12 अगस्त 2026
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एआईएडीएमके विधायकों के इस्तीफे: मद्रास हाई कोर्ट में व्हिप की दलील, स्पीकर को जांच करनी थी

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एआईएडीएमके विधायकों के इस्तीफे: मद्रास हाई कोर्ट में व्हिप की दलील, स्पीकर को जांच करनी थी

सारांश

तमिलनाडु में दल-बदल की राजनीति अब अदालत की दहलीज़ पर है। एआईएडीएमके व्हिप का तर्क है कि इस्तीफे के 30 मिनट के भीतर टीवीके में शामिल होना यह साबित करता है कि स्पीकर को जांच करनी थी। 17 अगस्त की सुनवाई का फैसला भविष्य के दल-बदल मामलों के लिए नज़ीर बन सकता है।

मुख्य बातें

एआईएडीएमके व्हिप एग्री कृष्णमूर्ति ने मद्रास हाई कोर्ट में स्पीकर के इस्तीफा-स्वीकृति आदेश को चुनौती दी।
6 विधायकों ने 13 मई के विश्वास मत में पार्टी व्हिप तोड़ा और इस्तीफे के 30 मिनट के भीतर टीवीके में शामिल हो गए।
वकील गिरी ने तर्क दिया कि दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता कार्यवाही लंबित रहते स्पीकर को इस्तीफे स्वीकार नहीं करने चाहिए थे।
स्पीकर अदालत में उपस्थित नहीं हुए; विधानसभा सचिव के हलफनामे को व्यक्तिगत जवाब नहीं माना जा सकता — याचिकाकर्ता का तर्क।
अगली सुनवाई 17 अगस्त को मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी.
अरुलमुर्गन की खंडपीठ के समक्ष।

अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के व्हिप एग्री कृष्णमूर्ति ने मद्रास हाई कोर्ट में 12 अगस्त को दलील दी कि विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को एआईएडीएमके विधायकों के इस्तीफे स्वीकार करने से पहले यह जांचना अनिवार्य था कि वे स्वेच्छा से पद छोड़ रहे हैं या नहीं। यह मामला उन छह विधायकों से जुड़ा है, जिन्होंने 13 मई को हुए विश्वास मत में पार्टी व्हिप का उल्लंघन कर सत्ताधारी सरकार के पक्ष में मतदान किया था।

मुख्य घटनाक्रम

एआईएडीएमके के व्हिप एग्री कृष्णमूर्ति और अन्य याचिकाकर्ताओं ने स्पीकर के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता की कार्यवाही लंबित रहने के बावजूद इन विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए। इन याचिकाओं पर मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुलमुर्गन की खंडपीठ के समक्ष अंतिम सुनवाई हुई।

वकील की मुख्य दलीलें

एग्री कृष्णमूर्ति की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गिरी ने अदालत को बताया कि प्रश्नाधीन छह विधायकों ने अपने विधायक पद से इस्तीफा देने के महज 30 मिनट के भीतर ही तमिलनाडु वेट्री कड़गम (टीवीके) की सदस्यता ग्रहण कर ली। वकील ने तर्क दिया कि यह परिस्थिति स्वयं इस बात का संकेत थी कि इस्तीफे स्वेच्छा से दिए गए थे या नहीं — इसकी जांच स्पीकर की संवैधानिक जिम्मेदारी थी।

वकील गिरी ने यह भी रेखांकित किया कि विधानसभा सचिव द्वारा दाखिल जवाबी हलफनामे में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि स्पीकर ने ऐसी कोई जांच की थी या नहीं। उन्होंने कहा कि स्पीकर को इस्तीफे स्वीकार करने से पूर्व यह सुनिश्चित करना था।

