नेपाल बाढ़ राहत: भारत का पाँचवाँ विमान रवाना, 11 सदस्यीय बचाव दल और 5.5 टन दवाइयाँ भेजीं
सारांश
मुख्य बातें
भारत ने नेपाल बाढ़ राहत अभियान के तहत बुधवार, 2 सितंबर को अपना पाँचवाँ राहत विमान रवाना किया, जिसमें 11 सदस्यीय विशेष बचाव दल, अत्याधुनिक बचाव उपकरण और 5.5 टन आवश्यक दवाइयाँ शामिल हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इसकी जानकारी दी। 26 अगस्त को तिब्बत में ग्लेशियर टूटने के बाद नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ में अब तक 1,003 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
राहत अभियान का विस्तार
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'नेपाल के लिए भारत का पाँचवाँ विमान रवाना हो गया है। इसमें 11 सदस्यीय बचाव दल, विशेष उपकरण और 5.5 टन जरूरी दवाइयाँ भेजी जा रही हैं।' इस पाँचवें विमान के साथ भारत अब तक नेपाल को 68 टन से अधिक राहत सामग्री भेज चुका है।
भेजी गई सामग्री में कंबल, स्लीपिंग बैग, मजबूत तिरपाल, प्लास्टिक शीट, हाइजीन किट, खाद्य पैकेट, सोलर लैंप, जल-शुद्धिकरण गोलियाँ और पोर्टेबल जनरेटर शामिल हैं। यह सहायता नेपाल सरकार के अनुरोध पर भेजी जा रही है।
मृतकों की संख्या और लापता लोग
नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के अनुसार, अब तक 1,003 शव बरामद किए जा चुके हैं। सर्वाधिक 321 शव चितवन जिले में मिले हैं, जबकि नवलपरासी पूर्व जिले में 216 शव बरामद हुए हैं। नेपाल पुलिस के अनुसार, 4,606 लोग अभी भी लापता हैं, जिनमें 583 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं — जिससे मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका है।
गौरतलब है कि रसुवा और नुवाकोट जिलों में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्र की जलविद्युत परियोजनाओं में फँसे लोगों की तलाश अभी भी जारी है।
भारत-चीन का संयुक्त तकनीकी सहयोग
नेपाल सरकार के अनुरोध पर भारत और चीन दोनों ने जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फँसे लोगों की खोज एवं बचाव के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की टीमें भेजी हैं। यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल की अपनी आपदा प्रबंधन क्षमता इस असाधारण पैमाने की त्रासदी के सामने सीमित पड़ रही है।
डीएनए पहचान अभियान
भारत की 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम नेपाली विशेषज्ञों के साथ मिलकर डीएनए नमूनों की जाँच शुरू कर चुकी है। इसका उद्देश्य बाढ़ में जान गँवाने वाले लोगों की पहचान करना है, ताकि प्रभावित परिवारों को सटीक जानकारी मिल सके और आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएँ पूरी की जा सकें।
आगे की स्थिति
नदी किनारों पर लगातार शव मिलने की रिपोर्टों के बीच मृतकों का आँकड़ा बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि 4,606 लापता लोगों में से बड़ी संख्या में बाढ़ की चपेट में आए लोग हो सकते हैं। भारत का यह बहु-आयामी राहत अभियान — बचाव, चिकित्सा, फोरेंसिक और तकनीकी सहयोग — इस क्षेत्र में भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति की व्यावहारिक अभिव्यक्ति है।