27 अगस्त 2026
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नेपाल-तिब्बत बाढ़: कैलाश यात्रा के 80 ईशा फाउंडेशन तीर्थयात्री लापता, सद्गुरु ने माँगी घटनास्थल तक पहुँचने की अनुमति

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नेपाल-तिब्बत बाढ़: कैलाश यात्रा के 80 ईशा फाउंडेशन तीर्थयात्री लापता, सद्गुरु ने माँगी घटनास्थल तक पहुँचने की अनुमति

सारांश

कैलाश मानसरोवर से लौट रहे ईशा फाउंडेशन के 80 तीर्थयात्री नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई अचानक बाढ़ में लापता हो गए। 9:05 बजे 'सब ठीक है' का संदेश आया — और 9 मिनट बाद संपर्क टूट गया। सद्गुरु खुद घटनास्थल पहुँचने की कोशिश में हैं; क्षेत्र में 160 से अधिक मौतों की पुष्टि।

मुख्य बातें

ईशा फाउंडेशन के कैलाश मानसरोवर यात्रा दल के 80 सदस्य — 77 तीर्थयात्री और 3 स्वयंसेवक — 27 अगस्त को आई फ्लैश फ्लड में लापता हैं।
दल में 34 पुरुष और 46 महिलाएँ शामिल थीं, जो 16 से अधिक देशों से थे — सबसे अधिक 22 अमेरिका से।
समूह नेता का अंतिम संदेश सुबह 9:05 बजे आया; 9:14 बजे आपदा आई और संपर्क पूरी तरह टूट गया।
सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने भारतीय, चीनी और अमेरिकी दूतावासों से घटनास्थल तक पहुँचने की अनुमति माँगी है।
नेपाल और तिब्बत में मिलाकर 160 से अधिक मौतों की पुष्टि; सैकड़ों अभी भी लापता।
वैज्ञानिक संकेत बताते हैं कि आपदा ग्लेशियर या बर्फ-चट्टान खिसकने से उत्पन्न हुई, न कि भूकंप से।

तिब्बत और नेपाल की सीमा पर 27 अगस्त 2026 को आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें ईशा फाउंडेशन के कैलाश मानसरोवर यात्रा दल के 80 सदस्य — जिनमें 77 तीर्थयात्री और 3 स्वयंसेवक शामिल हैं — लापता बताए जा रहे हैं। फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने स्थिति को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि तबाही का सही पैमाना अभी सामने आना बाकी है।

आपदा का घटनाक्रम

बुधवार सुबह 9:05 बजे समूह के नेता ने संदेश भेजकर पुष्टि की थी कि दल इमिग्रेशन सेंटर पहुँच चुका है और सब कुछ सामान्य है। महज 9 मिनट बाद — 9:14 बजे — अचानक फ्लैश फ्लड ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया और उसके बाद से समूह के किसी भी सदस्य से संपर्क नहीं हो सका। सद्गुरु ने बताया कि नेपाल के सभी फोन नंबर भी निष्क्रिय हैं, जिससे परिजनों और संगठन की चिंता और बढ़ गई है।

लापता समूह की राष्ट्रीयता

सद्गुरु के अनुसार, लापता 80 सदस्यों में 34 पुरुष और 46 महिलाएँ थीं। इनमें सबसे अधिक 22 अमेरिका से थे, इसके बाद 12 कनाडा, 11 ऑस्ट्रेलिया, 9 यूनाइटेड किंगडम, 4 जर्मनी, 3 फ्रांस, 3 नेपाल, 2 नीदरलैंड, 2 न्यूजीलैंड, 2 सिंगापुर और 2 स्पेन से थे। फिनलैंड, हंगरी, इज़राइल, लिथुआनिया, फिलीपींस, पुर्तगाल, रूस और दक्षिण अफ्रीका से एक-एक व्यक्ति भी इस दल में शामिल था।

बचाव में बाधाएँ

सद्गुरु ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर वीडियो पोस्ट कर बताया कि वह स्वयं घटनास्थल तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सभी दूरसंचार सेवाएँ ठप हैं और रास्ते बाधित हैं। वह भारतीय, चीनी और अमेरिकी दूतावासों के माध्यम से प्रभावित क्षेत्र तक पहुँचने की अनुमति लेने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि दल के साथ स्वयंसेवकों के अलावा एक डॉक्टर और कई नेपाली गाइड भी थे, जिनके परिवार भी इसी प्रभावित इलाके में रहते हैं।

