महाराष्ट्र FDA का बड़ा फैसला: सिप्ला फार्मा का पुणे सीएंडएफ लाइसेंस 27 अगस्त से रद्द, ₹11.19 लाख का स्टॉक जब्त
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के अन्न एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने 27 अगस्त 2026 को मेसर्स सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड, वडकी, पुणे का कैरी एंड फॉरवर्डिंग (सीएंडएफ) औषधि बिक्री लाइसेंस रद्द कर दिया। यह कार्रवाई रिएक्टिन प्लस टैबलेट्स की पैकेजिंग पर बिना अनुमति के भ्रामक दावे किए जाने और प्रशासन के री-कॉल निर्देशों का पालन न करने के कारण की गई। FDA ने इस मामले में ₹11.19 लाख मूल्य का दवा स्टॉक पहले ही जब्त कर लिया था।
मुख्य घटनाक्रम
जून 2026 के आसपास FDA ने वडकी, जिला पुणे स्थित सिप्ला फार्मा के मुख्य गोदाम का निरीक्षण किया। जाँच में पाया गया कि रिएक्टिन प्लस टैबलेट्स — जो एक शेड्यूल-एच श्रेणी की दवा है अर्थात डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली दवा — की पैकेजिंग पर 'एनाल्जेसिक एवं एंटीपायरेटिक' (दर्द निवारक एवं बुखार कम करने वाली) का दावा बिना किसी अनुमति के किया गया था।
FDA के अनुसार यह दावा औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 तथा नियम, 1945 के प्रावधानों का सीधा उल्लंघन है। विभाग ने ₹11.19 लाख मूल्य का स्टॉक जब्त करते हुए कंपनी को इस मिसब्रांडेड दवा को बाजार से वापस मँगाने (री-कॉल) के निर्देश जारी किए थे।
कंपनी ने निर्देशों का पालन नहीं किया
FDA के अनुसार, कंपनी ने री-कॉल संबंधी निर्देशों का पूर्ण रूप से पालन नहीं किया। इसके बाद आगे की जाँच में और गंभीर अनियमितताएँ सामने आईं, जिसके चलते प्रशासन ने 27 अगस्त 2026 से कंपनी का सीएंडएफ बिक्री लाइसेंस रद्द करने का निर्णय लिया।
सार्वजनिक स्वास्थ्य पर असर
FDA ने स्पष्ट किया कि शेड्यूल-एच दवाओं की पैकेजिंग पर इस प्रकार के अनधिकृत दावे नागरिकों में सेल्फ-मेडिकेशन की प्रवृत्ति को बढ़ावा दे सकते हैं — यानी बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने की आदत। प्रशासन के अनुसार, यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा है।
FDA का आगे का रुख
महाराष्ट्र FDA ने स्पष्ट किया है कि औषधियों की गुणवत्ता, सुरक्षा और कानूनी वितरण सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण और प्रवर्तन कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि भविष्य में भी नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के विरुद्ध इसी तरह की कड़ी कार्रवाई की जाएगी, ताकि नागरिकों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दवाएँ मिल सकें।