30 जुलाई 2026
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तमिलनाडु विधानसभा स्पीकर ने AIADMK के 4 पूर्व विधायकों को 4 अगस्त को तलब किया, दलबदल मामले में सुनवाई

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तमिलनाडु विधानसभा स्पीकर ने AIADMK के 4 पूर्व विधायकों को 4 अगस्त को तलब किया, दलबदल मामले में सुनवाई

सारांश

तमिलनाडु विधानसभा में दलबदल का एक अहम मामला — AIADMK छोड़कर TVK में शामिल हुए चार पूर्व विधायकों को स्पीकर जेसीटी प्रभाकर ने 4 अगस्त को फिर तलब किया है। एडप्पादी पलानीस्वामी की याचिका पर चल रही यह कार्यवाही राज्य की राजनीतिक शक्ति-संरचना को प्रभावित कर सकती है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु विधानसभा स्पीकर जेसीटी प्रभाकर ने AIADMK के चार पूर्व विधायकों को 4 अगस्त को पुनः उपस्थित होने का निर्देश दिया।
चारों विधायकों ने चुनाव जीतने के बाद AIADMK छोड़कर TVK (तमिझगा वेत्री कषगम) की सदस्यता ली थी।
कार्यवाही AIADMK महासचिव एवं विपक्ष नेता एडप्पादी के.
पलानीस्वामी की याचिका पर आधारित है।
याचिका में संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत इन विधायकों की सदस्यता रद्द करने की माँग की गई है।
30 जुलाई की निर्धारित सुनवाई स्थगित कर 4 अगस्त को नई तारीख तय की गई है।
AIADMK विधायक एग्री एस.
कृष्णमूर्ति ने कहा कि पलानीस्वामी स्पष्टीकरण की समीक्षा के बाद ही स्वयं पेश होंगे।

तमिलनाडु विधानसभा के स्पीकर जेसीटी प्रभाकर ने अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के चार पूर्व विधायकों को 4 अगस्त को उनके समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया है। ये विधायक विधानसभा चुनाव जीतने के बाद AIADMK से इस्तीफा देकर तमिझगा वेत्री कषगम (TVK) में शामिल हो गए थे। संविधान की दसवीं अनुसूची — जिसे सामान्यतः दलबदल विरोधी कानून कहा जाता है — के तहत शुरू की गई अयोग्यता कार्यवाही में उनसे अतिरिक्त स्पष्टीकरण माँगा गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह कार्यवाही AIADMK के महासचिव एवं विपक्ष के नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी द्वारा दायर याचिका के आधार पर शुरू हुई। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन चारों विधायकों ने स्वेच्छा से उस राजनीतिक दल से नाता तोड़ लिया जिसके चुनाव चिह्न पर वे निर्वाचित हुए थे — और इस कारण संविधान की दसवीं अनुसूची के प्रावधानों के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द की जा सकती है।

गौरतलब है कि दलबदल विरोधी कानून के अंतर्गत यदि कोई विधायक स्वेच्छा से अपनी पार्टी की सदस्यता छोड़ता है, तो उसे सदन की सदस्यता से अयोग्य घोषित किया जा सकता है — यह प्रावधान 1985 में संविधान की 52वीं संशोधन के ज़रिए लाया गया था।

अब तक की सुनवाई का क्रम

शिकायत दर्ज होने के बाद स्पीकर प्रभाकर ने पहले इन चारों विधायकों को तलब किया था और उनसे लिखित स्पष्टीकरण माँगा था। विधायक उपस्थित हुए और अपना जवाब सौंपा। इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने 30 जुलाई को एक और सुनवाई निर्धारित की थी, जिसमें चारों विधायकों को पुनः पेश होने के लिए कहा गया था।

स्पीकर ने एडप्पादी पलानीस्वामी को भी उस सुनवाई में मौजूद रहने का निमंत्रण दिया था। हालाँकि, 30 जुलाई की सुनवाई टाल दी गई और अब यह मामला 4 अगस्त को सुना जाएगा।

AIADMK का पक्ष

AIADMK का कहना है कि चुनाव के बाद राजनीतिक निष्ठा बदलना दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता का आधार बनता है और पार्टी इस याचिका पर शीघ्र निर्णय की माँग कर रही है। AIADMK विधायक एग्री एस. कृष्णमूर्ति ने कहा कि एडप्पादी पलानीस्वामी स्पीकर के सामने व्यक्तिगत रूप से तभी पेश होंगे जब चारों विधायकों द्वारा सौंपे गए स्पष्टीकरण की समीक्षा पहले कर ली जाएगी।

आगे क्या होगा

4 अगस्त की सुनवाई में स्पीकर प्रभाकर चारों विधायकों का अतिरिक्त स्पष्टीकरण सुनेंगे और इसके आधार पर अयोग्यता कार्यवाही में आगे की दिशा तय करेंगे। यह मामला तमिलनाडु की राजनीति में महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका परिणाम विधानसभा में दलों के बीच शक्ति-संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन स्पीकर के फैसले अक्सर सत्तारूढ़ दल के हित में झुके होने के आरोप झेलते हैं — यह प्रवृत्ति राष्ट्रीय स्तर पर भी देखी गई है। तमिलनाडु में DMK सरकार के दौर में यह कार्यवाही किस गति और निष्पक्षता से आगे बढ़ती है, यह राज्य की संवैधानिक संस्थाओं की साख का भी सूचक होगा। AIADMK की TVK के प्रति बढ़ती चिंता इस याचिका के राजनीतिक संदर्भ को और स्पष्ट करती है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु के चार AIADMK पूर्व विधायकों के खिलाफ क्या कार्यवाही चल रही है?
इन चारों विधायकों के खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत अयोग्यता की कार्यवाही चल रही है। इन्होंने विधानसभा चुनाव जीतने के बाद AIADMK छोड़कर TVK की सदस्यता ली थी, जिसे पार्टी ने स्वैच्छिक दलबदल मानते हुए स्पीकर के समक्ष याचिका दायर की।
दलबदल विरोधी कानून क्या है और यह कब लागू होता है?
दलबदल विरोधी कानून संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत आता है, जिसे 1985 में 52वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया था। यदि कोई विधायक स्वेच्छा से अपनी पार्टी की सदस्यता छोड़ता है या पार्टी के निर्देश के विरुद्ध मतदान करता है, तो उसे सदन की सदस्यता से अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
4 अगस्त की सुनवाई में क्या होगा?
4 अगस्त को स्पीकर जेसीटी प्रभाकर चारों पूर्व विधायकों का अतिरिक्त स्पष्टीकरण सुनेंगे। इसके आधार पर वे अयोग्यता कार्यवाही में आगे की दिशा तय करेंगे। AIADMK नेता एडप्पादी पलानीस्वामी के व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्णय स्पष्टीकरण की समीक्षा के बाद लिया जाएगा।
यह याचिका किसने दायर की और क्यों?
यह याचिका AIADMK के महासचिव एवं विपक्ष के नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने दायर की। उनका तर्क है कि चुनाव जीतने के बाद पार्टी छोड़कर TVK में शामिल होना दलबदल विरोधी कानून का उल्लंघन है और इन विधायकों की सदस्यता रद्द होनी चाहिए।
इस मामले का तमिलनाडु की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि स्पीकर इन चारों विधायकों को अयोग्य घोषित करते हैं, तो संबंधित विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हो सकते हैं। इससे तमिलनाडु विधानसभा में दलों के बीच शक्ति-संतुलन प्रभावित हो सकता है और AIADMK तथा TVK के बीच राजनीतिक तनाव और गहरा हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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