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एआईएडीएमके सांसद धनपाल की माँग: चार विधायकों के टीवीके में दलबदल की सीबीआई जांच हो

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एआईएडीएमके सांसद धनपाल की माँग: चार विधायकों के टीवीके में दलबदल की सीबीआई जांच हो

सारांश

एआईएडीएमके सांसद धनपाल ने एक्स पोस्ट के ज़रिये चार विधायकों के टीवीके में दलबदल की सीबीआई जांच और ईडी निगरानी की माँग की — आरोप है कि इसके पीछे बड़े पैमाने पर धन लेन-देन हुआ। यह माँग ऐसे समय आई है जब एआईएडीएमके के दोनों गुट हफ्तों की कलह के बाद सुलह की राह पर हैं।

मुख्य बातें

एआईएडीएमके सांसद धनपाल ने 28 मई 2026 को चार विधायकों के टीवीके में दलबदल की सीबीआई जांच की माँग की।
आरोप है कि दलबदल के पीछे बड़े पैमाने पर धन लेन-देन हुआ; ईडी से भी निगरानी रखने की अपील।
जिन चार विधायकों ने इस्तीफा दिया: के.
मरगथम कुमारवेल , पी.
शनमुगम गुट की ताकत घटकर 15 विधायक रह गई; 6 विधायक ईपीएस खेमे में लौटे।
दोनों गुट कथित तौर पर स्पीकर जेसीडी प्रभाकर को पत्र देकर टीवीके समर्थन वापस लेने की तैयारी में हैं।
ईपीएस ने शनमुगम गुट की पद-बहाली और समन्वय समिति की माँगें कथित तौर पर ठुकराईं।

अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के सांसद धनपाल ने 28 मई 2026 को माँग की कि पार्टी के चार विधायकों के इस्तीफे और उनके सत्ताधारी दल तमिलगा वेत्री कजगम (टीवीके) में शामिल होने की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से विस्तृत जांच कराई जाए। धनपाल ने आरोप लगाया कि इस दलबदल के पीछे बड़े पैमाने पर धन के लेन-देन की आशंका है और केंद्र सरकार को लोकतंत्र की रक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए।

एक्स पर पोस्ट से उठाए सवाल

धनपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिये दावा किया कि टीवीके सरकार के पास स्वतंत्र बहुमत नहीं था। उनके अनुसार, नई सरकार के सत्ता संभालने के तुरंत बाद चार विधायकों का एक साथ इस्तीफा देना और फिर सत्तारूढ़ दल में शामिल होना गंभीर संदेह पैदा करता है। धनपाल ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से भी इन घटनाक्रमों पर बारीकी से नज़र रखने की अपील की।

किन विधायकों पर है सवाल

जिन चार विधायकों ने एआईएडीएमके से इस्तीफा देकर टीवीके का दामन थामा, उनमें के. मरगथम कुमारवेल, पी. सत्यभामा, एस. जयकुमार और डॉ. सी. इसाकी सुब्बैया शामिल हैं। ये सभी सीवी शनमुगम के नेतृत्व वाले गुट से थे, जिसके पास शुरुआत में 25 विधायकों का समर्थन था।

एआईएडीएमके के भीतर गुटबाज़ी और कमज़ोर होती स्थिति

चुनाव के बाद पार्टी में आए संकट के कारण एआईएडीएमके दो मुख्य गुटों में बंट गई। एक गुट सीवी शनमुगम के नेतृत्व में था, तो दूसरा पूर्व मुख्यमंत्री एवं पार्टी के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) के नेतृत्व में, जिसे 22 विधायकों का समर्थन था। हाल के हफ्तों में पी. हरिभास्कर, एसएम सुकुमार, डी. जयशंकर, एनएसएन नटराजन, के. मोहन और पी. बालकृष्ण रेड्डी सहित छह विधायक ईपीएस खेमे में लौट आए, जिससे शनमुगम गुट की ताकत घटकर मात्र 15 विधायक रह गई।

