VHP अध्यक्ष आलोक कुमार का राहुल गांधी पर निशाना: 'संवैधानिक पद पर बैठे नेताओं को मर्यादा में रहना चाहिए'

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VHP अध्यक्ष आलोक कुमार का राहुल गांधी पर निशाना: 'संवैधानिक पद पर बैठे नेताओं को मर्यादा में रहना चाहिए'

सारांश

VHP अध्यक्ष आलोक कुमार ने राहुल गांधी को याद दिलाया कि विपक्ष के नेता का पद संवैधानिक है और उसके साथ भाषाई मर्यादा की जिम्मेदारी भी आती है। अटल-आडवाणी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं के अवमूल्यन का भी आरोप लगाया।

मुख्य बातें

VHP के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने 20 मई 2025 को नई दिल्ली में राहुल गांधी की भाषा पर आपत्ति जताई।
आलोक कुमार ने कहा कि राहुल गांधी को याद रखना चाहिए कि वे विपक्ष के नेता के रूप में एक संवैधानिक पद पर हैं।
उन्होंने ईरान-अमेरिका तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य का हवाला देते हुए वैश्विक ऊर्जा संकट की संभावना का उल्लेख किया।
कांग्रेस पर मुख्य चुनाव आयुक्त, न्यायाधीशों और लोकसभा अध्यक्ष के विरुद्ध कदम उठाकर संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का आरोप लगाया।
VHP प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि इस तरह के बयानों से कांग्रेस अपनी 'अंतिम यात्रा' की ओर जा रही है।

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने 20 मई 2025 को नई दिल्ली में कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को यह नहीं भूलना चाहिए कि वे विपक्ष के नेता के रूप में एक संवैधानिक पद पर आसीन हैं और उन्हें अपनी भाषा में शिष्टता बनाए रखनी चाहिए। यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के विरुद्ध राहुल गांधी की हालिया टिप्पणियों को लेकर उठे विवाद की पृष्ठभूमि में आया है।

आलोक कुमार की मुख्य आपत्तियाँ

आलोक कुमार ने कहा कि राहुल गांधी को ध्यान नहीं रहता कि वे एक संवैधानिक पद पर बैठे हैं। उन्होंने सवाल उठाया — 'क्या प्रधानमंत्री मोदी के नाम के साथ 'जी' नहीं लगाया जा सकता? क्या यह कहा जाएगा कि 'नरेंद्र मोदी कहता है'?' उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले के विपक्षी नेता सार्वजनिक बयानों में आदर्श भाषा का प्रयोग करते थे।

भू-राजनीतिक संदर्भ और प्रधानमंत्री की अपील

आलोक कुमार ने यह भी कहा कि राहुल गांधी के 'कठिन दिन आने वाले हैं' वाले बयान को केवल भारत के संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के कारण यदि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहता है, तो तेल, खाद और गैस का वैश्विक संकट उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने कहा कि इसीलिए प्रधानमंत्री ने देश से कुछ त्याग का आह्वान किया है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या प्रधानमंत्री मोदी ने युद्ध करवाया है या तेल की आवाजाही रोकी है — और कहा कि जो कुछ हो रहा है वह दो देशों के बीच के तनाव का परिणाम है।

कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं के अवमूल्यन का आरोप

राहुल गांधी द्वारा संविधान बेचने और डॉ. भीमराव अंबेडकर का अपमान करने के आरोपों को आलोक कुमार ने 'इससे बड़ा झूठ कुछ नहीं' कहकर खारिज किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने मानो ठेका ले रखा है कि सभी संवैधानिक संस्थाओं का अवमूल्यन करना है — चाहे वह मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के नोटिस हों, न्यायाधीशों पर सवाल हों, या लोकसभा अध्यक्ष के विरुद्ध प्रस्ताव हों। उन्होंने कहा, 'संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना लोकतंत्र को चोट पहुँचाता है।'

VHP प्रवक्ता विनोद बंसल की प्रतिक्रिया

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह के बयानों से कांग्रेस अपनी 'अंतिम यात्रा' की ओर बढ़ रही है। उन्होंने केरल में नई सरकार का उल्लेख करते हुए कहा कि वह 'मुस्लिम लीग की मानसिकता से जिंदा रहना चाहती है।' बंसल ने कहा कि जो व्यक्ति अपने देश के प्रधानमंत्री के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करता है, उससे बड़ा देशद्रोही कोई नहीं हो सकता।

आगे क्या

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब भारत-पाकिस्तान तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट की पृष्ठभूमि में राजनीतिक बयानबाजी तेज़ हो गई है। VHP के इस बयान के बाद कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया की संभावना है, और यह मामला संसद के आगामी सत्र में भी गूँज सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी गौरतलब है कि 'मर्यादित भाषा' की माँग तभी अधिक विश्वसनीय लगती है जब वह सभी पक्षों पर समान रूप से लागू हो। आलोक कुमार ने स्वयं राहुल गांधी को 'दिमाग से खाली और मुंह से बदतमीज' कहा — जो उसी मर्यादा का उल्लंघन है जिसकी वे माँग कर रहे हैं। विनोद बंसल का 'जिहादी मानसिकता' वाला बयान भी उसी श्रेणी में आता है। असली बहस यह है कि क्या भारतीय राजनीति में किसी भी दल के नेता इस मानक पर खरे उतर रहे हैं — और इस पर मुख्यधारा की कवरेज प्रायः एकपक्षीय रह जाती है।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

VHP अध्यक्ष आलोक कुमार ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाए?
आलोक कुमार ने कहा कि राहुल गांधी विपक्ष के नेता के संवैधानिक पद पर रहते हुए भी प्रधानमंत्री मोदी के लिए अशोभनीय भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले के नेता सार्वजनिक बयानों में मर्यादा बनाए रखते थे।
आलोक कुमार ने ईरान-अमेरिका तनाव का उल्लेख क्यों किया?
उन्होंने यह स्पष्ट करने के लिए ईरान-अमेरिका तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य का उल्लेख किया कि 'कठिन दिन आने वाले हैं' — यह कथन वैश्विक ऊर्जा संकट के संदर्भ में सच है, न कि केवल सरकार की नीतिगत विफलता के कारण। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री की त्याग की अपील इसी वैश्विक परिस्थिति की प्रतिक्रिया है।
VHP ने कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं के अवमूल्यन का आरोप क्यों लगाया?
आलोक कुमार ने कहा कि कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के नोटिस, न्यायाधीशों पर सवाल और लोकसभा अध्यक्ष के विरुद्ध प्रस्ताव लाकर संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम कर रही है। उनके अनुसार, यह लोकतंत्र को कमज़ोर करने का प्रयास है।
विनोद बंसल ने कांग्रेस के बारे में क्या कहा?
VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि इस तरह के बयानों से कांग्रेस अपनी 'अंतिम यात्रा' की ओर जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जो व्यक्ति अपने देश के प्रधानमंत्री के लिए अशोभनीय भाषा का प्रयोग करता है, वह देशद्रोही की श्रेणी में आता है।
यह विवाद किस पृष्ठभूमि में उठा है?
यह विवाद उस समय उभरा जब राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर टिप्पणियाँ कीं, जिन्हें सत्तारूढ़ पक्ष और उनके समर्थक संगठनों ने अशोभनीय बताया। भारत-पाकिस्तान तनाव और वैश्विक ऊर्जा अनिश्चितता के बीच यह राजनीतिक बयानबाजी और तेज़ हो गई है।
राष्ट्र प्रेस
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