दिल्ली विश्वविद्यालय के हजारों छात्र सड़कों पर, कालकाजी सामूहिक दुष्कर्म के बाद महिला सुरक्षा पर सरकार से जवाब माँगा
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के हजारों छात्र 30 सितंबर को महिला सुरक्षा की माँग को लेकर सड़कों पर उतर आए — यह आंदोलन कालकाजी के आस्था कुंज पार्क के निकट एक 17 वर्षीया लड़की के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद और तीव्र हो गया है। प्रदर्शनकारी छात्राओं ने सरकार से सीधी जवाबदेही की माँग करते हुए कहा कि महिलाओं को बिना डर के सार्वजनिक स्थानों पर आने-जाने का अधिकार मिलना चाहिए।
मुख्य घटनाक्रम
28 सितंबर को फैकल्टी ऑफ आर्ट्स में सैकड़ों छात्रों के जमावड़े से शुरू हुआ यह प्रदर्शन बहुत जल्द हजारों की संख्या में बदल गया, जब छात्रों ने नॉर्थ कैंपस में मार्च निकाला। हाल के वर्षों में दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में महिला सुरक्षा के मुद्दे पर यह सबसे बड़े छात्र-प्रदर्शनों में से एक माना जा रहा है।
शुरुआत में श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज फॉर विमेन, मिरांडा हाउस, लेडी श्रीराम कॉलेज (LSR), कमला नेहरू कॉलेज और गार्गी कॉलेज में अलग-अलग विरोध हुए, जो बाद में एकजुट होकर विश्वविद्यालय स्तर के आंदोलन में परिवर्तित हो गए।
कालकाजी घटना: प्रदर्शन की तात्कालिक वजह
यह विरोध-प्रदर्शन इसी महीने कालकाजी के आस्था कुंज पार्क के पास 17 वर्षीया एक नाबालिग लड़की के साथ हुए कथित सामूहिक दुष्कर्म के बाद तेज हुआ। इस घटना ने राष्ट्रीय राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर छात्रों की पुरानी नाराजगी को फिर से उभार दिया और सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की स्वतंत्र आवाजाही के अधिकार पर बहस को नई धार दी।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों को लेकर पहले से ही सामाजिक चिंता बनी हुई है। आलोचकों का कहना है कि बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएँ प्रशासनिक विफलता की ओर संकेत करती हैं।
छात्राओं की आवाज़: सीधे शब्दों में माँग
एक प्रदर्शनकारी छात्रा ने कहा, 'हम चाहते हैं कि सरकार दुष्कर्म की सभी घटनाओं की जिम्मेदारी ले। हम बाहर क्यों नहीं जा सकते? सुरक्षित तरीके से बाहर घूमना हमारा अधिकार है और हम इसी अधिकार की माँग करने यहाँ आए हैं।'
एक अन्य प्रदर्शनकारी ने सवाल उठाया, 'अगर यहाँ लड़कियाँ सुरक्षित होतीं, तो कालकाजी में सामूहिक दुष्कर्म की घटना नहीं होती। हम कब तक घर के अंदर रहेंगे? हमें अपने घरों तक ही सीमित क्यों रहना चाहिए?' एक तीसरी छात्रा ने आरोप लगाया कि 'सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है' और यौन हिंसा के आरोपियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की माँग की।
नारों और पोस्टरों में व्यंग्य और सीधा संदेश
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने हास्य, व्यंग्य और दिल्ली की रोज़मर्रा की भाषा का सहारा लेकर अपनी बात कही। एक नारा — '1 कचौरी, 2 समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा' — खासा चर्चित रहा। पोस्टरों पर 'पितृसत्ता को खत्म करो' जैसे सीधे और तीखे संदेश भी नजर आए, जो महिलाओं पर थोपी जाने वाली पाबंदियों के विरोध को रेखांकित करते हैं।
आगे की राह
छात्रों का यह आंदोलन अभी जारी है और प्रदर्शनकारियों ने संकेत दिए हैं कि जब तक सरकार की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए जाते, विरोध-प्रदर्शन थमेगा नहीं। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार इस बढ़ते दबाव पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं और कालकाजी मामले में जाँच की गति क्या रहती है।