सुलह की कोशिश, लेकिन शर्तों पर असहमति

पार्टी की कमज़ोर होती स्थिति के बीच एआईएडीएमके के कई वरिष्ठ नेताओं ने चेन्नई के ग्रीनवेज़ रोड स्थित ईपीएस के आवास पर उनसे मुलाकात कर सुलह की संभावनाएँ तलाशीं। सूत्रों के अनुसार, शनमुगम गुट ने पार्टी पदों की बहाली और एक उच्च-स्तरीय समन्वय समिति के गठन की माँग रखी, लेकिन कथित तौर पर ईपीएस ने दोनों माँगें ठुकरा दीं और विरोधी खेमे से स्पीकर के समक्ष दर्ज शिकायतें वापस लेने को कहा।

विधानसभा में विपक्ष की स्थिति पर असर

पार्टी सूत्रों के अनुसार, दोनों गुटों के नेता स्पीकर जेसीडी प्रभाकर को एक पत्र सौंपने की तैयारी में हैं, जिसमें वे विश्वास मत के दौरान टीवीके सरकार को दिए गए अपने पहले के समर्थन को वापस लेने की घोषणा करेंगे। यह कदम तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष की स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। गौरतलब है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों गुट हफ्तों की अंदरूनी उथल-पुथल के बाद कथित तौर पर पुनः एकजुट होने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दलबदल को न्यायिक मार्ग से पलटने में असमर्थता से उपजी है। दसवीं अनुसूची के तहत दलबदल-विरोधी कानून की सीमाएँ यहाँ स्पष्ट हैं — जब विधायक स्वेच्छा से इस्तीफा देकर दूसरे दल में जाते हैं, तो संवैधानिक उपाय सीमित हो जाते हैं। सीबीआई और ईडी का आह्वान राजनीतिक दबाव की रणनीति अधिक लगती है, क्योंकि धन लेन-देन के ठोस साक्ष्य सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। असली सवाल यह है कि दोनों गुटों की कथित सुलह के बाद एआईएडीएमके विधानसभा में प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभा पाएगी या नहीं।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धनपाल ने सीबीआई जांच की माँग क्यों की?
एआईएडीएमके सांसद धनपाल ने आरोप लगाया कि पार्टी के चार विधायकों ने इस्तीफा देकर सत्ताधारी टीवीके में शामिल होने के पीछे बड़े पैमाने पर धन लेन-देन हो सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से लोकतंत्र की रक्षा के लिए सीबीआई जांच के आदेश देने की अपील की।
कौन से चार विधायकों ने एआईएडीएमके छोड़कर टीवीके जॉइन की?
के. मरगथम कुमारवेल, पी. सत्यभामा, एस. जयकुमार और डॉ. सी. इसाकी सुब्बैया ने एआईएडीएमके से इस्तीफा देकर सत्ताधारी तमिलगा वेत्री कजगम (टीवीके) में शामिल हो गए। ये सभी शनमुगम गुट से थे।
एआईएडीएमके के दोनों गुटों में सुलह की क्या स्थिति है?
सूत्रों के अनुसार दोनों गुट सुलह की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और स्पीकर जेसीडी प्रभाकर को पत्र देकर टीवीके सरकार को दिया समर्थन वापस लेने की तैयारी है। हालाँकि ईपीएस ने शनमुगम गुट की पद-बहाली और समन्वय समिति की माँगें कथित तौर पर ठुकरा दी हैं।
इस दलबदल से तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष पर क्या असर पड़ा?
शनमुगम गुट की ताकत 25 विधायकों से घटकर 15 विधायक रह गई है। छह अन्य विधायक ईपीएस खेमे में लौट आए हैं, जिससे एआईएडीएमके की विधानसभा में विपक्षी भूमिका कमज़ोर हुई है।
टीवीके सरकार के पास बहुमत की स्थिति क्या है?
धनपाल ने दावा किया है कि टीवीके सरकार के पास स्वतंत्र बहुमत नहीं था और नई सरकार बनते ही चार विधायकों का अचानक इस्तीफा देना संदेहास्पद है। हालाँकि टीवीके की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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