पंजाब विधानसभा ने SIR के तहत मतदान अधिकारों की रक्षा हेतु सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब विधानसभा ने 23 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची संशोधन के दौरान पात्र नागरिकों के मतदान अधिकारों की संवैधानिक रक्षा की माँग करने वाला प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया। यह प्रस्ताव वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सदन में प्रस्तुत किया। प्रस्ताव की प्रतियाँ राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त को भेजी जाएँगी।
प्रस्ताव की मुख्य माँगें
इस प्रस्ताव के ज़रिए पंजाब विधानसभा ने केंद्र सरकार और संबंधित संवैधानिक प्राधिकरणों से तीन मूलभूत माँगें रखी हैं — मतदान अधिकारों को संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करना, मतदाता सूचियों में सामने आई अनियमितताओं की निष्पक्ष जाँच का आदेश देना, और जहाँ भी गड़बड़ियाँ प्रमाणित हों, वहाँ जवाबदेही सुनिश्चित करना।
वित्त मंत्री चीमा ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और ईमानदारी बनाए रखना भारतीय लोकतंत्र की बुनियादी जरूरत है। उनके अनुसार, 'हमारा संविधान समानता, न्याय और जनता की सर्वोच्चता के सिद्धांतों पर टिका है।'
संवैधानिक आधार
सदन में संबोधन देते हुए चीमा ने संविधान के अनुच्छेद 324, 325 और 326 का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 'ये अनुच्छेद चुनाव तंत्र की निगरानी करने, मतदाता सूचियों में भेदभाव रोकने और सभी वयस्क नागरिकों को सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।'
मंत्री ने भारत रत्न बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को भी नमन किया, जिन्होंने संविधान की नींव रखते हुए आज़ादी से पहले के उस दौर की असमानता को समाप्त किया जब वोट देने का अधिकार समाज के केवल चुनिंदा वर्गों तक सीमित था।
मतदाता सूची विवाद और पृष्ठभूमि
यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब देश के कई हिस्सों में मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने और पात्र मतदाताओं के नाम छूट जाने की खबरें सामने आ रही हैं। चीमा के अनुसार, 'मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण ने देश के अलग-अलग हिस्सों में चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।'
गौरतलब है कि दिल्ली और अन्य राज्यों में मतदाता सूचियों को लेकर पहले भी विवाद उठ चुके हैं, जिनमें यह आरोप लगाए गए थे कि विपक्षी दलों के समर्थकों और समाज के वंचित वर्गों को कथित तौर पर जानबूझकर निशाना बनाया गया। मंत्री ने माँग की कि यदि सबूतों से यह सिद्ध हो कि चुनाव प्रक्रिया को कमजोर करने की जानबूझकर कोशिश हुई है, तो कानून के तहत कड़ी आपराधिक कार्रवाई की जानी चाहिए।
स्वतंत्र जाँच की माँग
चीमा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में मतदाता सूचियों में सामने आई गड़बड़ियों की जाँच के लिए एक स्वतंत्र, पारदर्शी और विश्वसनीय व्यवस्था बनाने की अपील की। उन्होंने कहा, 'लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का भरोसा तभी बना रह सकता है, जब यह सुनिश्चित हो कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रहे।'
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 'संवैधानिक लोकतंत्र के सुचारू संचालन और अस्तित्व के लिए चुनाव आयोग की संस्थागत स्वायत्तता, निष्पक्षता और जवाबदेही अनिवार्य है।'
आगे क्या
प्रस्ताव की प्रतियाँ राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त को आगे की उचित कार्रवाई हेतु भेजी जाएँगी। यह कदम राज्य विधानसभाओं द्वारा केंद्र और संवैधानिक निकायों को संदेश देने की उस परंपरा का हिस्सा है, जो विशेष रूप से चुनाव सुधार के सवालों पर तेज़ होती रही है। अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग इस प्रस्ताव पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।