स्पीकर की कानूनी स्थिति पर सवाल

याचिकाकर्ता के वकील ने यह भी तर्क दिया कि राज्यपाल के विपरीत, विधानसभा अध्यक्ष को कोई कानूनी संरक्षण (immunity) प्राप्त नहीं है। इसलिए विधानसभा सचिव द्वारा दाखिल जवाब को स्पीकर का व्यक्तिगत जवाब नहीं माना जाना चाहिए। चूंकि याचिका में सीधे स्पीकर पर आरोप लगाए गए हैं, इसलिए स्पीकर को स्वयं अदालत में उपस्थित होकर जवाब देना चाहिए था — जो उन्होंने नहीं किया।

सुनवाई आगे बढ़ी

चूंकि एग्री कृष्णमूर्ति की ओर से दलीलें अभी पूरी नहीं हुई थीं, इसलिए खंडपीठ ने अगली सुनवाई 17 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी। यह मामला तमिलनाडु की राजनीति में दल-बदल और विधायकों की निष्ठा के व्यापक प्रश्नों से जुड़ा हुआ है।

क्या होगा आगे

गौरतलब है कि यह मामला केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं है — यह उस संवैधानिक प्रश्न को उठाता है कि क्या स्पीकर दल-बदल की कार्यवाही के दौरान इस्तीफे स्वीकार कर सकते हैं। अदालत का निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण नज़ीर बन सकता है। 17 अगस्त की सुनवाई में एग्री कृष्णमूर्ति की शेष दलीलें पूरी होने के बाद प्रतिपक्ष की बारी आएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके केंद्र में एक गहरा संवैधानिक प्रश्न है — क्या स्पीकर दल-बदल की अयोग्यता कार्यवाही को इस्तीफे के जरिए निष्प्रभावी होने दे सकते हैं? इस्तीफे के 30 मिनट के भीतर प्रतिद्वंद्वी दल में शामिल होना स्वेच्छा की परिभाषा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि अदालत याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला देती है, तो यह देशभर के स्पीकरों के लिए एक बाध्यकारी प्रक्रिया स्थापित कर सकता है — और दल-बदल को इस्तीफे की आड़ में छुपाने की रणनीति पर रोक लग सकती है।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एआईएडीएमके व्हिप ने मद्रास हाई कोर्ट में क्या दलील दी?
एआईएडीएमके व्हिप एग्री कृष्णमूर्ति ने दलील दी कि स्पीकर को विधायकों के इस्तीफे स्वीकार करने से पहले यह जांचना था कि वे स्वेच्छा से पद छोड़ रहे हैं या नहीं। उनके वकील ने तर्क दिया कि इस्तीफे के 30 मिनट के भीतर टीवीके में शामिल होना इस जांच की ज़रूरत को स्पष्ट करता है।
यह मामला किन विधायकों से जुड़ा है?
यह मामला एआईएडीएमके के उन 6 विधायकों से जुड़ा है, जिन्होंने 13 मई के विश्वास मत में पार्टी व्हिप का उल्लंघन कर सत्ताधारी सरकार के पक्ष में मतदान किया। इसके बाद उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया और तत्काल टीवीके में शामिल हो गए।
दल-बदल विरोधी कानून इस मामले में कैसे लागू होता है?
दल-बदल विरोधी कानून के तहत पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने पर अयोग्यता की कार्यवाही शुरू हो सकती है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह कार्यवाही लंबित रहते हुए स्पीकर को इस्तीफे स्वीकार नहीं करने चाहिए थे, क्योंकि इससे अयोग्यता की प्रक्रिया निष्प्रभावी हो जाती है।
स्पीकर की कानूनी स्थिति पर क्या सवाल उठाए गए?
याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि राज्यपाल के विपरीत स्पीकर को कोई कानूनी संरक्षण नहीं मिलता। इसलिए विधानसभा सचिव का हलफनामा स्पीकर का व्यक्तिगत जवाब नहीं माना जा सकता और स्पीकर को स्वयं अदालत में उपस्थित होना चाहिए था।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुलमुर्गन की खंडपीठ ने अगली सुनवाई 17 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी है। एग्री कृष्णमूर्ति की शेष दलीलें उस दिन पूरी होंगी।
राष्ट्र प्रेस
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