महेश भट्ट का 76वाँ जन्मदिन: 'सारांश' से 'आशिकी' तक, पर्दे जैसी ही रही असल ज़िंदगी
सारांश
मुख्य बातें
निर्देशक और निर्माता महेश भट्ट का 20 सितंबर 2024 को 76वाँ जन्मदिन है — एक ऐसे फिल्मकार का, जिसने हिंदी सिनेमा को 'अर्थ', 'सारांश' और 'आशिकी' जैसी कालजयी फ़िल्में दीं और जिनकी निजी ज़िंदगी भी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं रही। करीब पाँच दशकों के करियर में भट्ट ने समाज, रिश्तों और इंसानी दर्द को पर्दे पर ऐसी बेबाकी से उतारा जो बॉलीवुड में विरले ही देखने को मिलती है।
संघर्ष भरा बचपन और इंडस्ट्री में पहला कदम
20 सितंबर 1948 को मुंबई में जन्मे महेश भट्ट का बचपन आसान नहीं था। उनके पिता नानाभाई भट्ट फिल्म निर्माता थे, लेकिन उन्होंने महेश की माँ शिरीन मोहम्मद अली से विवाह नहीं किया था। इस वजह से बचपन में महेश को सामाजिक तानों और आर्थिक तंगी दोनों का सामना करना पड़ा। इन्हीं परिस्थितियों ने उनके भीतर सफल होने की ज़िद पैदा की।
फिल्म इंडस्ट्री में कोई गॉडफादर न होने के बावजूद, फ़िल्मों के प्रति जुनून उन्हें महबूब स्टूडियो तक खींच लाया। स्टूडियो में काम पाने के लिए उन्होंने कहा कि वे फिल्म निर्देशक राज खोसला को जानते हैं। जब सच उजागर हुआ, तो भट्ट ने बेझिझक अपनी बात स्वीकार कर ली। राज खोसला ने उनकी इस ईमानदारी को सराहा और उन्हें अपनी टीम में असिस्टेंट के रूप में शामिल कर लिया — यहीं से उनके असली फिल्मी सफर की नींव पड़ी।
निर्देशन से राष्ट्रीय पुरस्कार तक का सफर
1974 में फिल्म 'मंजिलें और भी हैं' से निर्देशन की शुरुआत करने वाले महेश भट्ट ने जल्द ही अपनी अलग पहचान बनाई। 'अर्थ', 'सारांश', 'नाम', 'अवारगी' और 'कश्मकश' जैसी फ़िल्मों ने दर्शकों को समाज का असली आईना दिखाया। 1984 में आई 'सारांश' को विशेष रूप से सराहा गया।
1998 में आई फिल्म 'जख्म' उनके करियर की सबसे महत्वपूर्ण फ़िल्मों में गिनी जाती है। इसे राष्ट्रीय एकता पर सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए प्रतिष्ठित नरगिस दत्त पुरस्कार से नवाज़ा गया। 'हम हैं राही प्यार के', 'तमन्ना' और 'गुड़िया' जैसी फ़िल्मों के लिए भी उन्होंने राष्ट्रीय पुरस्कार जीते।
प्रोडक्शन हाउस और बॉक्स ऑफिस पर दबदबा
महेश भट्ट ने 1990 के दशक में विशेष फिल्म्स नाम से अपना प्रोडक्शन हाउस स्थापित किया। इस बैनर तले 'राज', 'मर्डर', 'जिस्म', 'जन्नत' और 'आशिकी 2' जैसी हिट फ़िल्में बनाई गईं, जिन्होंने नए कलाकारों को मौका देने के साथ-साथ बॉक्स ऑफिस पर भी बड़ी कमाई की। 1990 में रिलीज़ हुई 'आशिकी' सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं थी — उसका संगीत आज भी लोगों के दिलों में ज़िंदा है।
गौरतलब है कि भट्ट उन चुनिंदा फिल्मकारों में शुमार हैं जिन्होंने गंभीर सामाजिक विषयों और बड़े पैमाने पर मनोरंजन — दोनों को समान कुशलता से परदे पर उतारा।
निजी ज़िंदगी: दो शादियाँ, कई मोड़
महेश भट्ट की निजी ज़िंदगी भी उतनी ही उतार-चढ़ाव भरी रही। कॉलेज के दिनों में लोरिएन (बाद में जिन्होंने अपना नाम बदलकर किरण रख लिया) से प्रेम हुआ। एक बार वे उनसे मिलने के लिए अनाथालय की दीवार कूदकर अंदर चले गए — हालाँकि पकड़े गए। दोनों ने 20 वर्ष की उम्र में विवाह किया। इस रिश्ते से पूजा भट्ट और राहुल भट्ट का जन्म हुआ।
शादी के दौरान महेश भट्ट का नाम अभिनेत्री परवीन बाबी के साथ जुड़ने लगा और पहली पत्नी से अलगाव हो गया। बताया जाता है कि कुछ समय के लिए वे परवीन बाबी के साथ लिव-इन में भी रहे।
1984 में फिल्म 'सारांश' की शूटिंग के दौरान महेश भट्ट की मुलाकात सोनी राजदान से हुई और दोनों के बीच प्रेम हो गया। बाद में दोनों ने इस्लाम धर्म अपनाया और 1986 में विवाह किया। इस जोड़े की दो बेटियाँ हैं — शाहीन भट्ट और आलिया भट्ट।
विरासत और आगे का सफर
महेश भट्ट की फिल्मी विरासत केवल उनकी अपनी फ़िल्मों तक सीमित नहीं है — उनकी बेटी आलिया भट्ट आज बॉलीवुड की सबसे चर्चित अभिनेत्रियों में से एक हैं और पूजा भट्ट भी इंडस्ट्री में सक्रिय हैं। यह ऐसे समय में मायने रखता है जब हिंदी सिनेमा में यथार्थवादी कहानियों की माँग फिर से बढ़ रही है। महेश भट्ट का सिनेमाई नज़रिया आने वाली पीढ़ियों के फिल्मकारों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।