तमिलनाडु विधानसभा स्पीकर ने AIADMK के 4 पूर्व विधायकों को 4 अगस्त को तलब किया, दलबदल मामले में सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु विधानसभा के स्पीकर जेसीटी प्रभाकर ने अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के चार पूर्व विधायकों को 4 अगस्त को उनके समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया है। ये विधायक विधानसभा चुनाव जीतने के बाद AIADMK से इस्तीफा देकर तमिझगा वेत्री कषगम (TVK) में शामिल हो गए थे। संविधान की दसवीं अनुसूची — जिसे सामान्यतः दलबदल विरोधी कानून कहा जाता है — के तहत शुरू की गई अयोग्यता कार्यवाही में उनसे अतिरिक्त स्पष्टीकरण माँगा गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह कार्यवाही AIADMK के महासचिव एवं विपक्ष के नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी द्वारा दायर याचिका के आधार पर शुरू हुई। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन चारों विधायकों ने स्वेच्छा से उस राजनीतिक दल से नाता तोड़ लिया जिसके चुनाव चिह्न पर वे निर्वाचित हुए थे — और इस कारण संविधान की दसवीं अनुसूची के प्रावधानों के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द की जा सकती है।
गौरतलब है कि दलबदल विरोधी कानून के अंतर्गत यदि कोई विधायक स्वेच्छा से अपनी पार्टी की सदस्यता छोड़ता है, तो उसे सदन की सदस्यता से अयोग्य घोषित किया जा सकता है — यह प्रावधान 1985 में संविधान की 52वीं संशोधन के ज़रिए लाया गया था।
अब तक की सुनवाई का क्रम
शिकायत दर्ज होने के बाद स्पीकर प्रभाकर ने पहले इन चारों विधायकों को तलब किया था और उनसे लिखित स्पष्टीकरण माँगा था। विधायक उपस्थित हुए और अपना जवाब सौंपा। इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने 30 जुलाई को एक और सुनवाई निर्धारित की थी, जिसमें चारों विधायकों को पुनः पेश होने के लिए कहा गया था।
स्पीकर ने एडप्पादी पलानीस्वामी को भी उस सुनवाई में मौजूद रहने का निमंत्रण दिया था। हालाँकि, 30 जुलाई की सुनवाई टाल दी गई और अब यह मामला 4 अगस्त को सुना जाएगा।
AIADMK का पक्ष
AIADMK का कहना है कि चुनाव के बाद राजनीतिक निष्ठा बदलना दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता का आधार बनता है और पार्टी इस याचिका पर शीघ्र निर्णय की माँग कर रही है। AIADMK विधायक एग्री एस. कृष्णमूर्ति ने कहा कि एडप्पादी पलानीस्वामी स्पीकर के सामने व्यक्तिगत रूप से तभी पेश होंगे जब चारों विधायकों द्वारा सौंपे गए स्पष्टीकरण की समीक्षा पहले कर ली जाएगी।
आगे क्या होगा
4 अगस्त की सुनवाई में स्पीकर प्रभाकर चारों विधायकों का अतिरिक्त स्पष्टीकरण सुनेंगे और इसके आधार पर अयोग्यता कार्यवाही में आगे की दिशा तय करेंगे। यह मामला तमिलनाडु की राजनीति में महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका परिणाम विधानसभा में दलों के बीच शक्ति-संतुलन को प्रभावित कर सकता है।