पूजा भट्ट: 11 साल की शादी को खत्म करके खुद को पहचानने का सफर
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मुंबई, 23 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। बॉलीवुड की दुनिया में कई कलाकारों के करियर और व्यक्तिगत जीवन की चर्चा होती है, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने का चुनाव करते हैं। पूजा भट्ट का नाम भी उन्हीं में शामिल है, जिन्होंने अपने जीवन के सभी महत्वपूर्ण निर्णय स्वयं लिए हैं।
उनका स्पष्ट कहना है कि वे अपनी जिंदगी अपनी शर्तों पर जीना चाहती हैं, बिना किसी दबाव या सामाजिक अपेक्षाओं के।
24 फरवरी 1972 को जन्मी पूजा भट्ट ने फिल्मों, विवादों और अपने परिवार के कारण काफी सुर्खियाँ बटोरी हैं। महेश भट्ट की संतान होने के बावजूद, उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाने के लिए मेहनत की। उनकी जिंदगी में कई अहम मोड़ आए, जहाँ उन्होंने खुद के फ़ैसले लिए।
पूजा ने 17 वर्ष की उम्र में फिल्म 'डैडी' से अभिनय की दुनिया में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने कई चर्चित फिल्मों में काम किया, जिनमें 'दिल है कि मानता नहीं', 'सड़क', 'जख्म', और 'सनम तेरी कसम' शामिल हैं। अपने पेशेवर जीवन के अलावा, उनका निजी जीवन भी चर्चा का विषय रहा है।
पूजा ने 2003 में मनीष मखीजा से विवाह किया और 11 वर्षों बाद तलाक का निर्णय लिया। इस विषय में उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, ''मैं अपनी जिंदगी की प्राथमिकताएँ स्वयं तय करती हूँ। चाहे करियर के फ़ैसले हों या व्यक्तिगत रिश्ते, मैं हमेशा अपनी खुशियों को प्राथमिकता देती हूँ। मेरा मानना है कि शादी एक खूबसूरत रिश्ते का हिस्सा हो सकती है, लेकिन यह जीवन की सफलता और खुशी के लिए आवश्यक नहीं है। मेरी ज़िंदगी शादी के बिना अधूरी नहीं है। मैं वही करती हूँ जो मुझे पसंद है।''
'बिग बॉस ओटीटी 2' में पूजा ने तलाक के अनुभव को साझा किया और बताया कि तलाक का निर्णय पूरी तरह से उनका था। उन्होंने कहा, ''मैं अपने विवाह को जारी नहीं रखना चाहती थी, इसलिए मैंने अलग होने का निर्णय लिया। मैं हमेशा अपनी जिंदगी को आराम से जीना चाहती थी। यही कारण था कि मैंने अपने 10 से 11 साल के रिश्ते को नहीं बचाना चाहा। मेरे पति बुरे इंसान नहीं थे। मैंने महसूस किया कि इस शादी के साथ मैंने खुद को भी खो दिया है, जो मेरे लिए स्वीकार्य नहीं था। मैं खुद को वापस पाना चाहती थी और इसलिए यह निर्णय लिया।''
पूजा भट्ट ने अभिनय से लेकर निर्देशन और उत्पादन तक, हर क्षेत्र में अपनी मर्जी से कदम रखा। उन्होंने फिल्मों 'जिस्म', 'पाप', 'धोखा' और 'कजरारे' का निर्देशन और उत्पादन किया।