6 अक्टूबर 2026
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संबित पात्रा का कांग्रेस पर हमला: 'हमारी मदद ज्ञानेश नहीं, गणेश जी करते हैं'; फॉर्म 6 विवाद पर राहुल के 4 दावों को नकारा

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संबित पात्रा का कांग्रेस पर हमला: 'हमारी मदद ज्ञानेश नहीं, गणेश जी करते हैं'; फॉर्म 6 विवाद पर राहुल के 4 दावों को नकारा

सारांश

संबित पात्रा ने 'इंडिया' ब्लॉक के मार्च से पहले भाजपा मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राहुल गांधी के फॉर्म 6 और चुनाव आयोग संबंधी चार दावों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के हवाले से खारिज किया और कहा — 'हमारी मदद ज्ञानेश नहीं, गणेश जी करते हैं।'

मुख्य बातें

संबित पात्रा ने 6 अक्टूबर 2026 को भाजपा मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस के SIR और चुनाव आयोग संबंधी आरोपों का खंडन किया।
राहुल गांधी के एक्स पोस्ट में फॉर्म 6 को 'गैरकानूनी', 'एकतरफा' और चुनाव आयोग को 'भाजपा की मदद करने वाला' बताया गया था — पात्रा ने इन चारों दावों को झूठ करार दिया।
पात्रा ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश 152, पैराग्राफ 161 का हवाला देकर कहा कि चुनाव आयोग का फॉर्म 6 में बदलाव उसके संवैधानिक अधिकार के भीतर था।
ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति 19 फरवरी 2025 को हुई — 2014, 2019, 2024 के लोकसभा चुनाव उससे पहले हो चुके थे।
पात्रा ने बताया कि SIR में 2.8 करोड़ मृत और 3 करोड़ अनुपस्थित मतदाताओं के नाम हटाए गए।
हिमाचल प्रदेश की 11 जिला परिषद सीटों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवारों की बैलेट पेपर से जीत का हवाला देकर ईवीएम विरोध को बेबुनियाद बताया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा ने 6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष के 'इंडिया' गठबंधन और विशेष रूप से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) पर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और चुनाव आयोग को लेकर लगाए गए आरोपों का जोरदार खंडन किया। पात्रा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के एक्स (X) पोस्ट में किए गए चार दावों को 'झूठ का पुलिंदा' बताते हुए एक-एक को तथ्यों के आधार पर खारिज किया।

विवाद की पृष्ठभूमि

पिछले कुछ दिनों से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर राजनीतिक माहौल गरम है। सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय में भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के विरुद्ध एक याचिका दाखिल की गई, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करने की मांग की गई। इसी सुनवाई के दौरान सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय ने फॉर्म 6 में किसी भी बदलाव को मंजूरी देने वाला कोई आदेश जारी नहीं किया है और जब मामला रिकॉर्ड पर आएगा, तब अदालत देखेगी कि बदलाव हुआ था या नहीं।

इसी संदर्भ में राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा था कि 'यह बात बिना किसी शक के साबित हो गई है कि ज्ञानेश कुमार ने गैरकानूनी और एकतरफा तरीके से फॉर्म 6 में बदलाव किया।' उन्होंने इसे 'भाजपा की मदद के लिए पद का दुरुपयोग' और 'लोकतंत्र पर आपराधिक हमला' करार दिया था।

पात्रा का राहुल के चार दावों पर खंडन

संबित पात्रा ने राहुल गांधी के उस एक्स पोस्ट में चार बिंदुओं को 'भ्रामक' बताया। पहला — 'फॉर्म 6 को गैरकानूनी तरीके से बदला गया'; दूसरा — 'फॉर्म 6 को एकतरफा बदला गया'; तीसरा — 'चुनाव आयोग भाजपा की मदद कर रहा है'; और चौथा — 'चुनाव आयोग का लोकतंत्र पर आपराधिक हमला।'

पात्रा ने दावा किया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश 152, पृष्ठ 110/124, पैराग्राफ 161 में खुद कोर्ट ने कहा है: 'कमीशन द्वारा तय किया गया डॉक्यूमेंटेशन सिस्टम उसके संवैधानिक अधिकार को आगे बढ़ाने के लिए उसके एडमिनिस्ट्रेटिव विवेक का सोचा-समझा इस्तेमाल है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि चुनाव आयोग के 26 सितंबर 2026 के प्रेस स्टेटमेंट में तीनों चुनाव आयुक्तों ने फैसले को 'एकमत' बताते हुए हस्ताक्षर किए थे, इसलिए 'एकतरफा' का आरोप निराधार है।

'ज्ञानेश नहीं, गणेश जी कर रहे हैं मदद'

