6 अक्टूबर 2026
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फॉर्म 6 विवाद: संबित पात्रा का राहुल गांधी पर पलटवार, बोले- सुप्रीम कोर्ट ने इसे अवैध नहीं ठहराया

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फॉर्म 6 विवाद: संबित पात्रा का राहुल गांधी पर पलटवार, बोले- सुप्रीम कोर्ट ने इसे अवैध नहीं ठहराया

सारांश

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल गांधी के उस दावे को सिरे से खारिज किया जिसमें कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म 6 को अवैध ठहराया है। पात्रा के अनुसार कोर्ट ने केवल रिकॉर्ड जांचने की बात कही, कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया — और यह विवाद संवैधानिक संस्थाओं की व्याख्या को लेकर BJP-कांग्रेस की बड़ी राजनीतिक लड़ाई का नया मोर्चा है।

मुख्य बातें

BJP प्रवक्ता संबित पात्रा ने 5 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी के फॉर्म 6 संबंधी दावों को 'भ्रामक' और 'निराधार' बताया।
राहुल गांधी ने एक्स (X) पर आरोप लगाया था कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अवैध तरीके से फॉर्म 6 बदला और BJP को लाभ पहुँचाया।
पात्रा ने कहा कि प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की टिप्पणी केवल अभिलेखों की जांच तक सीमित थी — फॉर्म 6 को अवैध घोषित नहीं किया गया।
बिहार एसआईआर आदेश (24 जून 2025) तीनों निर्वाचन आयुक्तों ने सर्वसम्मति से अनुमोदित किया था — यह एकतरफा निर्णय नहीं था: BJP।
पात्रा ने 26 सितंबर की ECI प्रेस विज्ञप्ति वापस लिए जाने के दावे को भी असत्य बताया।
पात्रा ने राफेल विवाद का हवाला देते हुए गांधी पर 'बार-बार न्यायिक टिप्पणियों की गलत व्याख्या' करने का आरोप लगाया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस नेता एवं विपक्ष के नेता राहुल गांधी के उन दावों को पूरी तरह खारिज किया, जिनमें उन्होंने आरोप लगाया था कि उच्चतम न्यायालय ने फॉर्म 6 में किए गए बदलावों को अवैध करार दे दिया है। पात्रा ने कहा कि गांधी ने सुनवाई की टिप्पणियों को तोड़-मरोड़ कर ऐसा भ्रम फैलाया जो वास्तविक न्यायिक स्थिति के अनुरूप नहीं है।

राहुल गांधी ने क्या दावा किया था

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया था कि उच्चतम न्यायालय की कार्यवाही से यह 'बिना किसी संदेह के स्थापित' हो गया है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अवैध और एकतरफा तरीके से फॉर्म 6 में बदलाव किया और भारतीय जनता पार्टी की सहायता के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया। उन्होंने माँग की कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाए।

गांधी ने इस कथित बदलाव को 'लोकतंत्र पर हमला' बताते हुए इसे मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से भी जोड़ा और चुनाव आयोग (ECI) की भूमिका पर सवाल उठाए।

पात्रा की प्रतिक्रिया: 'कोर्ट ने कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया'

संबित पात्रा ने इस व्याख्या को 'भ्रामक' और 'तथ्यों से परे' बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान केवल यह कहा था कि न्यायालय ने किसी भी परिवर्तित फॉर्म 6 को स्वीकृति नहीं दी है और यह स्थापित करने के लिए आधिकारिक अभिलेखों की जांच की जाएगी कि संशोधन किसने किए।

पात्रा ने तर्क दिया कि यह टिप्पणी एक प्रक्रियागत आदेश है, न कि यह न्यायिक निष्कर्ष कि फॉर्म 6 स्वयं अवैध है। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने न तो फॉर्म 6 को अवैध घोषित किया है और न ही उसे खारिज किया है — मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है।

एसआईआर पर सर्वसम्मति का दावा

पात्रा ने यह भी खंडन किया कि एसआईआर का निर्णय एकतरफा था। उन्होंने बताया कि 24 जून 2025 को जारी बिहार एसआईआर आदेश को तीनों निर्वाचन आयुक्तों ने सर्वसम्मति से अनुमोदित किया था। उन्होंने चुनाव आयोग की अपनी तथ्य-जांच प्रतिक्रिया का हवाला देते हुए कहा कि आयोग ने स्वयं इस स्थिति को दोहराया है।

भाजपा ने सार्वजनिक रिकॉर्ड को प्रमाण के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि तीनों सदस्यों की भागीदारी स्पष्ट रूप से दर्ज है। पात्रा ने आरोप लगाया कि गांधी इसे जानबूझकर 'एक व्यक्ति की कार्रवाई' के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।

