नेपाल-तिब्बत बाढ़: कैलाश यात्रा के 80 ईशा फाउंडेशन तीर्थयात्री लापता, सद्गुरु ने माँगी घटनास्थल तक पहुँचने की अनुमति
सारांश
मुख्य बातें
तिब्बत और नेपाल की सीमा पर 27 अगस्त 2026 को आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें ईशा फाउंडेशन के कैलाश मानसरोवर यात्रा दल के 80 सदस्य — जिनमें 77 तीर्थयात्री और 3 स्वयंसेवक शामिल हैं — लापता बताए जा रहे हैं। फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने स्थिति को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि तबाही का सही पैमाना अभी सामने आना बाकी है।
आपदा का घटनाक्रम
बुधवार सुबह 9:05 बजे समूह के नेता ने संदेश भेजकर पुष्टि की थी कि दल इमिग्रेशन सेंटर पहुँच चुका है और सब कुछ सामान्य है। महज 9 मिनट बाद — 9:14 बजे — अचानक फ्लैश फ्लड ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया और उसके बाद से समूह के किसी भी सदस्य से संपर्क नहीं हो सका। सद्गुरु ने बताया कि नेपाल के सभी फोन नंबर भी निष्क्रिय हैं, जिससे परिजनों और संगठन की चिंता और बढ़ गई है।
लापता समूह की राष्ट्रीयता
सद्गुरु के अनुसार, लापता 80 सदस्यों में 34 पुरुष और 46 महिलाएँ थीं। इनमें सबसे अधिक 22 अमेरिका से थे, इसके बाद 12 कनाडा, 11 ऑस्ट्रेलिया, 9 यूनाइटेड किंगडम, 4 जर्मनी, 3 फ्रांस, 3 नेपाल, 2 नीदरलैंड, 2 न्यूजीलैंड, 2 सिंगापुर और 2 स्पेन से थे। फिनलैंड, हंगरी, इज़राइल, लिथुआनिया, फिलीपींस, पुर्तगाल, रूस और दक्षिण अफ्रीका से एक-एक व्यक्ति भी इस दल में शामिल था।
बचाव में बाधाएँ
सद्गुरु ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर वीडियो पोस्ट कर बताया कि वह स्वयं घटनास्थल तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सभी दूरसंचार सेवाएँ ठप हैं और रास्ते बाधित हैं। वह भारतीय, चीनी और अमेरिकी दूतावासों के माध्यम से प्रभावित क्षेत्र तक पहुँचने की अनुमति लेने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि दल के साथ स्वयंसेवकों के अलावा एक डॉक्टर और कई नेपाली गाइड भी थे, जिनके परिवार भी इसी प्रभावित इलाके में रहते हैं।
आपदा की प्रकृति
शुरुआती रिपोर्टों में बाढ़ से पहले भूकंप की बात कही गई थी, लेकिन बाद के वैज्ञानिक विश्लेषण के संकेत बताते हैं कि यह आपदा हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर या बर्फ-चट्टान के बड़े हिस्से के खिसकने से उत्पन्न हुई। इससे नदी में अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा आया, जिसने इमारतों, पुलों, सड़कों और बस्तियों को बहा दिया। गौरतलब है कि हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर झील विस्फोट बाढ़ (GLOF) की घटनाएँ पिछले एक दशक में उल्लेखनीय रूप से बढ़ी हैं।
व्यापक असर और आगे की स्थिति
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में मिलाकर 160 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और सैकड़ों अब भी लापता हैं। राहत एवं बचाव दल के लिए टूटी सड़कों और उफनती नदियों के कारण प्रभावित इलाकों तक पहुँचना अत्यंत कठिन बना हुआ है। सद्गुरु ने कहा कि संबंधित देशों के दूतावासों को सूचित कर दिया गया है और प्रभावित परिवारों तक संपर्क की कोशिश जारी है। जैसे-जैसे संचार बहाल होगा, लापता लोगों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।