राहुल-प्रियंका गांधी पर FIR: कांग्रेस बोली — 'BJP आवाज़ नहीं दबा सकती', ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत अन्य विपक्षी नेताओं के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर 'इंडिया' ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन पर 7 अक्टूबर 2026 को विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के नेताओं ने एकजुट होकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर चुनाव आयोग के दुरुपयोग का आरोप लगाया और कहा कि एफआईआर लोकतांत्रिक विरोध की आवाज़ नहीं दबा सकती।
कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता रमेश बाबू ने कहा, 'भाजपा वाले कांग्रेस पार्टी या उसके नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की आवाज़ नहीं दबा सकते। हम एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में हैं और लोकतंत्र में हमें विरोध करने का अधिकार है।' उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तेमाल कर 'इंडिया' ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन में बाधा डाली गई और अब एफआईआर के ज़रिए नेताओं की आवाज़ दबाने की कोशिश हो रही है।
रमेश बाबू ने यह भी कहा, 'कांग्रेस पार्टी जानती है कि किन हालात में हमें चुनाव आयोग के पास जाना पड़ता है। हमें भाजपा से सीखने की जरूरत नहीं है। अगर वे चाहें, तो ज्ञानेश कुमार के साथ डिनर कर सकते हैं।' यह टिप्पणी BJP और चुनाव आयुक्त के बीच कथित नजदीकी पर सीधा कटाक्ष थी।
मतदाता सूची विवाद और 38 लाख वोटरों का सवाल
कांग्रेस नेता उदित राज ने BJP के उस आरोप को खारिज किया जिसमें कहा गया था कि 'कांग्रेस फर्जी मतदाताओं को जुड़वाना चाहती है।' उदित राज ने पलटवार करते हुए कहा, 'इसका जवाब दे पाएंगे, जो 38 लाख मतदाता वोट नहीं दे पाए? सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित ट्रिब्यूनल की सुनवाई में लगभग 1 लाख मतदाताओं की जाँच हुई, जिनमें से 93 प्रतिशत सही पाए गए।' उन्होंने तर्क दिया कि इतने बड़े प्रतिशत के वैध मतदाताओं का वोट न दे पाना गंभीर सवाल खड़ा करता है।
उदित राज ने आगे कहा कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को चुनाव आयोग तक जाने नहीं दिया गया। उन्होंने दावा किया कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी यह स्पष्ट किया है कि फॉर्म-6 में बदलाव के लिए न्यायालय की ओर से कोई आदेश नहीं था, और चुनाव आयोग ने इस मामले में गलत बयानी की।
JMM और DMK का समर्थन
झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता मनोज पांडे ने मतदाता सूची में हुई कथित कटौती पर चिंता जताते हुए कहा, 'देश में वर्तमान में 102 करोड़ मतदाता हैं, लेकिन SIR (Special Intensive Revision) के बाद यह संख्या 87 करोड़ रह गई। बाकी के 14 करोड़ मतदाता कहाँ गए?' उन्होंने मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार बताते हुए इससे वंचित करने को देशद्रोह की श्रेणी में रखा और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग दोहराई।
DMK प्रवक्ता टीकेएस इलांगोवन ने कहा, 'सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करना उन लोगों का अधिकार है जिन्होंने उसे सत्ता में चुना है। वे अपने राजनीतिक फायदे के लिए चुनाव आयोग का गलत इस्तेमाल नहीं कर सकते।'
चुनाव आयोग के बयान पर सवाल
कांग्रेस सांसद अमर सिंह ने चुनाव आयोग के उस बयान को 'बहानेबाजी' करार दिया जिसमें कहा गया था कि विपक्ष ने मिलने का अनुरोध नहीं किया। उन्होंने कहा, 'सारी दुनिया को पता था कि दो-तीन सौ सदस्य पैदल आ रहे हैं।' अपने प्रशासनिक अनुभव का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि जब भी कोई प्रतिनिधिमंडल या आंदोलन होता है, तो पुलिस अधिकारी स्वयं सूचित करते हैं और एक प्रतिनिधिमंडल को अंदर बुला लिया जाता है।
आगे क्या होगा
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और बर्खास्तगी की माँग करते हुए उन पर 'वोट चोरी' के ज़रिए 'देशद्रोह' का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि दलितों, आदिवासियों, महिलाओं, किसानों और अल्पसंख्यकों के मतदान अधिकार पर 'डाका डाला गया' है।
यह मामला अब राजनीतिक रूप से और गर्म होता दिख रहा है — विपक्षी दल न केवल एफआईआर को चुनौती देने की बात कर रहे हैं, बल्कि मतदाता सूची विवाद को सर्वोच्च न्यायालय तक ले जाने का संकेत भी दे रहे हैं।