पात्रा ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को 19 फरवरी 2025 को नियुक्त किया गया था, जबकि 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव उनकी नियुक्ति से पहले हो चुके थे। उन्होंने तर्क दिया कि इस आधार पर यह कहना कि चुनाव आयोग की वजह से भाजपा लोकसभा जीती, 'सरासर गलत' है।

पात्रा ने पलटवार करते हुए पूछा कि 2014 में मुख्य चुनाव आयुक्त वी.एस. संपत थे, जिन्हें यूपीए ने नियुक्त किया था — 'तो क्या उन्होंने भाजपा की मदद की?' उन्होंने अपने प्रसिद्ध वाक्य में कहा: 'हमारी मदद ज्ञानेश कुमार नहीं कर रहे, हमारी मदद गणेश जी कर रहे हैं — बुद्धि, विद्या, ज्ञान और विवेक के देवता। देश की जनता के पास यही विवेक है कि वे जानते हैं किसे वोट देना है।'

एसआईआर और मतदाता सूची पर सवाल

पात्रा ने विपक्ष के इस दावे को भी खारिज किया कि SIR के जरिए 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शुद्धिकरण में 2.8 करोड़ मृत मतदाताओं और 3 करोड़ अनुपस्थित मतदाताओं के नाम हटाए गए — और सवाल किया कि क्या मृत लोगों के नाम सूची में रहने चाहिए।

उन्होंने हिमाचल प्रदेश की 11 जिला परिषद सीटों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवारों की हालिया जीत का भी उल्लेख करते हुए कहा कि ये चुनाव बैलेट पेपर से हुए थे — जो विपक्ष की ईवीएम-विरोधी दलीलों को कमजोर करता है।

पात्रा ने अंत में राहुल गांधी से 10 सवाल पूछे और कांग्रेस से मांग की कि वह बताए कि क्या कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश की सरकारें भी 'वोट चोरी' से बनी हैं। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब विपक्ष का 'इंडिया' गठबंधन SIR के विरोध में मार्च की तैयारी कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक पूर्व-नियोजित काउंटर-नैरेटिव है। पात्रा ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला तो दिया, लेकिन उसी अदालत ने यह भी कहा कि फॉर्म 6 बदलाव को उसने मंजूरी नहीं दी — यह सूक्ष्म लेकिन अहम अंतर है जिसे प्रेस कॉन्फ्रेंस में नजरअंदाज किया गया। SIR की वैधता असली सवाल है: मृत और अनुपस्थित मतदाताओं को हटाना तर्कसंगत लग सकता है, लेकिन 13 करोड़ की संख्या और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर विपक्ष की चिंताएं महज राजनीति नहीं हैं — इनके लिए स्वतंत्र सत्यापन जरूरी है।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) क्या है और इसका विवाद क्यों है?
SIR भारतीय चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के शुद्धिकरण की एक प्रक्रिया है जिसमें मृत, स्थानांतरित और फर्जी मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में 13 करोड़ वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, जबकि भाजपा का कहना है कि केवल 2.8 करोड़ मृत और 3 करोड़ अनुपस्थित लोगों के नाम हटाए गए।
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए थे?
राहुल गांधी ने एक्स पोस्ट में आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने गैरकानूनी और एकतरफा तरीके से फॉर्म 6 में बदलाव किया, यह भाजपा की मदद के लिए पद का दुरुपयोग है और यह लोकतंत्र पर आपराधिक हमला है। साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग के 26 सितंबर 2026 के प्रेस स्टेटमेंट को भी संलग्न किया था।
संबित पात्रा ने राहुल के दावों का खंडन किस आधार पर किया?
पात्रा ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश 152, पैराग्राफ 161 का हवाला दिया जिसमें कोर्ट ने चुनाव आयोग के डॉक्यूमेंटेशन सिस्टम को उसके संवैधानिक अधिकार का वैध इस्तेमाल बताया। उन्होंने यह भी कहा कि तीनों चुनाव आयुक्तों के हस्ताक्षर वाले 26 सितंबर के बयान में फैसले को 'एकमत' बताया गया, इसलिए 'एकतरफा' का आरोप निराधार है।
ज्ञानेश कुमार को लेकर भाजपा का तर्क क्या है?
भाजपा का तर्क है कि ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति 19 फरवरी 2025 को हुई, जबकि 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव उससे पहले हो चुके थे। इसलिए यह दावा कि उनकी वजह से भाजपा लोकसभा चुनाव जीती, तथ्यात्मक रूप से गलत है।
विपक्ष का 'इंडिया' ब्लॉक का मार्च किस मांग को लेकर है?
'इंडिया' गठबंधन SIR प्रक्रिया और फॉर्म 6 में बदलाव के विरोध में मार्च आयोजित कर रहा है। विपक्ष की प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाना और चुनाव बैलेट पेपर से कराना शामिल है। भाजपा ने इसे 'अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश' करार दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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