आपदा की प्रकृति

शुरुआती रिपोर्टों में बाढ़ से पहले भूकंप की बात कही गई थी, लेकिन बाद के वैज्ञानिक विश्लेषण के संकेत बताते हैं कि यह आपदा हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर या बर्फ-चट्टान के बड़े हिस्से के खिसकने से उत्पन्न हुई। इससे नदी में अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा आया, जिसने इमारतों, पुलों, सड़कों और बस्तियों को बहा दिया। गौरतलब है कि हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर झील विस्फोट बाढ़ (GLOF) की घटनाएँ पिछले एक दशक में उल्लेखनीय रूप से बढ़ी हैं।

व्यापक असर और आगे की स्थिति

अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में मिलाकर 160 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और सैकड़ों अब भी लापता हैं। राहत एवं बचाव दल के लिए टूटी सड़कों और उफनती नदियों के कारण प्रभावित इलाकों तक पहुँचना अत्यंत कठिन बना हुआ है। सद्गुरु ने कहा कि संबंधित देशों के दूतावासों को सूचित कर दिया गया है और प्रभावित परिवारों तक संपर्क की कोशिश जारी है। जैसे-जैसे संचार बहाल होगा, लापता लोगों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि हिमालयी तीर्थयात्राओं में बढ़ते जलवायु जोखिम की चेतावनी है — जिसे नीति-निर्माता बार-बार नज़रअंदाज़ करते रहे हैं। 16 देशों के नागरिकों का एक ही दल में होना यह भी दर्शाता है कि कैलाश यात्रा अब वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन बन चुकी है, जिसके लिए बहुपक्षीय आपातकालीन प्रोटोकॉल की सख्त ज़रूरत है। भारत, चीन और नेपाल के बीच वास्तविक समय की आपदा-समन्वय प्रणाली की अनुपस्थिति — जो इस घटना में स्पष्ट हुई — एक गंभीर प्रशासनिक खामी है। जब तक इस मार्ग पर यात्राओं के लिए GLOF पूर्व-चेतावनी तंत्र और त्वरित निकासी योजना अनिवार्य नहीं होती, ऐसी त्रासदियाँ दोहराई जाती रहेंगी।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईशा फाउंडेशन के कितने सदस्य नेपाल बाढ़ में लापता हैं?
सद्गुरु जग्गी वासुदेव के अनुसार, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए उनके दल के 80 सदस्य — जिनमें 77 तीर्थयात्री और 3 स्वयंसेवक शामिल हैं — 27 अगस्त को आई फ्लैश फ्लड के बाद से लापता हैं। दल में 34 पुरुष और 46 महिलाएँ थीं, जो 16 से अधिक देशों से थे।
नेपाल-तिब्बत सीमा पर बाढ़ कैसे आई?
शुरुआती रिपोर्टों में भूकंप की आशंका जताई गई थी, लेकिन बाद के वैज्ञानिक विश्लेषण के संकेत बताते हैं कि यह आपदा हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर या बर्फ-चट्टान के बड़े हिस्से के खिसकने से उत्पन्न हुई। इससे नदी में अचानक भारी पानी और मलबा आया, जिसने फ्लैश फ्लड का रूप लिया।
सद्गुरु घटनास्थल तक क्यों नहीं पहुँच पा रहे?
सद्गुरु ने बताया कि बाढ़ के कारण सभी दूरसंचार सेवाएँ ठप हैं और रास्ते बाधित हैं। वह भारतीय, चीनी और अमेरिकी दूतावासों के माध्यम से प्रभावित क्षेत्र तक पहुँचने की अनुमति लेने की कोशिश कर रहे हैं।
नेपाल और तिब्बत में कुल कितनी मौतें हुई हैं?
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में मिलाकर 160 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और सैकड़ों अभी भी लापता हैं। राहत दल के लिए टूटी सड़कों के कारण पहुँचना कठिन बना हुआ है।
लापता तीर्थयात्रियों के परिजनों को कैसे सूचित किया जा रहा है?
सद्गुरु ने बताया कि संबंधित देशों के दूतावासों को घटना की जानकारी दी गई है और प्रभावित परिवारों तक संपर्क साधने की कोशिश जारी है। हालाँकि दूरसंचार सेवाएँ बाधित होने के कारण यह प्रक्रिया अत्यंत कठिन बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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