अनुसूचित जाति कल्याण योजनाओं की निगरानी: थर्ड-पार्टी मूल्यांकन और DBT से पारदर्शिता सुनिश्चित
सारांश
मुख्य बातें
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय अनुसूचित जाति (SC) समुदायों के शैक्षिक विकास, आजीविका सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए अपनी कल्याणकारी योजनाओं की नियमित आंतरिक समीक्षा, थर्ड-पार्टी मूल्यांकन और सामाजिक ऑडिट करता है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार, 28 अगस्त को यह जानकारी दी।
निगरानी तंत्र का ढाँचा
अधिकारी के अनुसार, मंत्रालय राष्ट्रीय स्तर के चिंतन शिविरों, क्षेत्रीय बैठकों, राष्ट्रीय सम्मेलनों और हितधारकों के साथ परामर्श के माध्यम से योजनाओं के कार्यान्वयन की निगरानी करता है। इसके अतिरिक्त, कार्यान्वयन में कमियों की पहचान और समय पर सुधारात्मक उपायों के लिए मासिक एवं त्रैमासिक व्यय लक्ष्यों की भी नियमित समीक्षा की जाती है।
यह ऐसे समय में आया है जब अनुसूचित जाति कल्याण योजनाओं में पारदर्शिता और लाभार्थी-लक्ष्यीकरण को लेकर देशभर में चर्चा तेज है। गौरतलब है कि थर्ड-पार्टी मूल्यांकन की प्रक्रिया सरकारी योजनाओं में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अपनाई जाने वाली एक स्थापित अंतरराष्ट्रीय पद्धति है।
प्रमुख योजनाएँ और आवंटन
आधिकारिक बयान के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक निम्नलिखित प्रमुख पहलों के लिए धनराशि आवंटित की गई है:
एससी छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति, राष्ट्रीय फेलोशिप, राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति, टॉप क्लास एजुकेशन, मुफ्त कोचिंग, प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति, प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (PM-AJAY), लक्षित क्षेत्रों में हाई स्कूलों में छात्रों के लिए आवासीय शिक्षा योजना (SHRESHTA), एससी के लिए वेंचर कैपिटल फंड और कौशल-विकास कार्यक्रम इन योजनाओं में शामिल हैं।
DBT से पारदर्शिता और सटीक लक्ष्यीकरण
छात्रवृत्ति सहायता मुख्यतः प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से वितरित की जाती है, जिससे पात्र छात्रों के बैंक खातों में राशि सीधे और तेज़ी से पहुँचती है। अधिकारियों के अनुसार, यह तंत्र वितरण में होने वाली देरी को कम करता है और बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करता है।
DBT प्रणाली सटीक लाभार्थी-लक्ष्यीकरण को भी सक्षम बनाती है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि सरकारी संसाधन वास्तविक पात्र लाभार्थियों तक पहुँचें।
जागरूकता और पहुँच बढ़ाने के प्रयास
मंत्रालय राष्ट्रीय और क्षेत्रीय समाचार पत्रों में विज्ञापनों, सोशल मीडिया अभियानों और राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के साथ नियमित फॉलो-अप के माध्यम से पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं की जानकारी पहुँचाने का प्रयास करता है। इन प्रयासों का उद्देश्य आवेदन-प्रस्तावों की संख्या बढ़ाना और आवंटित धनराशि का समय पर उपयोग सुनिश्चित करना है।
सरकार की प्रतिबद्धता
मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि मजबूत निगरानी, डिजिटल फंड-प्रबंधन प्रणालियों, DBT, नियमित मूल्यांकन और कार्यान्वयन अधिकारियों के साथ करीबी समन्वय के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि अनुसूचित जाति कल्याण योजनाएँ पात्र लाभार्थियों तक प्रभावी ढंग से पहुँचें। आगे चलकर इन योजनाओं के मूल्यांकन परिणाम नीतिगत सुधारों की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएँगे।