संबित पात्रा का राहुल गांधी पर पलटवार: 'सदन में असंसदीय भाषा और निराधार आरोप बर्दाश्त नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता और सांसद संबित पात्रा ने बुधवार को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा पलटवार किया। पात्रा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी संसद में तथ्यहीन दावे कर रहे हैं, असंसदीय भाषा का उपयोग कर रहे हैं और सुरक्षा बलों के विरुद्ध भ्रामक बयान देकर उनका मनोबल कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
असंसदीय भाषा पर विवाद
संबित पात्रा ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में नियम पुस्तिका दिखाकर कई बार स्पष्ट किया है कि 'इडियट' शब्द असंसदीय है और इसका प्रयोग सदन की मर्यादा के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद विपक्ष लगातार इस शब्द का इस्तेमाल कर रहा है, जो संसदीय परंपराओं का उल्लंघन है।
यह ऐसे समय में आया है जब संसद के मानसून सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है और सदन की कार्यवाही बाधित होने की घटनाएँ सामने आई हैं।
अमित शाह के काफिले पर राहुल के दावे को चुनौती
पात्रा ने राहुल गांधी के उस दावे को सीधे चुनौती दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 30 वाहनों के काफिले के साथ पहुँचे थे। पात्रा ने कहा, "आज मैं राहुल गांधी को चुनौती देता हूँ कि हमारे साथ आइए और गाड़ियाँ गिनिए। बताइए अमित शाह का 30 गाड़ियों का काफिला कहाँ था? क्या जो व्यक्ति सदन के अंदर पाँच मिनट तक नहीं बैठ सकता, वह बाहर खड़े होकर गाड़ियाँ गिन सकता है?"
उन्होंने यह भी कहा कि उनके अनुसार प्रधानमंत्री के काफिले में भी 30 वाहन नहीं होते, और इस दावे को उन्होंने 'पूरी तरह झूठ' करार दिया। उन्होंने कहा, "अमित शाह ऐसे नेता हैं जिनसे नक्सली तक डरते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उन्होंने दिन-रात मेहनत कर देश को नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में काम किया।"
माइक्रोफोन विवाद और 'विक्टिम कार्ड' पर तंज
पात्रा ने राहुल गांधी के उस दावे को भी खारिज किया जिसमें उन्होंने कहा था कि सदन में उनका माइक्रोफोन बंद कर दिया गया। पात्रा ने कहा, "मैं सदन में मौजूद था। राहुल गांधी कह रहे थे कि उनका माइक बंद है, जबकि लाल बत्ती जल रही थी — लाल बत्ती का अर्थ है कि माइक्रोफोन चालू था।"
उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, "क्या आप जानते हैं कि राहुल गांधी हमेशा अपने हाथ जेब में क्यों रखते हैं? क्योंकि दोनों जेबों में वे हमेशा 'विक्टिम कार्ड' लेकर चलते हैं।"
सुरक्षा बलों पर आरोपों की निंदा
पात्रा ने संसद में कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए गए उन आरोपों को 'पूरी तरह गलत और झूठा' बताया, जिनमें कहा गया था कि सुरक्षा बलों ने लड़कियों के कपड़े फाड़े। उन्होंने कहा, "हमारे सशस्त्र बल और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं और भारत माता की अस्मिता की सुरक्षा करते हैं। संसद में खड़े होकर ऐसे आरोप लगाना बेहद अनुचित और गंभीर मामला है।"
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ नेता, जो बाद में कांग्रेस में शामिल हुए, पहले भी जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में सुरक्षा बलों पर इसी तरह के आरोप लगा चुके हैं। पात्रा ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे ऐसा कोई नैरेटिव न गढ़ें जिससे देश के सुरक्षा बलों का मनोबल कमज़ोर हो।
कांग्रेस के इतिहास पर हमला
पात्रा ने आज़ादी के 75 वर्षों का हवाला देते हुए कहा कि जब भी केंद्र में कांग्रेस या कांग्रेस-समर्थित सरकारें रहीं, उनकी प्राथमिकता 'जेन-जी' यानी गांधी परिवार रही, न कि देश की युवा पीढ़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और असम के छात्र आंदोलनों के दौरान कांग्रेस सरकारों ने छात्रों पर गोली चलवाई, जिसमें 800 से अधिक छात्रों की मौत हुई — हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि राष्ट्र प्रेस ने नहीं की है। आगे यह विवाद संसद में और तेज़ होने की संभावना है।