभावना है।