26 सितंबर की प्रेस विज्ञप्ति वापस लेने के दावे का खंडन

पात्रा ने एक और दावे का भी खंडन किया — कि चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को जारी अपनी प्रेस विज्ञप्ति वापस ले ली। उन्होंने कहा कि यह विज्ञप्ति आयोग के सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनी हुई है और इसके वापस लिए जाने की खबरें असत्य हैं। उन्होंने उच्चतम न्यायालय के 27 मई 2026 के निर्णय का भी हवाला दिया, जो उनके अनुसार राहुल गांधी की व्याख्या का समर्थन नहीं करता।

राफेल विवाद से जोड़ा, 'पुरानी प्रवृत्ति' का आरोप

पात्रा ने गांधी पर पहले राफेल लड़ाकू विमान विवाद में भी उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों की गलत व्याख्या करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उस मामले में गांधी को न्यायालय के समक्ष अपने बयानों पर स्पष्टीकरण देना पड़ा था। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि फॉर्म 6 विवाद में भी यही 'प्रवृत्ति' दिख रही है — पूरी कानूनी अभिलेखों की जांच से पहले ही न्यायिक टिप्पणियों की राजनीतिक व्याख्या।

पात्रा ने सभी राजनीतिक नेताओं से अपील की कि संवैधानिक संस्थाओं पर सार्वजनिक आरोप लगाने से पहले न्यायिक निर्णयों और आधिकारिक दस्तावेजों का ध्यानपूर्वक अध्ययन करें। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब आगामी चुनावों से पहले चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर राजनीतिक तनाव चरम पर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक राजनीतिक प्रतियोगिता है — कि कौन पहले न्यायालय की भाषा को जनता के सामने परिभाषित करे। राहुल गांधी का एक्स पोस्ट और पात्रा की तत्काल प्रेस कॉन्फ्रेंस, दोनों इसी 'नैरेटिव रेस' के हिस्से हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है वह यह है कि दोनों पक्ष आंशिक रूप से सही हो सकते हैं — न्यायालय ने अभी अंतिम फैसला नहीं दिया, लेकिन जांच का आदेश स्वयं गंभीर प्रश्न उठाता है। चुनाव आयोग की संस्थागत विश्वसनीयता दाँव पर है, और जब तक न्यायालय स्पष्ट निर्णय नहीं देता, यह विवाद जनमत को प्रभावित करता रहेगा।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फॉर्म 6 विवाद क्या है और इसमें सुप्रीम कोर्ट की क्या भूमिका है?
फॉर्म 6 मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का आवेदन पत्र है। विवाद इस बात को लेकर है कि क्या मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने एसआईआर प्रक्रिया के लिए इसमें एकतरफा बदलाव किए। उच्चतम न्यायालय ने सुनवाई के दौरान कहा कि उसने किसी परिवर्तित फॉर्म 6 को मंजूरी नहीं दी और अभिलेखों की जांच कराएगा — लेकिन कोई अंतिम निर्णय अभी नहीं आया है।
राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद क्या आरोप लगाए?
राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि सुनवाई से 'बिना किसी संदेह के' यह स्थापित हो गया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने अवैध और एकतरफा तरीके से फॉर्म 6 बदला और BJP की सहायता की। उन्होंने इसे 'लोकतंत्र पर हमला' बताते हुए जवाबदेही की माँग की।
BJP ने राहुल गांधी के दावों को क्यों खारिज किया?
BJP प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म 6 को अवैध घोषित नहीं किया, बल्कि केवल रिकॉर्ड जांचने की बात कही। उनके अनुसार गांधी ने प्रधान न्यायाधीश की प्रक्रियागत टिप्पणी को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष की तरह प्रस्तुत किया, जो तथ्यात्मक रूप से गलत है।
बिहार एसआईआर आदेश क्या था और क्या वह एकतरफा था?
बिहार एसआईआर आदेश 24 जून 2025 को जारी हुआ था और BJP के अनुसार इसे तीनों निर्वाचन आयुक्तों ने सर्वसम्मति से अनुमोदित किया था। पात्रा ने कहा कि चुनाव आयोग ने स्वयं अपनी तथ्य-जांच में इसे दोहराया है, इसलिए इसे एकतरफा निर्णय नहीं कहा जा सकता।
26 सितंबर की ECI प्रेस विज्ञप्ति वापस ली गई या नहीं?
संबित पात्रा ने स्पष्ट किया कि 26 सितंबर की चुनाव आयोग की प्रेस विज्ञप्ति वापस नहीं ली गई है और वह आयोग के सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनी हुई है। उन्होंने इसके वापस लिए जाने की खबरों को असत्य बताया।
राष्ट्र प्रेस
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