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पंजाब विधानसभा चुनाव तक SIR पर रोक लगाए चुनाव आयोग: कांग्रेस अध्यक्ष वडिंग

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पंजाब विधानसभा चुनाव तक SIR पर रोक लगाए चुनाव आयोग: कांग्रेस अध्यक्ष वडिंग

सारांश

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष वडिंग ने विधानसभा चुनाव से पहले वोटर सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर रोक की माँग की है। उनका तर्क है कि नए फॉर्म 6 की जटिलताएँ और सूची से संभावित नाम-हटाव लाखों असली मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित कर सकता है।

मुख्य बातें

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने 24 सितंबर 2026 को विधानसभा चुनाव तक SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) पर तत्काल रोक की माँग की।
माँग की गई कि चुनाव 2024 के लोकसभा चुनावों में प्रयुक्त वोटर सूची के आधार पर हों और उसमें से कोई नाम न हटाया जाए।
नए फॉर्म 6 की जटिल शर्तें पहली बार वोट देने वाले हजारों युवाओं के पंजीकरण में बाधा बन रही हैं।
कांग्रेस के अनुसार, पंजाब की वोटर सूची का मसौदा जारी नहीं हुआ है, लेकिन लाखों नाम हटाए जाने की आशंका है।
वडिंग ने माँग की कि SIR को चुनाव के बाद पारदर्शी और सरल प्रक्रिया से संचालित किया जाए।

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने 24 सितंबर 2026 को माँग की कि अगले छह महीनों में प्रस्तावित पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले वोटर सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) पर तत्काल रोक लगाई जाए। उनका कहना है कि SIR की मौजूदा प्रक्रिया लाखों वास्तविक मतदाताओं को मताधिकार से वंचित कर सकती है।

मुख्य माँगें

वडिंग ने स्पष्ट किया कि आगामी विधानसभा चुनाव 2024 के लोकसभा चुनावों में इस्तेमाल की गई मौजूदा वोटर सूची के आधार पर ही कराए जाएँ। उनकी माँग है कि उस सूची से कोई भी नाम नहीं हटाया जाए, क्योंकि यह पहले से सत्यापित और स्वीकृत सूची है।

उन्होंने यह भी कहा कि SIR को विधानसभा चुनाव के बाद पूरी पारदर्शिता और सरलीकृत प्रक्रिया के साथ संचालित किया जाए — न कि चुनाव की पूर्व संध्या पर।

पहली बार वोट देने वालों पर असर

वडिंग ने तर्क दिया कि नए 'फॉर्म 6' की जटिल शर्तें हजारों पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के पंजीकरण में बाधा बन रही हैं। खासतौर पर वह शर्त जिसमें आवेदक को पिछली वोटर सूची में अपने माता-पिता या दादा-दादी का संदर्भ देना होता है — यह प्रक्रिया व्यावहारिक रूप से बहुत कठिन बताई जा रही है।

कांग्रेस अध्यक्ष के अनुसार, पंजाब के लिए मतदाता सूची का मसौदा अभी आधिकारिक रूप से जारी नहीं हुआ है, किंतु 'संकेत और आशंकाएँ' हैं कि बड़े पैमाने पर नाम हटाए जा सकते हैं।

कांग्रेस का पक्ष

वडिंग ने कहा, 'यह न्याय और चुनावी लोकतंत्र का मजाक होगा कि चुनाव से कुछ महीने पहले ही मतदाताओं के एक बड़े हिस्से को वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया जाए।' उन्होंने इसे मतदान के 'कीमती अधिकार' पर सीधा हमला बताया।

गौरतलब है कि यह माँग ऐसे समय में आई है जब देश के कई राज्यों में SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर दबाव बढ़ाया है। आलोचकों का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले वोटर सूची में बड़े बदलाव चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हैं।

आगे क्या होगा

पंजाब कांग्रेस ने चुनाव आयोग से इस मामले में हस्तक्षेप की अपेक्षा जताई है। अभी तक चुनाव आयोग की ओर से इस माँग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यदि SIR प्रक्रिया जारी रही, तो कांग्रेस कानूनी रास्ता अपनाने का भी विकल्प खुला रख सकती है। पंजाब में विधानसभा चुनाव अगले छह महीनों में होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो पंजाब की जनसांख्यिकीय वास्तविकता के लिहाज से एक संवेदनशील मुद्दा है। जब तक चुनाव आयोग इस पर स्पष्ट रुख नहीं अपनाता, यह विवाद चुनावी वैधता को लेकर अदालती लड़ाई में भी तब्दील हो सकता है।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
SIR यानी 'विशेष गहन पुनरीक्षण' वह प्रक्रिया है जिसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूची को अद्यतन करता है — नाम जोड़े और हटाए जाते हैं। विवाद इसलिए है क्योंकि कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव से ठीक पहले यह प्रक्रिया चलाने से लाखों वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हो सकते हैं।
वडिंग ने नए फॉर्म 6 पर क्या आपत्ति जताई है?
वडिंग के अनुसार, नए फॉर्म 6 में पहली बार मतदाता पंजीकरण के लिए माता-पिता या दादा-दादी का पिछली वोटर सूची में संदर्भ देना अनिवार्य किया गया है, जो हजारों युवाओं के लिए व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन है। इससे योग्य मतदाता मताधिकार से वंचित हो सकते हैं।
कांग्रेस ने चुनाव के लिए कौन-सी वोटर सूची इस्तेमाल करने की माँग की है?
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष वडिंग ने माँग की है कि विधानसभा चुनाव 2024 के लोकसभा चुनावों में प्रयुक्त मतदाता सूची के आधार पर ही कराए जाएँ और उसमें से किसी भी नाम को नहीं हटाया जाए।
पंजाब विधानसभा चुनाव कब होने की उम्मीद है?
कांग्रेस के बयान के अनुसार, पंजाब में विधानसभा चुनाव अगले छह महीनों में होने की संभावना है। आधिकारिक चुनाव तारीखों की घोषणा अभी चुनाव आयोग द्वारा नहीं की गई है।
चुनाव आयोग ने इस माँग पर क्या कहा है?
अब तक चुनाव आयोग की ओर से कांग्रेस की SIR रोकने की माँग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पंजाब की मतदाता सूची का मसौदा भी अभी आधिकारिक रूप से जारी नहीं किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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